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Mathura News: डीएपी और यूरिया की जमाखोरी रोकने के लिए रकबा नीति लागू

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jul 2026 12:09 AM IST
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Acreage-based policy implemented to curb hoarding of DAP and Urea
मथुरा। धान की बुआई और खेती के सीजन को देखते हुए जिला प्रशासन खाद (उर्वरक) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने में जुट गया है। जिले के 3,118 सहकारी समितियों और वितरण केंद्रों पर 2,758 मीट्रिक टन डीएपी और यूरिया की नई खेप भेजी जा रही है। इसमें 800 मीट्रिक टन डीएपी और 1,958 मीट्रिक टन यूरिया शामिल है। जिन केंद्रों पर स्टॉक कम था, वहां प्राथमिकता के आधार पर खाद पहुंचाई जा रही है। खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए इस बार प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उर्वरक वितरण में पारदर्शिता लाने के लिए अब किसानों को उनके जमीन के रकबे (क्षेत्रफल) के आधार पर केवल दो से चार बोरी (कट्टे) खाद दी जा रही है। यदि किसी किसान को अधिक मात्रा में खाद की आवश्यकता है, तो उसे अपनी जमीन के दस्तावेज (रकबा) दिखाने होंगे। जिला कृषि अधिकारी आवेश कुमार सिंह ने बताया कि धान के सीजन को देखते हुए जिले में खाद की किल्लत नहीं होने दी जाएगी। इस बार 68,973 मीट्रिक टन (यूरिया, डीएपी, एनपीके, एमओपी और एसएसपी मिलाकर) कुल निर्धारित लक्ष्य तय किया गया है, इसके सापेक्ष वर्तमान उपलब्धता 54,332 मीट्रिक टन है। अभी तक कुल 20,085 मीट्रिक टन यूरिया का वितरण किया गया है।
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30 जून को प्राप्त हुआ अधिकांश स्टॉक सहकारी केंद्रों पर भेजा जा चुका है। नई खेप भी अगले दो दिनों के भीतर सभी वितरण केंद्रों तक पहुंच जाएगी। किसानों को परेशान होने की जरूरत नहीं है, जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध है।
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आवेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
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