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‘सिन्क्रोफेजर से स्मार्ट ग्रिड का नियंत्रण संभव’
Mathura
Updated Fri, 11 Apr 2014 05:30 AM IST
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मथुरा। जीएलए विश्वविद्यालय ने आईआईटी कानपुर में हुई पांच दिवसीय फैकल्टी डेवलपमेंट कार्यशाला में प्रतिभागिता करने पर शिक्षकों को प्रोत्साहित किया। इसमें विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के शिक्षक अपूर्व सक्सेना और रवि शंकर तिवारी शामिल हुए।
शिक्षक द्वय ने बताया कि कार्यशाला में ‘स्मार्ट ट्रांसमिशन ग्रिड यूजिंग सिन्क्रोफेजर टेक्नोलॉजी’ विषय पर गहन चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि आधुनिक पावर सिस्टम में मांग और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा बाजार परिदृश्य में तेजी से वृद्धि के कारण ट्रांसमिशन ग्रिड को हैवी स्ट्रेस्ड कंडीशन के तहत संचालित किया जा रहा है। जिससे कि अक्सर ग्रिड फेल होने की संभावना बनी रहती है, इसलिए बिजली व्यवस्था में स्थिरता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए एक वास्तविक समय की निगरानी प्रणाली की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि पारंपरिक सुपरवाइजरी कंट्रोल एवं डाटा अधिग्रहण आधारित निगरानी प्रणाली में धीमी रिफ्रेश रेट और माप के एसिनक्रोनस प्रकृति की बिजली व्यवस्था के कारण वास्तविक समय में परिवर्तन को ट्रैक नहीं कर सकते। फेंजर मापन इकाइयाें द्वारा एक बहुत तेज दर से सिंक्रोनाइज वोल्टेज और विद्युत फेजर माप या सिन्क्रोफेजर प्रतिपादन द्वारा इस समस्या को कम किया जा सकता है। इस कार्यशाला में देशभर की शिक्षण संस्थाओं और इंडस्ट्री से आए शिक्षकों और इंजीनियरों ने हिस्सा लिया।
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शिक्षक द्वय ने बताया कि कार्यशाला में ‘स्मार्ट ट्रांसमिशन ग्रिड यूजिंग सिन्क्रोफेजर टेक्नोलॉजी’ विषय पर गहन चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि आधुनिक पावर सिस्टम में मांग और प्रतिस्पर्धी ऊर्जा बाजार परिदृश्य में तेजी से वृद्धि के कारण ट्रांसमिशन ग्रिड को हैवी स्ट्रेस्ड कंडीशन के तहत संचालित किया जा रहा है। जिससे कि अक्सर ग्रिड फेल होने की संभावना बनी रहती है, इसलिए बिजली व्यवस्था में स्थिरता, सुरक्षा और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए एक वास्तविक समय की निगरानी प्रणाली की आवश्यकता है।
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उन्होंने बताया कि पारंपरिक सुपरवाइजरी कंट्रोल एवं डाटा अधिग्रहण आधारित निगरानी प्रणाली में धीमी रिफ्रेश रेट और माप के एसिनक्रोनस प्रकृति की बिजली व्यवस्था के कारण वास्तविक समय में परिवर्तन को ट्रैक नहीं कर सकते। फेंजर मापन इकाइयाें द्वारा एक बहुत तेज दर से सिंक्रोनाइज वोल्टेज और विद्युत फेजर माप या सिन्क्रोफेजर प्रतिपादन द्वारा इस समस्या को कम किया जा सकता है। इस कार्यशाला में देशभर की शिक्षण संस्थाओं और इंडस्ट्री से आए शिक्षकों और इंजीनियरों ने हिस्सा लिया।
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