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Mainpuri News: मातृत्व का वरदान... अज्ञानता से संकट में जान
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फोटो 3 डॉ. निशिता यादव
मैनपुरी। मासिक धर्म के दौरान अज्ञानता और लापरवाही महिलाओं की सेहत पर भारी पड़ रही है। पीरियड्स के समय साफ-सफाई न रखने के कारण तरह-तरह की बीमारियां घेर ले रही हैं। सौ शैया अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 50 से 60 केस आ रहे हैं। स्त्री रोग विशेषज्ञ इलाज करने के साथ-साथ जागरूकता बढ़ाने की सलाह दे रही हैं।
मासिक धर्म यानी पीरियड्स, महिलाओं में मातृत्व क्षमता का प्राकृतिक संकेत है। समाज में इसको लेकर मौजूद भ्रम और शर्म-झिझक के कारण मासिक धर्म स्वच्छता एक गंभीर मुद्दा बन गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान स्वच्छता में जरा सी भी लापरवाही संक्रमण को न्योता दे सकती है। सौ शैया अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में महिलाएं इस तरह की परेशानी लेकर आ रही हैं।
स्त्री रोग विशेषज्ञों की सलाह
सौ शैया अस्पताल की डॉ. निशिता यादव कहती हैं कि मासिक धर्म के दौरान शरीर से निकलने वाला रक्त सैनिटरी पैड से सोखा जाता है। इस दौरान शरीर संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। एक ही पैड को लंबे समय तक इस्तेमाल करने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हर 3-4 घंटे में पैड जरूर बदलें। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या सरीन सेंगर के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान सफाई पर विशेष ध्यान दें। पैड बदलने के बाद भी बैक्टीरिया चिपके रह सकते हैं। केमिकल वाले उत्पादों के बजाय हर बार साफ पानी से ही अच्छी तरह सफाई करें। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी पाल ने कहा कि इस्तेमाल किए गए पैड को सही तरीके से डिस्पोज करना भी बेहद जरूरी है। पैड को कागज में लपेटकर कूड़ेदान में डालें और हाथ साफ करें। खुले में फेंकने से बीमारियां फैलती हैं। पैड को टॉयलेट में फ्लश न करें। सौ शैया अस्पताल की डॉ. अनुपमा यादव बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान शरीर का पीएच लेवल बिगड़ सकता है। इसे संतुलित रखने और संक्रमण से बचने के लिए समय-समय पर पानी पीते रहें। इससे डिहाइड्रेशन से भी बचाव होता है।
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बचपन से जागरूकता जरूरी
बालिकाओं को बचपन से ही मासिक धर्म की सही जानकारी और स्वच्छता के उपाय समझाना बेहद आवश्यक है। सफाई न रखने पर खुजली, जलन, मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई) और गंभीर मामलों में किडनी की समस्या हो सकती है।
सौ शैया अस्पताल में यूटीआई के मरीज
जनवरी 1511
फरवरी 1497
मार्च 1569
अप्रैल 1732
मई अब तक 1789
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मासिक धर्म यानी पीरियड्स, महिलाओं में मातृत्व क्षमता का प्राकृतिक संकेत है। समाज में इसको लेकर मौजूद भ्रम और शर्म-झिझक के कारण मासिक धर्म स्वच्छता एक गंभीर मुद्दा बन गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इस दौरान स्वच्छता में जरा सी भी लापरवाही संक्रमण को न्योता दे सकती है। सौ शैया अस्पताल में रोजाना बड़ी संख्या में महिलाएं इस तरह की परेशानी लेकर आ रही हैं।
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स्त्री रोग विशेषज्ञों की सलाह
सौ शैया अस्पताल की डॉ. निशिता यादव कहती हैं कि मासिक धर्म के दौरान शरीर से निकलने वाला रक्त सैनिटरी पैड से सोखा जाता है। इस दौरान शरीर संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। एक ही पैड को लंबे समय तक इस्तेमाल करने से संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए हर 3-4 घंटे में पैड जरूर बदलें। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. दिव्या सरीन सेंगर के मुताबिक, पीरियड्स के दौरान सफाई पर विशेष ध्यान दें। पैड बदलने के बाद भी बैक्टीरिया चिपके रह सकते हैं। केमिकल वाले उत्पादों के बजाय हर बार साफ पानी से ही अच्छी तरह सफाई करें। स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. पल्लवी पाल ने कहा कि इस्तेमाल किए गए पैड को सही तरीके से डिस्पोज करना भी बेहद जरूरी है। पैड को कागज में लपेटकर कूड़ेदान में डालें और हाथ साफ करें। खुले में फेंकने से बीमारियां फैलती हैं। पैड को टॉयलेट में फ्लश न करें। सौ शैया अस्पताल की डॉ. अनुपमा यादव बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान शरीर का पीएच लेवल बिगड़ सकता है। इसे संतुलित रखने और संक्रमण से बचने के लिए समय-समय पर पानी पीते रहें। इससे डिहाइड्रेशन से भी बचाव होता है।
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बचपन से जागरूकता जरूरी
बालिकाओं को बचपन से ही मासिक धर्म की सही जानकारी और स्वच्छता के उपाय समझाना बेहद आवश्यक है। सफाई न रखने पर खुजली, जलन, मूत्र पथ संक्रमण (यूटीआई) और गंभीर मामलों में किडनी की समस्या हो सकती है।
सौ शैया अस्पताल में यूटीआई के मरीज
जनवरी 1511
फरवरी 1497
मार्च 1569
अप्रैल 1732
मई अब तक 1789

फोटो 3 डॉ. निशिता यादव

फोटो 3 डॉ. निशिता यादव

फोटो 3 डॉ. निशिता यादव