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जवाहर बाग हिंसा को लेकर जांच आयोग से मिले अधिवक्ता

Sat, 09 Jul 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला मथुरा
अमर उजाला मथुरा Updated Sat, 09 Jul 2016 11:30 PM IST
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advocates meet with enquiry commission
jawahar bagh
जवाहर बाग हिंसा की जांच कर रहे न्यायिक आयोग के समक्ष अधिवक्ता पेश हुए और अपना पक्ष रखा। शपथ पत्र भी दिए गए हैं। अधिवक्ताओं ने जवाहर बाग हिंसा के लिए तत्कालीन पुलिस और प्रशासनिक अफसरों को जिम्मेदार ठहराया है। कहा है कि अगर अधिकारियों ने गंभीरता से लिया होता तो यह हालात न होते।
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जवाहर बाग में दो जून को हुई हिंसा में दो पुलिस अधिकारियों समेत तीस लोगों की मौत हो गई थी। प्रकरण की जांच न्यायिक आयोग कर रहा है। आयोग को अब तक 75 शपथ पत्र लोगों ने सौंप दिए हैं। शनिवार को क्लेम फोरम से जुड़े अधिवक्ताओं ने न्यायिक आयोग के सचिव प्रमोद कुमार गोयल के सामने अपना पक्ष रखा।
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अधिवक्ता ओमवीर सारस्वत, बृजेश कुमार, ओपी उपाध्याय, रघुनाथ रजावत और दीपक अग्रवाल ने कहा है कि तत्कालीन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने कोई खास प्रयास जवाहर बाग को खाली कराने के लिए नहीं किए। रामवृक्ष यादव जवाहर बाग पर कब्जा करना चाहता था। प्रदेश सरकार के एक मंत्री का संरक्षण प्राप्त था रामवृक्ष यादव को। 
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अधिवक्ताओं ने कहा कि एसपी सिटी पर जब हमला हुआ तो उनके साथ तमाम पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी थे लेकिन किसी ने भी उन्हें बचाने की कोशिश नहीं की। सभी लोग एसपी सिटी को जवाहर बाग में छोड़कर भाग गए थे। अधिवक्ताओं ने अपने शपथ पत्र न्यायिक आयोग के सचिव प्रमोद कुमार गोयल को सौंपे। उनसे मिलने वालों में पीके पचौरी, अरविंद कुमार गौतम, गिर्राज सिंह सिसौदिया महेश गर्ग और भगवान सिंह वर्मा भी शामिल रहे।
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