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मंद पड़ा जिले में सरकारी कामकाज
ब्यूरो, अमर उजाला मथुरा
Updated Thu, 15 Sep 2016 12:37 AM IST
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धरना
संविदा स्वास्थ्यकर्मियों और आशाओं की काम बंद हड़ताल ने स्वास्थ्य विभाग की कई योजनाओं को चौपट कर दिया है। इसमें मुख्य रूप से राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की राष्ट्रीय टीकाकरण योजना भी बुरी तरह से प्रभावित हो रही है। लेखपालों की हड़ताल से तहसील का कामकाज मंद पड़ गया है।
गौरतलब है राष्ट्रीय टीकाकरण में मथुरा जिला पहले ही उत्तर प्रदेश में 74वें स्थान पर है। यहां टीकाकरण का प्रतिशत मात्र 62 है। इस बीच संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की 10 दिन से चल रही कामबंद हड़ताल ने इस योजना को और चौपट कर दिया है। कोढ़ में खाज बीते तीन दिनों से आशाओं की हड़ताल भी है।
कर्मचारियों की इस हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना, जननी सुरक्षा योजना सहित कई और योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी बुरा असर पड़ा रहा है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना में सभी चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ संविदा पर ही कार्यरत है।
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वहीं टीकाकरण में एएनएम और आशाओं की अहम भूमिका है। लेखपालों की हड़ताल से तहसील से बनने वाले प्रमाणपत्र रुक गए हैं, जबकि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की हड़ताल से आंगनाबाड़ी केंद्र सूने हो गए हैं।
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गौरतलब है राष्ट्रीय टीकाकरण में मथुरा जिला पहले ही उत्तर प्रदेश में 74वें स्थान पर है। यहां टीकाकरण का प्रतिशत मात्र 62 है। इस बीच संविदा स्वास्थ्यकर्मियों की 10 दिन से चल रही कामबंद हड़ताल ने इस योजना को और चौपट कर दिया है। कोढ़ में खाज बीते तीन दिनों से आशाओं की हड़ताल भी है।
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कर्मचारियों की इस हड़ताल से स्वास्थ्य विभाग की राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना, जननी सुरक्षा योजना सहित कई और योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी बुरा असर पड़ा रहा है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य गारंटी योजना में सभी चिकित्सक और मेडिकल स्टाफ संविदा पर ही कार्यरत है।
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वहीं टीकाकरण में एएनएम और आशाओं की अहम भूमिका है। लेखपालों की हड़ताल से तहसील से बनने वाले प्रमाणपत्र रुक गए हैं, जबकि आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की हड़ताल से आंगनाबाड़ी केंद्र सूने हो गए हैं।