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एक शहीद के स्मारक बनने का आज भी इंतजार

Mon, 25 Jul 2016 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी Updated Mon, 25 Jul 2016 10:51 PM IST
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Still waiting to become a martyr memorial
कारगिल विजय दिवस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कारगिल युद्ध में शहीद हुए जिले के पांच सपूतों में से चार का ही स्मारक बन सका है। शहीदों को लोग भूलते जा रहे हैं अधिकारी और न ही नेता उनको याद करते हैं। उनके परिवारों के सुखदुख में भी उनकी भागीदारी कम ही होती है। मंगलवार को कारगिल विजय दिवस है। हालांकि प्रशासन ने इसकी कोई तैयारी नहीं की इसके चलते लोगों में आक्रोश है। 
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वर्ष 1999 में हुए कारगिल युद्ध में दुश्मनों से लोहा लेकर जिले के पांच सपूतों ने शहादत पाई थी। पांच शहीदों में से चार के गांवों में ही उनकी याद में स्मारक बन सके हैं। एक शहीद का स्मारक अभी तक नहीं बन पाया है। बिछवां क्षेत्र के गांव अंजनी निवासी प्रवीन कुमार यादव ने कारगिल चोटी पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए तीन जून 1999 को शहादत पाई थी। बेवर क्षेत्र के गांव गढ़िया घुटारा के ग्रेनेडियर सिपाही मुनीष कुमार यादव ने भी कारगिल चोटी पर ही दुश्मनों से लोहा लेते हुए तीन जून को 1999 को शहादत पाई थी। कुरावली क्षेत्र के गांव नगला आंध्रा निवासी हेमचरन सिंह यादव ने 23 जुलाई 1999 को दुश्मनों से लड़ते हुए देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। किशनी क्षेत्र के गांव दिवन्नपुर साहिनी के ग्रेनेडियर हवलदार अमरुद्दीन  ने तीन जुलाई 1999 को देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए शहादत दी थी। 
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शहीद का स्मारक 17 साल भी नहीं बना
मैनपुरी। कारगिल शहीद अमरुद्दीन का स्मारक 17 साल बाद भी नहीं बन सका है। शहीद के परिवारीजन किशनी के किसी पार्क में स्मारक बनवाना चाहते हैं। जबकि कस्बा के लोगों का कहना है कि शहीद का जहां अंतिम संस्कार हुआ है उसी स्थान पर स्मारक बनाया जाए। इसके चलते स्मारक का निर्माण अधर में लटका हुआ है।
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शहीदों को नेता भी भूले
मैनपुरी। शहादत के समय बड़ी बयानबाजी करने वाले नेता विजय दिवस पर शहीदों को भूल गए। कारगिल युद्ध के दौरान श्रद्धांजलि देने दिल्ली तक से नेता जिले में आए थे। एंटी टैरेरिस्ट फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने भी शहीदों के घर पहुंचकर आश्वासन दिए थेे लेकिन अब कोई याद नहीं करता। 
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