{"_id":"6933429409523cde740142a1","slug":"a-thin-line-of-blood-revealed-the-truth-about-mahadevs-unreturned-state-mathura-news-c-29-1-mtr1013-490559-2025-12-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mathura News: खून की पतली लकीर ने महादेव के न लौटने का सच खोल दिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mathura News: खून की पतली लकीर ने महादेव के न लौटने का सच खोल दिया
विज्ञापन
ग्रामीण खून के निशान दिखाते हुए।
राम पंडित
बरसाना। डाहरोली की उस रात घर में एक अजीब सी खामोशी उतर आई थी। रोज समय से घर पहुंच जाने वाले महादेव जब देर तक नहीं लौटे तो मां गंगा की सांसें भारी होने लगीं और पत्नी मीरा बार बार दरवाजे की ओर दौड़कर देखने लगीं। पर उस बेचैनी का सबसे गहरा असर उस चौदह वर्षीय बच्चे नितेश पर हो रहा था, जो समझ तो कुछ नहीं रहा था, पर पिता की आहट न मिलने से उसकी आंखों में डर साफ उतर आया था।
उसने किताबें बंद कर दीं, आंगन में जाकर बैठ गया और हर हल्की आवाज पर सिर उठाकर दरवाजे को देखने लगा। उसे यह भी पता नहीं था कि उसके चारों ओर बदलता माहौल किस तूफान की आहट दे रहा है। मां और पत्नी टार्च लेकर रास्ते की ओर निकलीं। गांव से थोड़ी दूर ही उन्हें सड़क किनारे पड़ी बाइक और चप्पल मिली। बड़े बेटे नटवर को बुलाया गया। टार्च की रोशनी में मिट्टी पर जमी ताजा खून की पतली लकीर दिखाई दी तो दिल बैठ गया। वही लकीर खेतों की ओर मुड़ती गई और इसी लकीर ने पुराना कुआं दिखाया, जहां पानी में तैरता हुआ महादेव का शरीर नजर आया। घर में खबर पहुंची तो सबसे बड़ा धक्का उस बच्चे को लगा जिसकी आंखों में अभी तक उम्मीद बाकी थी।
नितेश भागता हुआ दरवाजे तक आया, लेकिन भीतर से सिर्फ रोने की टूटी आवाजें सुनाई दीं। वह एक पल मां को देखने गया, फिर खामोश होकर उसी आंगन में बैठ गया जहां हर रात पिता उसे हंसाते थे। नितेश को अब भी पूरी तरह समझ नहीं आया था कि लोग उसे क्यों गले लगाकर चुप हो जाते हैं, उसके सिर पर हाथ क्यों फेरते हैं और वह जिस रास्ते को बार बार देखता है, उस रास्ते पर पिता क्यों नहीं लौट रहे। उसकी पीड़ा सबसे अनजानी है। क्योंकि वह शब्दों में कुछ कह नहीं पाता, बस आंखों से पूछता रहता है। डाहरोली के इस घर में अब सिर्फ मातम है। मां गंगा की पुकार, पत्नी मीरा का टूटा इंतजार और बेटे नितेश की मासूम खामोशी, तीनों मिलकर बता रहे हैं कि एक महादेव नहीं गया, पूरा घर उजड़ गया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
बरसाना। डाहरोली की उस रात घर में एक अजीब सी खामोशी उतर आई थी। रोज समय से घर पहुंच जाने वाले महादेव जब देर तक नहीं लौटे तो मां गंगा की सांसें भारी होने लगीं और पत्नी मीरा बार बार दरवाजे की ओर दौड़कर देखने लगीं। पर उस बेचैनी का सबसे गहरा असर उस चौदह वर्षीय बच्चे नितेश पर हो रहा था, जो समझ तो कुछ नहीं रहा था, पर पिता की आहट न मिलने से उसकी आंखों में डर साफ उतर आया था।
उसने किताबें बंद कर दीं, आंगन में जाकर बैठ गया और हर हल्की आवाज पर सिर उठाकर दरवाजे को देखने लगा। उसे यह भी पता नहीं था कि उसके चारों ओर बदलता माहौल किस तूफान की आहट दे रहा है। मां और पत्नी टार्च लेकर रास्ते की ओर निकलीं। गांव से थोड़ी दूर ही उन्हें सड़क किनारे पड़ी बाइक और चप्पल मिली। बड़े बेटे नटवर को बुलाया गया। टार्च की रोशनी में मिट्टी पर जमी ताजा खून की पतली लकीर दिखाई दी तो दिल बैठ गया। वही लकीर खेतों की ओर मुड़ती गई और इसी लकीर ने पुराना कुआं दिखाया, जहां पानी में तैरता हुआ महादेव का शरीर नजर आया। घर में खबर पहुंची तो सबसे बड़ा धक्का उस बच्चे को लगा जिसकी आंखों में अभी तक उम्मीद बाकी थी।
विज्ञापन
नितेश भागता हुआ दरवाजे तक आया, लेकिन भीतर से सिर्फ रोने की टूटी आवाजें सुनाई दीं। वह एक पल मां को देखने गया, फिर खामोश होकर उसी आंगन में बैठ गया जहां हर रात पिता उसे हंसाते थे। नितेश को अब भी पूरी तरह समझ नहीं आया था कि लोग उसे क्यों गले लगाकर चुप हो जाते हैं, उसके सिर पर हाथ क्यों फेरते हैं और वह जिस रास्ते को बार बार देखता है, उस रास्ते पर पिता क्यों नहीं लौट रहे। उसकी पीड़ा सबसे अनजानी है। क्योंकि वह शब्दों में कुछ कह नहीं पाता, बस आंखों से पूछता रहता है। डाहरोली के इस घर में अब सिर्फ मातम है। मां गंगा की पुकार, पत्नी मीरा का टूटा इंतजार और बेटे नितेश की मासूम खामोशी, तीनों मिलकर बता रहे हैं कि एक महादेव नहीं गया, पूरा घर उजड़ गया। संवाद
विज्ञापन