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महिलाओं के हाथ में पतवार, किसकी लगेगी नैया पार
सोनम वारसी
Updated Wed, 15 Feb 2017 11:44 PM IST
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शोभा यात्रा में नाचतीं महिला श्रद्धालु।
- फोटो : अमर उजाला
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विधानसभा चुनाव में आधी आबादी की भूमिका अहम है। पिछले विधानसभा चुनाव से इस चुनाव में महिला मतदाताओं की संख्या में 81,304 हजार की बढ़ोत्तरी हुई है। जो इशारा करता है कि महिलाएं मतदान के प्रति जागरूक हुई हैं। करीब 46 फीसदी महिला मतदाता चुनाव परिणाम प्रभावित करने का माद्दा रखती हैं। कई पार्टियों की महिला प्रकोष्ठ महिलाओं के बीच ही पैठ बना रही हैं।
इस बार विधानसभा चुनाव के प्रचार को देखकर कहा जा सकता है कि महिलाआें में चुनाव को लेकर जागरूकता आई है। प्रचार में जहां महिलाएं अधिक सक्रिय नजर आ रही हैं वहीं चौपालों तो पार्कों में बैठी महिलाएं चुनाव की चर्चा करती दिखती हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े देखें तो महिला मतदाताओं की संख्या 517828 थी जबकि अब बढ़कर 599132 हो गई है। पिछले चुनाव से इस बार
महिला मतदाताओं की 81,304 से अधिक बढ़ी है।
यही कारण है कि प्रमुख दलों ने महिला मतदाताओं को पाले में लाने के लिए नए तरीके से कवायद शुरू की है। प्रमुख दलों की महिला प्रकोष्ठों की पदाधिकारी महिलाआें के बीच जाकर पैठ बना रही हैं। वहीं सपा, बसपा, भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशियों के परिवार की महिलाओं ने अपने पक्ष में वोटरों को करने के लिए पहल शुरू कर दी है। किशनी में बसपा प्रत्याशी कमलेश कुमारी स्वयं महिला होने के नाते आधी आबादी को महिला को ही वोट देने की अपील कर रही हैं। करहल से भाजपा प्रत्याशी रमा शाक्य भी महिला होने के कारण आधी आबादी को पक्ष में करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। किशनी से ही जन अधिकार मंच से महिला प्रत्याशी सुमन दिवाकर महिलाओं को रिझाने में पीछे नहीं हैं।
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ये कहती हैं महिलाएं
आरसी बालिका इंटर कालेज की पूर्व प्रधानाचार्य मानकुमारी राठौर कहती हैं कि हालांकि पुरुष प्रधान समाज में महिलाएं पुरुषों के अनुसार ही वोट करती हैं लेकिन इस बार महिलाओं का नजरिया कुछ बदला है। अधिकांश महिलाएं कह रही हैं कि इस बार वह अपने विवेक से मतदान करेंगी। गंगा सहायक कन्या इंटर कालेज की पूर्व प्रधानाचार्या ऊषा टिंगल का कहना है कि ऐसा नहीं कि महिलाएं अपने विवेक से निर्णय नहीं ले सकती लेकिन घर के पुरुष उन्हें ऐसा करने नहीं देते। राजनीति में भी पुरुष हावी हैं लेकिन महिलाएं साहस दिखाएं।
जिले में महिला मतदाता
विधानसभा 2012 2017
मैनपुरी 129868 149525
भोगांव 128845 152678
किशनी 116240 136087
करहल 142873 160842
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इस बार विधानसभा चुनाव के प्रचार को देखकर कहा जा सकता है कि महिलाआें में चुनाव को लेकर जागरूकता आई है। प्रचार में जहां महिलाएं अधिक सक्रिय नजर आ रही हैं वहीं चौपालों तो पार्कों में बैठी महिलाएं चुनाव की चर्चा करती दिखती हैं। वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े देखें तो महिला मतदाताओं की संख्या 517828 थी जबकि अब बढ़कर 599132 हो गई है। पिछले चुनाव से इस बार
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महिला मतदाताओं की 81,304 से अधिक बढ़ी है।
यही कारण है कि प्रमुख दलों ने महिला मतदाताओं को पाले में लाने के लिए नए तरीके से कवायद शुरू की है। प्रमुख दलों की महिला प्रकोष्ठों की पदाधिकारी महिलाआें के बीच जाकर पैठ बना रही हैं। वहीं सपा, बसपा, भाजपा और निर्दलीय प्रत्याशियों के परिवार की महिलाओं ने अपने पक्ष में वोटरों को करने के लिए पहल शुरू कर दी है। किशनी में बसपा प्रत्याशी कमलेश कुमारी स्वयं महिला होने के नाते आधी आबादी को महिला को ही वोट देने की अपील कर रही हैं। करहल से भाजपा प्रत्याशी रमा शाक्य भी महिला होने के कारण आधी आबादी को पक्ष में करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं। किशनी से ही जन अधिकार मंच से महिला प्रत्याशी सुमन दिवाकर महिलाओं को रिझाने में पीछे नहीं हैं।
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ये कहती हैं महिलाएं
आरसी बालिका इंटर कालेज की पूर्व प्रधानाचार्य मानकुमारी राठौर कहती हैं कि हालांकि पुरुष प्रधान समाज में महिलाएं पुरुषों के अनुसार ही वोट करती हैं लेकिन इस बार महिलाओं का नजरिया कुछ बदला है। अधिकांश महिलाएं कह रही हैं कि इस बार वह अपने विवेक से मतदान करेंगी। गंगा सहायक कन्या इंटर कालेज की पूर्व प्रधानाचार्या ऊषा टिंगल का कहना है कि ऐसा नहीं कि महिलाएं अपने विवेक से निर्णय नहीं ले सकती लेकिन घर के पुरुष उन्हें ऐसा करने नहीं देते। राजनीति में भी पुरुष हावी हैं लेकिन महिलाएं साहस दिखाएं।
जिले में महिला मतदाता
विधानसभा 2012 2017
मैनपुरी 129868 149525
भोगांव 128845 152678
किशनी 116240 136087
करहल 142873 160842