{"_id":"2-67616","slug":"Mathura-67616-2","type":"story","status":"publish","title_hn":"हाथिया के रौब गांठने वाले 42 होंगे बेहथियार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हाथिया के रौब गांठने वाले 42 होंगे बेहथियार
Mathura
Updated Fri, 11 Oct 2013 05:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मथुरा। हाथिया में रौब गांठने के लिए हथियार टांगकर घूमने वाले 42 बेहथियार होंगे। पुलिस ने लाइसेंसों को चिह्नित कर निरस्तीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। गांव में बढ़ी आपराधिक गतिविधियों के चलते हाथिया जनपद पुलिस की हिट लिस्ट में है। वहीं कोसीकलां के 960 शस्त्र लाइसेंसों पर भी पुलिस की कड़ी नजर है।
बहुत समय नहीं हुआ है जब हाथिया में दबिश के दौरान आगरा एसटीएफ के सिपाही सतीश चंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना ने पूरे महकमे को झकझोर दिया था। अब मुजफ्फरनगर में शस्त्र लाइसेंसों के निरस्तीकरण की कार्रवाई के बाद जनपद पुलिस ने भी सत्यापन के साथ निरस्तीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। हाथिया में निरस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। वहीं कोसीकलां के शस्त्र लाइसेंसों पर नजर है। थाना क्षेत्र से जुड़े 60 गांव व मजरों में 960 शस्त्र लाइसेंस हैं। इनके दुरुपयोग को लेकर शस्त्र लाइसेंस सत्यापन का काम शुरू होने जा रहा है। इसमें शस्त्राें पर जारी किए गए कारतूस तथा उनकी उपलब्धता तथा प्रयोग करने का कारण जाना जाएगा। एसपी देहात रौहन पी कनय ने बताया कि आगामी सप्ताह से दोनों प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
----------------
पुलिस डाकिया के थैले हुए हल्के
मथुरा। प्रदेश में पुलिस कर्मियों से ज्यादा जनता को हथियारों का लाइसेंस जारी कर दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने से कुछ पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। वहीं कुछ में खलबली तची है कि उनकी आमदनी पर ब्रेक लग गया। वहीं रोजाना लाइसेंस फाइल को इधर से उधर ढोने के काम से पुलिस डाकियों के बस्ते का बोझ हल्का हो गया। थाने से एसएसपी कार्यालय रोजाना डाक लाने वाले चंद्रपाल सिंह ने बताया कि जब से रोक का आदेश आया है तब से गुलाबी फाइलों को ढोने का बोझ कम हो गया है।
विज्ञापन
-------------------------
हर छह माह पर लगती थी नई रिपोर्ट
मथुरा। शस्त्र लाइसेंस के लिए एक आवेदन पर तीन से चार बार तक फाइल चली लेकिन लाइसेंस नहीं बना। कभी रिपोर्ट लगने में हीला-हवाली तो कभी कर्मचारियों के न मिलने या फिर अन्य खामी निकलने से छह माह का समय गुजर गया तो फिर से नई आवेदन प्रक्रिया शुरू होती रही। लेकिन डेढ़ साल में मात्र 20 लाइसेंस ही जारी हो सके।
विज्ञापन
बहुत समय नहीं हुआ है जब हाथिया में दबिश के दौरान आगरा एसटीएफ के सिपाही सतीश चंद्र की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना ने पूरे महकमे को झकझोर दिया था। अब मुजफ्फरनगर में शस्त्र लाइसेंसों के निरस्तीकरण की कार्रवाई के बाद जनपद पुलिस ने भी सत्यापन के साथ निरस्तीकरण प्रक्रिया शुरू कर दी है। हाथिया में निरस्तीकरण की प्रक्रिया चल रही है। वहीं कोसीकलां के शस्त्र लाइसेंसों पर नजर है। थाना क्षेत्र से जुड़े 60 गांव व मजरों में 960 शस्त्र लाइसेंस हैं। इनके दुरुपयोग को लेकर शस्त्र लाइसेंस सत्यापन का काम शुरू होने जा रहा है। इसमें शस्त्राें पर जारी किए गए कारतूस तथा उनकी उपलब्धता तथा प्रयोग करने का कारण जाना जाएगा। एसपी देहात रौहन पी कनय ने बताया कि आगामी सप्ताह से दोनों प्रक्रिया अमल में लाई जाएगी।
विज्ञापन
----------------
पुलिस डाकिया के थैले हुए हल्के
मथुरा। प्रदेश में पुलिस कर्मियों से ज्यादा जनता को हथियारों का लाइसेंस जारी कर दिए जाने के मामले में हाईकोर्ट द्वारा रोक लगाने से कुछ पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। वहीं कुछ में खलबली तची है कि उनकी आमदनी पर ब्रेक लग गया। वहीं रोजाना लाइसेंस फाइल को इधर से उधर ढोने के काम से पुलिस डाकियों के बस्ते का बोझ हल्का हो गया। थाने से एसएसपी कार्यालय रोजाना डाक लाने वाले चंद्रपाल सिंह ने बताया कि जब से रोक का आदेश आया है तब से गुलाबी फाइलों को ढोने का बोझ कम हो गया है।
विज्ञापन
-------------------------
हर छह माह पर लगती थी नई रिपोर्ट
मथुरा। शस्त्र लाइसेंस के लिए एक आवेदन पर तीन से चार बार तक फाइल चली लेकिन लाइसेंस नहीं बना। कभी रिपोर्ट लगने में हीला-हवाली तो कभी कर्मचारियों के न मिलने या फिर अन्य खामी निकलने से छह माह का समय गुजर गया तो फिर से नई आवेदन प्रक्रिया शुरू होती रही। लेकिन डेढ़ साल में मात्र 20 लाइसेंस ही जारी हो सके।