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दर्द के मारों को और कितना भटकाओगे
Mathura
Updated Thu, 12 Jun 2014 05:30 AM IST
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मथुरा। उत्तराखंड त्रासदी में अपने पुत्र, पुत्रवधू, पोते के साथ पुत्री, दामाद और नाती-नातिन को खोकर सब कुछ हार चुके वृद्ध अब मुआवजा पाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। पूर्व में सिर्फ मृत्यु प्रमाणपत्र मांग रहे विभाग अब वारिसान प्रमाण पत्र मांग रहे हैं। ऐसे में सवाल यही उठता है कि अथाह दर्द के मारों को और कितना भटकाओगे।
गोविंदनगर स्थित महाविद्या कालोनी निवासी (65) रमेशचंद अग्रवाल के पुत्र मुकेश अग्रवाल अपनी पत्नी सोनम अग्रवाल और पुत्र रजत अग्रवाल के साथ गत वर्ष उत्तराखंड स्थित केदारनाथ दर्शनार्थ गए थे। वहां आई प्रलय उन्हें लील गई। लापता मुकेश अग्रवाल के भाई वेदप्रकाश अग्रवाल अपने भाई-भाभी और भतीजे की खोज में कई बार उत्तराखंड गए लेकिन सिर्फ मायूसी लेकर लौटे।
उत्तराखंड सरकार ने लापता लोगों को मृत मानने में काफी समय लगाया। हालांकि गत वर्ष नवंबर माह में उत्तराखंड सरकार ने लापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए, लेकिन वृद्ध रमेशचंद अग्रवाल को मृत्यु प्रमाण पत्र पांच माह बाद अब जून माह के प्रथम सप्ताह में मिले हैं। वृद्ध रमेशचंद अग्रवाल ने बताया कि मृत्यु प्रमाणपत्र भी कई बार चक्कर लगाने के बाद ही मिल सके हैं। भीषण गर्मी में उन्हें संबंधित विभागों के चक्कर लगाने पडे़। मायूस अग्रवाल ने बताया कि वह अपने पुत्र और पोते को खोकर सब कुछ हार चुके हैं। सबकुछ जानने और नवंबर माह में मृत्यु प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी प्रदेश सरकार उन्हें सात माह बाद प्रमाण पत्र दे पाई है। कहा कि अब उन्हें तहसील, प्रशासनिक अधिकारी कार्यालयों, बैंक, डाकघर, इंश्योरेंस कंपनी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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कारण पूछने पर बताया कि पहले उनसे बैंक, डाकघर और बीमा कंपनी ने कहा था कि सिर्फ मृत्यु प्रमाणपत्र मिलने पर ही उन्हें मुआवजा और लापता मुकेश की जमा रकम दे दी जाएगी, लेकिन अब उनसे वारिसान सर्टिफिकेट की मांग की जा रही है।
पुत्री और दामाद भी हुए शिकार
वृद्ध रमेशचंद अग्रवाल उत्तराखंड में हुए हादसे के दोहरे शिकार हुए थे। उनके पुत्र मुकेश अग्रवाल के परिवार के साथ आगरा में ब्याही उनकी पुत्री और पूरा परिवार भी केदारनाथ दर्शनों के लिए गया था। यहां प्रलय आने के बाद सभी लोग लापता हो गए थे। बताया कि अभी तक पुत्री और उसके परिवार के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए हैं।
बीमा कंपनी नहीं मान रही प्रलय को दुर्घटना
केदारनाथ प्रलय में लापता हुए मुकेश के छोटे भाई वेदप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि उनके भाई मुकेश अग्रवाल ने बीमा कंपनी से बीमा कराया हुआ था। जब वह मृत्यु प्रमाणपत्र लेकर उनके क्लेम के लिए बीमा कंपनी पहुंचे तो कंपनी सिर्फ मैच्योरिटी की रकम देने के लिए तैयार है और एक्सीडेंटल क्लेम देने से साफ मना कर रही है। बताया कि बीमा कंपनी प्रलय को दुर्घटना मानने से इंकार कर रही है। जबकि आगरा में इसे दुर्घटना मानते हुए बीमा कंपनी द्वारा क्लेम दिए गए हैं।
जनपद से हुए थे नौ लोग लापता
उत्तराखंड स्थित केदारनाथ में आई प्रलय के बाद जनपद से गए लोगों में से करीब नौ लोग लापता हो गए थे। इन लोगों को काफी समय तो उत्तराखंड सरकार ने मृत ही माना था। आखिरकार लापता लोगों के परिजनों के काफी प्रयास करने के बाद नवंबर माह में मृत मानते हुए मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए।
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गोविंदनगर स्थित महाविद्या कालोनी निवासी (65) रमेशचंद अग्रवाल के पुत्र मुकेश अग्रवाल अपनी पत्नी सोनम अग्रवाल और पुत्र रजत अग्रवाल के साथ गत वर्ष उत्तराखंड स्थित केदारनाथ दर्शनार्थ गए थे। वहां आई प्रलय उन्हें लील गई। लापता मुकेश अग्रवाल के भाई वेदप्रकाश अग्रवाल अपने भाई-भाभी और भतीजे की खोज में कई बार उत्तराखंड गए लेकिन सिर्फ मायूसी लेकर लौटे।
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उत्तराखंड सरकार ने लापता लोगों को मृत मानने में काफी समय लगाया। हालांकि गत वर्ष नवंबर माह में उत्तराखंड सरकार ने लापता लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिए गए, लेकिन वृद्ध रमेशचंद अग्रवाल को मृत्यु प्रमाण पत्र पांच माह बाद अब जून माह के प्रथम सप्ताह में मिले हैं। वृद्ध रमेशचंद अग्रवाल ने बताया कि मृत्यु प्रमाणपत्र भी कई बार चक्कर लगाने के बाद ही मिल सके हैं। भीषण गर्मी में उन्हें संबंधित विभागों के चक्कर लगाने पडे़। मायूस अग्रवाल ने बताया कि वह अपने पुत्र और पोते को खोकर सब कुछ हार चुके हैं। सबकुछ जानने और नवंबर माह में मृत्यु प्रमाणपत्र मिलने के बाद भी प्रदेश सरकार उन्हें सात माह बाद प्रमाण पत्र दे पाई है। कहा कि अब उन्हें तहसील, प्रशासनिक अधिकारी कार्यालयों, बैंक, डाकघर, इंश्योरेंस कंपनी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
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कारण पूछने पर बताया कि पहले उनसे बैंक, डाकघर और बीमा कंपनी ने कहा था कि सिर्फ मृत्यु प्रमाणपत्र मिलने पर ही उन्हें मुआवजा और लापता मुकेश की जमा रकम दे दी जाएगी, लेकिन अब उनसे वारिसान सर्टिफिकेट की मांग की जा रही है।
पुत्री और दामाद भी हुए शिकार
वृद्ध रमेशचंद अग्रवाल उत्तराखंड में हुए हादसे के दोहरे शिकार हुए थे। उनके पुत्र मुकेश अग्रवाल के परिवार के साथ आगरा में ब्याही उनकी पुत्री और पूरा परिवार भी केदारनाथ दर्शनों के लिए गया था। यहां प्रलय आने के बाद सभी लोग लापता हो गए थे। बताया कि अभी तक पुत्री और उसके परिवार के मृत्यु प्रमाण पत्र जारी नहीं किए गए हैं।
बीमा कंपनी नहीं मान रही प्रलय को दुर्घटना
केदारनाथ प्रलय में लापता हुए मुकेश के छोटे भाई वेदप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि उनके भाई मुकेश अग्रवाल ने बीमा कंपनी से बीमा कराया हुआ था। जब वह मृत्यु प्रमाणपत्र लेकर उनके क्लेम के लिए बीमा कंपनी पहुंचे तो कंपनी सिर्फ मैच्योरिटी की रकम देने के लिए तैयार है और एक्सीडेंटल क्लेम देने से साफ मना कर रही है। बताया कि बीमा कंपनी प्रलय को दुर्घटना मानने से इंकार कर रही है। जबकि आगरा में इसे दुर्घटना मानते हुए बीमा कंपनी द्वारा क्लेम दिए गए हैं।
जनपद से हुए थे नौ लोग लापता
उत्तराखंड स्थित केदारनाथ में आई प्रलय के बाद जनपद से गए लोगों में से करीब नौ लोग लापता हो गए थे। इन लोगों को काफी समय तो उत्तराखंड सरकार ने मृत ही माना था। आखिरकार लापता लोगों के परिजनों के काफी प्रयास करने के बाद नवंबर माह में मृत मानते हुए मृत्यु प्रमाणपत्र जारी कर दिए गए।