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तप से होती है कर्मों की निर्जरा: ब्रह्मचारी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
Updated Mon, 12 Sep 2016 11:34 PM IST
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तप से होती है कर्मों की निर्जरा: ब्रह्मचारी
- फोटो : अमर उजाला
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पर्यूषण पर्व के सातवें दिन उत्तम तप धर्म के विषय में प्रवचन हुए। जैन विद्वान ब्रह्मचारी ने कहा कि तप करके ही कर्मों की निर्जरा की जा सकती है। तप के प्रभाव से मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है और व्यक्ति सुख प्राप्त करता है।
आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बाल ब्रह्मचारी साधना दीदी ने कहा कि जैन मुनि तप के प्रभाव से ही स्वयं को निर्मल बनाते हैं। दुनियां की कोई संपत्ति न होेकर भी मुनि के पास आत्मसंपत्ति का खजाना होता है। वे स्वयं में एक चमत्कार है। दुनियां सोचती है कि रोटी-कपड़ा और मकान पाकर ही खुश रहा जा सकता है, लेकिन इसी दुनियां में जैन मुनि ऐसे संत हैं जो त्रण मात्र भी अपने पास नहीं रखते और जिस दिन आहार प्राप्त नहीं होता। उस दिन और भी प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। वहीं भोगंव में धरणेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि अपनी आत्मा से मोह राग द्वेष रूपी शत्रुओं को दूर करके हमें समस्त विकारी भावों का त्याग कर देना चाहिए। यह प्रत्येक श्रावक का कर्तव्य है कि वह औषधि आहार, अभय तथा ज्ञान का दान करें। इससे पूर्व भोगांव के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर व श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में सामूहिक पूजन की गई। दोपहर में इष्टोपदेश तथा सायंकाल जिनेेंद्र भक्ति का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान डा. कमलेश जैन, डा. योगेश जैन, मयंक जैन, राहुल जैन, जयगुप्त जैन, सुनील जैन, दीपेंद्र जैन, संजय जैन, प्रवीण जैन, अशेष जैन, आशू जैन, अमन जैन, नितिश जैन आदि उपस्थित रहे।
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आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में बाल ब्रह्मचारी साधना दीदी ने कहा कि जैन मुनि तप के प्रभाव से ही स्वयं को निर्मल बनाते हैं। दुनियां की कोई संपत्ति न होेकर भी मुनि के पास आत्मसंपत्ति का खजाना होता है। वे स्वयं में एक चमत्कार है। दुनियां सोचती है कि रोटी-कपड़ा और मकान पाकर ही खुश रहा जा सकता है, लेकिन इसी दुनियां में जैन मुनि ऐसे संत हैं जो त्रण मात्र भी अपने पास नहीं रखते और जिस दिन आहार प्राप्त नहीं होता। उस दिन और भी प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। वहीं भोगंव में धरणेन्द्र कुमार जैन ने कहा कि अपनी आत्मा से मोह राग द्वेष रूपी शत्रुओं को दूर करके हमें समस्त विकारी भावों का त्याग कर देना चाहिए। यह प्रत्येक श्रावक का कर्तव्य है कि वह औषधि आहार, अभय तथा ज्ञान का दान करें। इससे पूर्व भोगांव के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर व श्री चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में सामूहिक पूजन की गई। दोपहर में इष्टोपदेश तथा सायंकाल जिनेेंद्र भक्ति का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान डा. कमलेश जैन, डा. योगेश जैन, मयंक जैन, राहुल जैन, जयगुप्त जैन, सुनील जैन, दीपेंद्र जैन, संजय जैन, प्रवीण जैन, अशेष जैन, आशू जैन, अमन जैन, नितिश जैन आदि उपस्थित रहे।
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