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संरक्षित स्मारकों के पास किए जाने हैं 110 अवैध निर्माण ध्वस्त
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मथुरा-वृंदावन। मथुरा जनपद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित स्मारकों के पास हुए अवैध निर्माणों पर एएसआई की ओर से अब तक 1187 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। 110 अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश आदेश महानिदेशक नई दिल्ली ने जिलाधिकारी मथुरा को दिए हैं। इससे साफ प्रतीत होता है कि शासन एवं प्रशासन मथुरा जनपद में अवैध निर्माणों को संरक्षण देते हुए राष्ट्रीय/पुरातत्व धरोहरों के प्रति कितना सजग एवं संजीदा है।
यह आंकड़े कहीं न कहीं इन पुरातत्व धरोहरों को नेस्तनाबूद करने के लिए काफी हैं। यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला एडवोकेट की आरटीआई पर केंद्रीय जनसूचना अधिकारी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से उपलब्ध कराई गई है। मथुरा जनपद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित इमारतों के इर्द-गिर्द अवैध निर्माणों का बड़ा जाल बन चुका है। इनसे इन इमारतों के अस्तित्व पर लगातार संकट मंडरा रहा है।
ऐसा नहीं है कि इन निर्माणों के विरुद्ध भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती, लेकिन महज वह कार्रवाई कागजों पर सीमित है। पुरातत्व विभाग की ओर से हजारों एफआईआर दर्ज होने और सैकड़ों ध्वस्तीकरण के आदेशों पर अमल की जिला प्रशासन को फुरसत नहीं है। वहीं, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा ऐसे निर्माणों को न सिर्फ एनओसी दी गई, बल्कि इन्हें शमन जैसी प्रक्रियाएं अपनाकर वैध कर दिया गया है।
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1118 अवैध निर्माणों को कारण बताओ नोटिस
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, आगरा कार्यालय की ओर से मिले आरटीआई के जवाब में यह तथ्य निकलकर सामने आए हैं कि जनवरी 2010 से लेकर जून 2021 तक मथुरा जनपद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित इमारतों के निकट बड़ी तादाद में अवैध निर्माण हुए हैं। इनमें से 1118 निर्माणों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 की धारा 38/1 के तहत अधीक्षण पुरातत्वविद् आगरा कार्यालय द्वारा 849 एवं धारा 38/2 के तहत 247 अवैध निर्माणों के लिए ध्वस्तीकरण आदेश पारित किए जाने के लिए महानिदेशक, एएसआई नई दिल्ली से भी पत्र के माध्यम से प्रार्थना की गई। इनमें से महानिदेशक एएसआई ने 282 अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस भी जारी किए गए। अंतत: एएसआई के महानिदेशक की ओर से जिलाधिकारी मथुरा को 110 निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश दिए गए।
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यह आंकड़े कहीं न कहीं इन पुरातत्व धरोहरों को नेस्तनाबूद करने के लिए काफी हैं। यह जानकारी सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलादकृष्ण शुक्ला एडवोकेट की आरटीआई पर केंद्रीय जनसूचना अधिकारी, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से उपलब्ध कराई गई है। मथुरा जनपद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित इमारतों के इर्द-गिर्द अवैध निर्माणों का बड़ा जाल बन चुका है। इनसे इन इमारतों के अस्तित्व पर लगातार संकट मंडरा रहा है।
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ऐसा नहीं है कि इन निर्माणों के विरुद्ध भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से कोई कार्रवाई नहीं होती, लेकिन महज वह कार्रवाई कागजों पर सीमित है। पुरातत्व विभाग की ओर से हजारों एफआईआर दर्ज होने और सैकड़ों ध्वस्तीकरण के आदेशों पर अमल की जिला प्रशासन को फुरसत नहीं है। वहीं, मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण द्वारा ऐसे निर्माणों को न सिर्फ एनओसी दी गई, बल्कि इन्हें शमन जैसी प्रक्रियाएं अपनाकर वैध कर दिया गया है।
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1118 अवैध निर्माणों को कारण बताओ नोटिस
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, आगरा कार्यालय की ओर से मिले आरटीआई के जवाब में यह तथ्य निकलकर सामने आए हैं कि जनवरी 2010 से लेकर जून 2021 तक मथुरा जनपद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित इमारतों के निकट बड़ी तादाद में अवैध निर्माण हुए हैं। इनमें से 1118 निर्माणों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए एफआईआर दर्ज की गई है। इनमें से प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 की धारा 38/1 के तहत अधीक्षण पुरातत्वविद् आगरा कार्यालय द्वारा 849 एवं धारा 38/2 के तहत 247 अवैध निर्माणों के लिए ध्वस्तीकरण आदेश पारित किए जाने के लिए महानिदेशक, एएसआई नई दिल्ली से भी पत्र के माध्यम से प्रार्थना की गई। इनमें से महानिदेशक एएसआई ने 282 अवैध निर्माणों के ध्वस्तीकरण के लिए नोटिस भी जारी किए गए। अंतत: एएसआई के महानिदेशक की ओर से जिलाधिकारी मथुरा को 110 निर्माणों को ध्वस्त करने के आदेश दिए गए।