फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mathura News ›   7-Month Premature Baby Pihu Found Abandoned on Garbage Heap, Body Ravaged by Insects

मां की कैसी मजबूरी: नौ माह भी कोख में नहीं रख सकी नन्ही जान, कूड़े में फेंक दी नवजात; कीड़ों ने नोचा शरीर

Wed, 09 Sep 2026 01:33 PM IST
Dhirendra Singh तरुण प्रताप सिंह, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, मथुरा
तरुण प्रताप सिंह, अमर उजाला न्यूज नेटवर्क, मथुरा Published by: Dhirendra Singh Updated Wed, 09 Sep 2026 01:33 PM IST
सार

मथुरा के फरह में कूड़े के ढेर पर बोरे में लिपटी मिली सात माह की प्रीमेच्योर बच्ची को कीड़ों ने बुरी तरह घायल कर दिया था। करीब 900 ग्राम वजन की पीहू अब जिला अस्पताल की क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती है, जहां डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ उसकी जिंदगी बचाने में जुटे हैं।
 

विज्ञापन
7-Month Premature Baby Pihu Found Abandoned on Garbage Heap, Body Ravaged by Insects
मां की कैसी मजबूरी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

न जाने क्या मजबूरी रही होगी उस मां की, जो अपनी नन्ही की जान को नौ महीने भी कोख में नहीं रख सकी। मां की इस मजबूरी का खामियाजा सात महीने में जन्म लेने वाली मासूम पहले ही दिन से भुगत रही है। 31 अगस्त को फरह के सलेमपुर रोड पर कोई बेरहम एक दिन की नवजात को बोरे में लपेटकर कूड़े के ढेर पर छोड़कर चला गया। कीड़ों के नोचने पर जब बच्ची ने रोना शुरू किया तो लोगों ने उसकी आवाज सुनी और पुलिस को जानकारी दी। पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया। अब जिला अस्पताल के चिकित्सक बच्ची को सांसें देने में जुटे हुए हैं।
विज्ञापन


 

क्रिटिकल केयर यूनिट में बच्ची की देखभाल कर रहे डाॅक्टर विशाल सिंह ने बताया कि बच्ची की उम्र करीब सात महीने है। उसे पहले वृंदावन के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 2 सितंबर को उसे वृंदावन से जिला अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती किया गया था। कीड़ों के काटने के कारण बच्ची बुरी तहत से जख्मी भी हो गई थी। प्रीमेच्योर होने के कारण उसका वजन करीब 900 ग्राम है। लगातार ड्रेसिंग करने से जख्म तो सही हो गए हैं, लेकिन वह खतरा अभी टला नहीं है। बच्ची को शुरू में ऑक्सीजन पर रखा गया था, लेकिन केवल दो दिन बाद ही वह सामान्य तरीके से सांसें लेने लगी है।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

डाॅ. विशाल का कहना है कि चिकित्सक और नर्सिंग स्टाफ उसे पीहू कहकर बुलाता है। पीहू को शुरुआत में नली से दो एमएल दूध दिया जाता है। अब वह 10 एमएल तक दूध पीने लगी है। उसका वजन बढ़ाने के लिए आईबी फ्लूड भी दिया जा रहा है। अगर वह और तीन-चार दिन इसी तरह से दूध पीती रही तो कटोरी-चम्मच से दूध पिलाया जाएगा। इससे उसके स्वस्थ होने की प्रक्रिया में तेजी आएगी।

 
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि यहां से पूरी तरह से सही होने के बाद बच्ची को बाल शिशु गृह भेजा जाएगा। वहीं से कोई दंपती प्रक्रिया पूरी कर बच्ची को अपना सकता है। फिलहाल अस्पताल में हर कोई बच्ची की स्थिति के बारे में जानकारी भावुक हो जाता है। एक तरफ जहां क्रिटिकल केयर यूनिट में भर्ती अन्य बच्चों के माता-पिता उनके लिए व्याकुल रहते हैं। वहीं, दूसरी तरफ पीहू की परवाह करने वाला चिकित्सीय स्टाफ के अलावा और कोई नहीं है। लोग कहते हैं मासूम ने आंखें खोलने से पहले ही बेरहम लोगों का घिनौना चेहरा देख लिया।
 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed