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आत्मरक्षा में समर्थ होने को बेटियों ने थामी बंदूक
Mathura
Updated Thu, 12 Jun 2014 05:30 AM IST
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वृंदावन। वात्सल्य ग्राम में चल रहे बालिका व्यक्तित्व विकास शिविर के अंतर्गत बालिकाओं को अस्त्र-शस्त्र चलाने की विधा में निपुण बनाया जा रहा है। जिससे महिलाएं आत्म सम्मान व आत्मरक्षा में समर्थ हो सकें। व्यक्तित्व विकास शिविर के अंतर्गत देश के विभिन्न प्रांतों से 85 छात्राएं निरंतर प्रशिक्षण ले रही हैं।
बंदूक प्रशिक्षक अंबरीक सिंह ने बताया कि बंदूक चलाने की विद्या पर पुरुषों का ही एकाधिकार रहा है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में महिलाओं में आत्मविश्वास का भाव पैदा करनेे के लिए इस तरह के अभ्यास निरंतर जरूरी हैं। लगन के साथ सीखी हुई विद्या व्यर्थ नहीं होती, बल्कि स्वयं में आत्मबल जगाती है। शिविर संयोजिका स्वरूप गिरी ने बताया कि समय की गतिशीलता के साथ नारी अब अबला बनकर नहीं रहना चाहती। इस अवसर पर मनु चौधरी, राधा, मान्या, रिंकी जोशी, निधि रावत ने प्रशिक्षण लिया।
छठा दिन नारी शक्ति दिवस के रूप में मनाया
वृंदावन। शिविर का छठवां दिन नारी शक्ति दिवस के रूप में मनाया गया। वात्सल्य ग्राम के व्यवस्थापक डा.अभय कुमार राय ने भारत के वैभवशाली इतिहास में नारी की भूमिका विषय पर विचार रखे। वात्सल्य मिलन में नृत्य प्रतियोगिता भी हुई। इसमें यशस्वनी प्रथम, तपस्वनी द्वितीय और ओजस्वनी टोली तृतीय स्थान पर रही। इस अवसर पर गुरविंदर कौर, अनीता पांचाल, प्रभाघोष, साध्वी स्वरूप गिरि, सत्यशील गिरि, सत्यदीपा, साध्या, ज्योतिष्ना आदि उपस्थित थे।
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बंदूक प्रशिक्षक अंबरीक सिंह ने बताया कि बंदूक चलाने की विद्या पर पुरुषों का ही एकाधिकार रहा है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में महिलाओं में आत्मविश्वास का भाव पैदा करनेे के लिए इस तरह के अभ्यास निरंतर जरूरी हैं। लगन के साथ सीखी हुई विद्या व्यर्थ नहीं होती, बल्कि स्वयं में आत्मबल जगाती है। शिविर संयोजिका स्वरूप गिरी ने बताया कि समय की गतिशीलता के साथ नारी अब अबला बनकर नहीं रहना चाहती। इस अवसर पर मनु चौधरी, राधा, मान्या, रिंकी जोशी, निधि रावत ने प्रशिक्षण लिया।
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छठा दिन नारी शक्ति दिवस के रूप में मनाया
वृंदावन। शिविर का छठवां दिन नारी शक्ति दिवस के रूप में मनाया गया। वात्सल्य ग्राम के व्यवस्थापक डा.अभय कुमार राय ने भारत के वैभवशाली इतिहास में नारी की भूमिका विषय पर विचार रखे। वात्सल्य मिलन में नृत्य प्रतियोगिता भी हुई। इसमें यशस्वनी प्रथम, तपस्वनी द्वितीय और ओजस्वनी टोली तृतीय स्थान पर रही। इस अवसर पर गुरविंदर कौर, अनीता पांचाल, प्रभाघोष, साध्वी स्वरूप गिरि, सत्यशील गिरि, सत्यदीपा, साध्या, ज्योतिष्ना आदि उपस्थित थे।
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