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प्रेम से ही परिवार और समाज को रखा जा सकता है एकजुट : अमर साहेब
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फोटो 34 कबीर आश्रम में प्रवचन देते महंत अमर साहेब और मौजूद भक्त। संवाद
मैनपुरी। शहर के कचहरी रोड स्थित रज्जो देवी कबीर आश्रम पर रविवार को महंत अमर साहेब ने प्रवचन दिए। महंत ने कहा कि प्रेम के द्वारा ही परिवार और समाज को एकजुट रखा जा सकता है। इसलिए सभी को आपस में प्रेम करना चाहिए।
महंत ने कहा कि प्रेम की ताकत का अनुभव किसे नहीं है। कौन मनुष्य है जो अपने लिए दूसरों से प्रेम नहीं चाहता। जिसका मन अहंकार और स्वार्थ से भरा होगा व न तो दूसरों को प्रेम दे सकता है और न दूसरे के प्रेम का अनुभव कर सकता है। प्रेम का अनुभव करने के लिए अहंकार का विसर्जन करना पड़ता है। जहां अहंकार केंद्र में होगा वहां प्रेम रह नहीं सकता। प्रेम का केंद्र परहित होता है। निस्वार्थ प्रेम में पाने की नहीं लुटाने की भावना होती है। प्रेम के लुटाने में जो आनंद आता है वह पाने में नहीं। महंत ने कहा कि जो समेट रहे वो सपना है जो लुटा रहे वही अपना है।
भूखे को भोजन, प्यासे को पानी और वृद्ध रोगी को दवा देकर जो लुटाया जाता है, उसका आनंद उसी प्रकार होता है, जिस प्रकार से खेत में बीज बोने के बाद उसके नन्हे पौधों को देखकर। प्रेम उस सरेष का काम करता है जो पुस्तक के हजारों पन्ने जोड़कर रखता है। प्रेम के द्वारा ही परिवार और समाज को जोड़ा जा सकता है। संवाद
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महंत ने कहा कि प्रेम की ताकत का अनुभव किसे नहीं है। कौन मनुष्य है जो अपने लिए दूसरों से प्रेम नहीं चाहता। जिसका मन अहंकार और स्वार्थ से भरा होगा व न तो दूसरों को प्रेम दे सकता है और न दूसरे के प्रेम का अनुभव कर सकता है। प्रेम का अनुभव करने के लिए अहंकार का विसर्जन करना पड़ता है। जहां अहंकार केंद्र में होगा वहां प्रेम रह नहीं सकता। प्रेम का केंद्र परहित होता है। निस्वार्थ प्रेम में पाने की नहीं लुटाने की भावना होती है। प्रेम के लुटाने में जो आनंद आता है वह पाने में नहीं। महंत ने कहा कि जो समेट रहे वो सपना है जो लुटा रहे वही अपना है।
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भूखे को भोजन, प्यासे को पानी और वृद्ध रोगी को दवा देकर जो लुटाया जाता है, उसका आनंद उसी प्रकार होता है, जिस प्रकार से खेत में बीज बोने के बाद उसके नन्हे पौधों को देखकर। प्रेम उस सरेष का काम करता है जो पुस्तक के हजारों पन्ने जोड़कर रखता है। प्रेम के द्वारा ही परिवार और समाज को जोड़ा जा सकता है। संवाद
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