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नोटबंदी ने तोड़ी भट्ठा संचालकों की कमर

Sat, 10 Dec 2016 11:20 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी Updated Sat, 10 Dec 2016 11:20 PM IST
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notabandee ne todee bhattha sanchaalakon kee kamar
भट्ठा - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नोटबंदी से न केवल नियमित जरूरत के व्यापार को ही नहीं नुकसान पहुंचाया है बल्कि ईंट भट्ठों का संचालन करने वालों की भी कमर तोड़ दी है। बाजार में कैश न होने का ही परिणाम है कि भट्ठों से ईंटों की निकासी एक माह में आधे से भी कम रह गई है। वहीं भट्ठा संचालक अब इसका तोड़ निकालने में जुट गए हैं ताकि व्यापार सुचारु रूप से चलता रहे।
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 उल्लेखनीय है कि जिले में लगभग 140 भट्ठे वर्तमान में संचालित हैं। इन पर लगभग 35 हजार मजदूर काम करते हैं। एक अनुमान के मुताबिक नोटबंदी से पहले उक्त भट्ठों से प्रतिदिन पांच लाख के  लगभग ईंटों की बिक्री होती थी। आठ नवंबर को केंद्र सरकार ने 500 और एक हजार रुपये के नोट बंद कर दिए। इसके चलते बाजार में कैश की कमी हो गई। इसका विपरीत असर ईंट भट्ठा उद्योग पर भी पड़ा है। नोटबंदी के बाद से ईंटों की बिक्री घटकर मात्र दो लाख ईंट रह गई हैं। ऐसे में भट्ठा संचालकों के सामने परेशानी खड़ी हो गई है। इसके चलते कई भट्ठों पर तो ईंट पथाई का काम लगभग बंद सा हो गया है। इस संबंध में ईंट भट्ठा संचालक अमित यादव ने बताया कि नोटबंदी के बाद से बाजार में मांग ही नहीं निकल रही है। यह व्यापार कैश का है। नोटबंदी के बाद न तो दुकानदार और न ही लोग ईंट खरीदने आ रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण भुगतान की समस्या है।
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चेक से भुगतान बना विकल्प
नोटबंदी के बाद पैदा हुई समस्या का हल चेक से भुगतान करना ही है। यह कहना है ईंट भट्ठा एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील वर्मा उर्फ लालू वर्मा का। उन्होंने बताया कि नोटबंदी के बाद व्यापार में समस्याएं आई हैं लेकिन इनका विकल्प तलाशा जा रहा है। जैसे ईंट खरीदारों से चेक से भुगतान लिया जा रहा है। वहीं भट्ठा संचालन के लिए जरूरी सामान और कोयला आदि खरीदने के बाद भुगतान भी चेक के जरिए ही हो रहा है। वहीं केंद्र सरकार की कैश लैस व्यवस्था बनाने के लिए कोशिश की जा रही है कि मजदूरों के बैंक में खाते खुलवाए जाएं ताकि उनकी मजदूरी का भुगतान भी उनके खाते में ही हो।
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