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कान्हा के भरोसे महिला जिला चिकित्सालय
Mathura
Updated Mon, 15 Apr 2013 05:30 AM IST
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मथुरा। जरूरत 12 डाक्टरों की है लेकिन कार्यरत हैं सिर्फ तीन। शहर के महर्षि दयानंद सरस्वती महिला जिला चिकित्सालय में यही हालात हैं। प्रसूतिगृह और ओपीडी की सुविधाओं वाले इस अस्पताल में वर्तमान में सिर्फ तीन महिला चिकित्सक सेवाएं दे रही हैं। कुछ दिन पहले एक डॉक्टर आई थीं लेकिन दूसरे ही दिन छोड़कर चली गईं।
महिला जिला चिकित्सालय में रोज लगभग 10 से 15 महिलाएं डिलीवरी के लिए आती हैं। इनमें ऑपरेशन के लिए आईं महिलाएं भी होती हैं। तीन डॉक्टर इनको संभालती हैं। अगर एक भी केस गंभीर हो जाता है तो डॉक्टरों को कई घंटे एक मरीज पर देने पड़ते हैं जिसके चलते बाकी महिलाओं को समुचित चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती। अस्पताल में भर्ती महिलाओं ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के चलते एक बार अस्पताल में भर्ती हो जाने के बाद उन्हें कोई देखने नहीं आ पाता। न ही यहां डॉक्टर समय-समय पर राउंड लगाने आती हैं।
डॉक्टरों की बहुत कमी है। यहां 12 पद स्वीकृत हैं लेकिन हाल में सिर्फ तीन डॉक्टरों से काम चलाना पड़ रहा है। किसी दिन कोई सीरियस केस आ जाता है तो बाकी अन्य प्रसूताओं को संभालना मुश्किल हो जाता है। सीएमओ की तरफ से दो महिला डॉक्टर दी गई हैं, जिन्हें ओपीडी में लगा दिया है।
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-डॉ. कल्याणी मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका
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रेडियोलॉजिस्ट का होता है इंतजार
महिला अस्पताल में काफी लंबे समय से अल्ट्रासाउंड विभाग को संभालने के लिए कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं था। हाल में गुरुवार और शनिवार में दो दिनों के लिए वृंदावन अस्पताल से एक रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था की गई। लेकिन इस रेडियोलॉजिस्ट को पोस्टमार्टम गृह या मॉर्चरी में भी भेज दिया जाता है। मरीज इंतजार में बैठे रहते हैं।
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महिला जिला चिकित्सालय में रोज लगभग 10 से 15 महिलाएं डिलीवरी के लिए आती हैं। इनमें ऑपरेशन के लिए आईं महिलाएं भी होती हैं। तीन डॉक्टर इनको संभालती हैं। अगर एक भी केस गंभीर हो जाता है तो डॉक्टरों को कई घंटे एक मरीज पर देने पड़ते हैं जिसके चलते बाकी महिलाओं को समुचित चिकित्सा सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती। अस्पताल में भर्ती महिलाओं ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के चलते एक बार अस्पताल में भर्ती हो जाने के बाद उन्हें कोई देखने नहीं आ पाता। न ही यहां डॉक्टर समय-समय पर राउंड लगाने आती हैं।
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डॉक्टरों की बहुत कमी है। यहां 12 पद स्वीकृत हैं लेकिन हाल में सिर्फ तीन डॉक्टरों से काम चलाना पड़ रहा है। किसी दिन कोई सीरियस केस आ जाता है तो बाकी अन्य प्रसूताओं को संभालना मुश्किल हो जाता है। सीएमओ की तरफ से दो महिला डॉक्टर दी गई हैं, जिन्हें ओपीडी में लगा दिया है।
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-डॉ. कल्याणी मिश्रा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षिका
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रेडियोलॉजिस्ट का होता है इंतजार
महिला अस्पताल में काफी लंबे समय से अल्ट्रासाउंड विभाग को संभालने के लिए कोई रेडियोलॉजिस्ट नहीं था। हाल में गुरुवार और शनिवार में दो दिनों के लिए वृंदावन अस्पताल से एक रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था की गई। लेकिन इस रेडियोलॉजिस्ट को पोस्टमार्टम गृह या मॉर्चरी में भी भेज दिया जाता है। मरीज इंतजार में बैठे रहते हैं।