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Mainpuri News: परंपरागत पकवान बने पुरानी परंपरा, पैक्ड सामान पर निर्भर महिलाएं
Wed, 25 Feb 2026 12:16 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
Updated Wed, 25 Feb 2026 12:16 AM IST
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फोटो 18 कल्पना सक्सेना, पुलंदर की बगिया।
- फोटो : मिहींपुरवा के नवीन गल्लामंडी परिसर में सामूहिक विवाह में मौजूद युगल।
मैनपुरी। महिलाएं परंपरागत पकवानों से दूर होती जा रही हैं। व्यस्त जीवनशैली और समय अभाव के कारण होली पर घरों में बनने वाले पकवान अब बहुत कम हो गए हैं। महिलाएं बाजार में बिकने वाली गुजिया, मठरी, सेव, चिप्स और पापड़ पर निर्भर हो रही हैं। बाजारों में इन दिनों दुकानों पर पैकिंग बंद पकवान की बिक्री बढ़ गई है।
कुछ साल पहले तक होली की आहट से घरों में पकवान की खुशबू बिखरना शुरू हो जाती थी। महिलाएं कई दिनों से पहले से ही आलू, चावल और साबूदाना के चिप्स और पापड़ घर पर बनाकर उन्हें छतों पर सुखाती थीं। होली से दो-तीन दिन पहले घरों में गुजिया, मठरी, सेव, दही बड़े आदि स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते थे। लेकिन बीते कुछ सालों से घरों में बनने वाले पारंपरिक पकवानों में कमी आई है।
महिलाओं ने बताया कि व्यस्त जीवनशैली, बच्चों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान और समय के कमी के कारण होली पर घरों में पकवान बनने में कमी आ रही है। इसके अलावा छोटे होते परिवार के कारण लोग घरों पर पकवान बनाने के बजाय बाजारों से पैकिंग पकवान बनाना अधिक पसंद करते हैं। मांग बढ़ने के कारण बाजारों में स्थित दुकानों पर तमाम तरह के रेडीमेड पकवान उपलब्ध है, जिनकी लोग खरीदारी कर रहे हैं।
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छोटे होते परिवार और महिलाओं की व्यस्त होती जीवनशैली के कारण घरों में पकवान बनना कम हुए हैं। अब महिलाएं घर में खाने की सामग्री बनाने से अच्छा उन्हें बाजार से खरीदना पसंद करती हैं। - कल्पना सक्सेना, पुलंदर की बगिया
महिलाएं भी कामकाजी बन रही हैं। परिवार संभालने के साथ काम की चिंता और कम समय के कारण घरों में पकवान बनाने में कठिनाई होती है। इसके लिए महिलाएं बाजार से खरीदारी करना पसंद कर रही हैं। - रश्मि, वंशी गोहरा
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कुछ साल पहले तक होली की आहट से घरों में पकवान की खुशबू बिखरना शुरू हो जाती थी। महिलाएं कई दिनों से पहले से ही आलू, चावल और साबूदाना के चिप्स और पापड़ घर पर बनाकर उन्हें छतों पर सुखाती थीं। होली से दो-तीन दिन पहले घरों में गुजिया, मठरी, सेव, दही बड़े आदि स्वादिष्ट पकवान बनाए जाते थे। लेकिन बीते कुछ सालों से घरों में बनने वाले पारंपरिक पकवानों में कमी आई है।
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महिलाओं ने बताया कि व्यस्त जीवनशैली, बच्चों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान और समय के कमी के कारण होली पर घरों में पकवान बनने में कमी आ रही है। इसके अलावा छोटे होते परिवार के कारण लोग घरों पर पकवान बनाने के बजाय बाजारों से पैकिंग पकवान बनाना अधिक पसंद करते हैं। मांग बढ़ने के कारण बाजारों में स्थित दुकानों पर तमाम तरह के रेडीमेड पकवान उपलब्ध है, जिनकी लोग खरीदारी कर रहे हैं।
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छोटे होते परिवार और महिलाओं की व्यस्त होती जीवनशैली के कारण घरों में पकवान बनना कम हुए हैं। अब महिलाएं घर में खाने की सामग्री बनाने से अच्छा उन्हें बाजार से खरीदना पसंद करती हैं। - कल्पना सक्सेना, पुलंदर की बगिया
महिलाएं भी कामकाजी बन रही हैं। परिवार संभालने के साथ काम की चिंता और कम समय के कारण घरों में पकवान बनाने में कठिनाई होती है। इसके लिए महिलाएं बाजार से खरीदारी करना पसंद कर रही हैं। - रश्मि, वंशी गोहरा

फोटो 18 कल्पना सक्सेना, पुलंदर की बगिया।- फोटो : मिहींपुरवा के नवीन गल्लामंडी परिसर में सामूहिक विवाह में मौजूद युगल।