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टीवी से चिपके कार्यकर्ता, नहीं खोला मुंह
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Mon, 24 Oct 2016 10:31 PM IST
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सपा कार्यालय
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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सपा में मचे घमासान के बाद सोमवार को पार्टी के जिला कार्यालय पर सन्नाटा छाया रहा। दिन भर गुलजार रहने वाले कार्यालय पर इक्का दुक्का कार्यकर्ता पहुंचे। जिलाध्यक्ष को छोड़कर कोई भी बड़ा नेता कार्यालय नहीं पहुंचा। पूरे दिन अटकलों और अफवाहों का दौर चलता रहा। कुछ भी बोलने से बच रहे सपा नेताओं की निगाहें अब सपा सुप्रीमो और मुख्यमंत्री के फैसले पर टिकी हुई हैं।
सपा में घमासान के बाद सोमवार को जिले के नेता कुछ भी कहने को तैयार नहीं हुए। पार्टी कार्यालय पर जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा रोजाना की तरह समय से पहुंचे मगर कोई और नेता कार्यालय नहीं पहुंचा। इक्का दुक्का कार्यकर्ता ही आए लेकिन उनसे जिलाध्यक्ष ने कोई बात ही नहीं की। कार्यालय पर शाम तक सन्नाटा छाया रहा। खुफिया विभाग के लोग भी कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। कई नेता पूरे दिन अपने घरों में टीवी सैटों के सामने चिपके रहे।
एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सपा मुखिया जो भी निर्णय लेंगे प्रदेश भर के कार्यकर्ता उसका स्वागत करेंगे। युवा और बुजुर्ग नेतृत्व के बीच पार्टी के ही कुछ लोगों ने रार शुरू कराई है। यह लोग वह नेता हैं जो कभी जनता के बीच से चुनकर एमपी या एमएलए नहीं बन सकते। सपा मुखिया के भरोसे को तोड़ने वालों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया ही जाना चाहिए। पार्टी को सपा सुप्रीमो ने खून पसीने से सींचा है उसे घर के लोग ही बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। जो घर का नहीं हुआ वह कार्यकर्ताओं का क्या होगा।
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वफादारी के चक्कर में लखनऊ में डाला डेरा
मैनपुरी। जिले के विधायक पहले से ही शिवपाल और रामगोपाल के खेमों में बंटे हुए हैं। रिश्तेदारी के साथ ही वफादारी दिखाने के चक्कर में लखनऊ में डेरा जमाए हुए हैं। जिला पंचायत सदस्य और ब्लाक प्रमुख भी लखनऊ में ही हैं। हालत यह है कि कोई भी जनप्रतिनिधि कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। उनको सपा सुप्रीमो के संभावित फैसले को लेकर अनजानी सी दहशत भी है।
चुनाव में बदल सकते हैं प्रत्याशी
मैनपुरी। जिले के सपाइयों का मानना है कि सपा मुखिया के दबाव में अगर अखिलेश, शिवपाल, रामगोपाल एक हो जाते हैं तो जिले की सभी विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी बदले जाने की संभावना बढ़ जाएगी। चुनाव के समय सपा सुप्रीमो एक एक सीट पर कड़ी छानबीन के बाद ही प्रत्याशी घोषित करेंगे।
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सपा में घमासान के बाद सोमवार को जिले के नेता कुछ भी कहने को तैयार नहीं हुए। पार्टी कार्यालय पर जिलाध्यक्ष खुमान सिंह वर्मा रोजाना की तरह समय से पहुंचे मगर कोई और नेता कार्यालय नहीं पहुंचा। इक्का दुक्का कार्यकर्ता ही आए लेकिन उनसे जिलाध्यक्ष ने कोई बात ही नहीं की। कार्यालय पर शाम तक सन्नाटा छाया रहा। खुफिया विभाग के लोग भी कार्यालय के चक्कर लगाते रहे। कई नेता पूरे दिन अपने घरों में टीवी सैटों के सामने चिपके रहे।
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एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि सपा मुखिया जो भी निर्णय लेंगे प्रदेश भर के कार्यकर्ता उसका स्वागत करेंगे। युवा और बुजुर्ग नेतृत्व के बीच पार्टी के ही कुछ लोगों ने रार शुरू कराई है। यह लोग वह नेता हैं जो कभी जनता के बीच से चुनकर एमपी या एमएलए नहीं बन सकते। सपा मुखिया के भरोसे को तोड़ने वालों को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाया ही जाना चाहिए। पार्टी को सपा सुप्रीमो ने खून पसीने से सींचा है उसे घर के लोग ही बर्बाद करने पर तुले हुए हैं। जो घर का नहीं हुआ वह कार्यकर्ताओं का क्या होगा।
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वफादारी के चक्कर में लखनऊ में डाला डेरा
मैनपुरी। जिले के विधायक पहले से ही शिवपाल और रामगोपाल के खेमों में बंटे हुए हैं। रिश्तेदारी के साथ ही वफादारी दिखाने के चक्कर में लखनऊ में डेरा जमाए हुए हैं। जिला पंचायत सदस्य और ब्लाक प्रमुख भी लखनऊ में ही हैं। हालत यह है कि कोई भी जनप्रतिनिधि कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। उनको सपा सुप्रीमो के संभावित फैसले को लेकर अनजानी सी दहशत भी है।
चुनाव में बदल सकते हैं प्रत्याशी
मैनपुरी। जिले के सपाइयों का मानना है कि सपा मुखिया के दबाव में अगर अखिलेश, शिवपाल, रामगोपाल एक हो जाते हैं तो जिले की सभी विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी बदले जाने की संभावना बढ़ जाएगी। चुनाव के समय सपा सुप्रीमो एक एक सीट पर कड़ी छानबीन के बाद ही प्रत्याशी घोषित करेंगे।