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...मम पद गहें न तोर उबारा
अमर उजाला मथुरा
Updated Sat, 08 Oct 2016 11:02 PM IST
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रावण-अंगद संवाद लीला का मंचन
- फोटो : अमर उजाला
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चित्रकूट मसानी पर विभीषण शरणागत और रावण-अंगद संवाद लीला का मंचन किया गया। लंका दहन करने के बाद हनुमानजी अपने दल में पहुंचते हैं। सीताजी की चूड़ामणि रामजी को दिखाते हैं। प्रभु श्रीराम सुग्रीव को लंका में कूच करने का आदेश देते हैं।
वानर सेना विशाल समुद्र देखकर मायूस हो जाती है। इसके बाद नल-नील की मदद से समुद्र पर सेतु का निर्माण होता है। इससे पहले विभीषण अपने भाई रावण को समझाता है कि श्रीराम से बैर ठीक नहीं। सीता को सम्मानपूर्वक लौटा दो। इस पर रावण विभीषण को लात मारकर लंका से निकाल देता है।
विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में आ जाते हैं। प्रभु समुद्र जल से विभीषण का तिलक करके लंका का राजा घोषित कर देते हैं। समुद्र पार कर वानर सेना जब लंका पहुंचती है तो अंगद को दूत बनाकर रावण के पास भेजा जाता है। रामदूत अंगद रावण को समझाते हैं कि तुम श्रीराम की शरण में चले जाओ। यह सुनकर रावण गुस्सा हो जाता है।
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अंगद रावण की सभा में अपना पैर जमीन पर जमा देते है और चुनौती देते हैं कि कोई भी मेरा पैर हटा देगा तो हम हार स्वीकार कर लेंगे। बड़े-बड़े उनका पैर नहीं हटा पाते और अंत में रावण स्वयं आता है। जैसे ही वह झुकता है, अंगद अपना पैर हटा लेते हैं और कहते हैं कि तुम श्रीराम के पैर पकड़ लो तुम्हारा उद्धार हो जाएगा।
मीडिया प्रभारी विपुल पारिक के मुताबिक नौ अक्तूबर को लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध की लीला शाम चार बजे से रामलीला मैदान में होगी। यही लीला रात में चित्रकूट मसानी पर होगी।
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वानर सेना विशाल समुद्र देखकर मायूस हो जाती है। इसके बाद नल-नील की मदद से समुद्र पर सेतु का निर्माण होता है। इससे पहले विभीषण अपने भाई रावण को समझाता है कि श्रीराम से बैर ठीक नहीं। सीता को सम्मानपूर्वक लौटा दो। इस पर रावण विभीषण को लात मारकर लंका से निकाल देता है।
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विभीषण प्रभु श्रीराम की शरण में आ जाते हैं। प्रभु समुद्र जल से विभीषण का तिलक करके लंका का राजा घोषित कर देते हैं। समुद्र पार कर वानर सेना जब लंका पहुंचती है तो अंगद को दूत बनाकर रावण के पास भेजा जाता है। रामदूत अंगद रावण को समझाते हैं कि तुम श्रीराम की शरण में चले जाओ। यह सुनकर रावण गुस्सा हो जाता है।
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अंगद रावण की सभा में अपना पैर जमीन पर जमा देते है और चुनौती देते हैं कि कोई भी मेरा पैर हटा देगा तो हम हार स्वीकार कर लेंगे। बड़े-बड़े उनका पैर नहीं हटा पाते और अंत में रावण स्वयं आता है। जैसे ही वह झुकता है, अंगद अपना पैर हटा लेते हैं और कहते हैं कि तुम श्रीराम के पैर पकड़ लो तुम्हारा उद्धार हो जाएगा।
मीडिया प्रभारी विपुल पारिक के मुताबिक नौ अक्तूबर को लक्ष्मण शक्ति, कुंभकरण वध की लीला शाम चार बजे से रामलीला मैदान में होगी। यही लीला रात में चित्रकूट मसानी पर होगी।