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मां गमा देवी मंदिर से जुड़ी लोेगों की आस्था

Thu, 07 Apr 2016 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी Updated Thu, 07 Apr 2016 11:18 PM IST
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maan gama devee mandir se judee logon kee aastha
आस्था - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
कस्बा में बने मां गमा देवी मंदिर की बहुत मान्यता है। हर परिवार से लोग शुभ कार्य में मां का आशीर्वाद लेने आते हैं। मोहल्ला ब्रहमनान के पश्चिमी हिस्से में स्थित मां गमा देवी मंदिर को करीब 258 वर्ष पूर्व नगर में स्थापित कराया था। नगर के ब्राह्मण  परिवार की भूमि को लेकर मंदिर विवाद भी कोर्ट में चला। बताया जाता है कि दोनो परिवारों को मां गमा देवी ने सपने में मुकदमा छोड़कर पूजा अर्चना का आदेश दिया। परिवारों ने आपसी सामंजस्य बनाकर मंदिर की भूमि को छोड़ दिया। 
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आज जब नई पीढ़ी ने मंदिर के निर्माण का प्रयास किया तो वर्ष 2006 में मंदिर को भव्य रूप देने के लिए नगर की जनता ने कार्य शुरू कराया जो आज तक जारी है। मंदिर को भव्यता देने के लिए करीब 90 कारसेवकों ने प्रतिदिन मंदिर को दानस्वरूप एक रुपया भेंट किया जाता है। मंदिर से जुड़ी लोगों की आस्था से कारसेवकों की संख्या बढ़ती जा रही है। मंदिर में पुजारी के रूप में शिवओम दीक्षित मंदिर में स्थापित 52 मूर्तियों की हर रोज पूजा अर्चना करते हैं। नगर के देवकी नंदन दीक्षित, राधामोहन दीक्षित, श्यामलाल शर्मा, सुशील स्वर्णकार, अशोक गुप्ता, रामौतार गुप्ता, राजीव मिश्रा, रामबाबू चतुर्वेदी मंदिर की व्यवस्थाएं देख रहे हैं। 
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मां का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते लोग
कस्बा बेवर के मां गमा देवी मंदिर में पूर्व में विदुर कालीन मूर्तियों की स्थापना थी। आज भी मंदिर में विशाल मूर्तियों के अवशेष हैं। जिनकी पूजा अर्चना की जाती है। शुभ कार्यों में प्रत्येक नगरवासी मां का आशीर्वाद लेने माता के मंदिर आते हैं। दांपत्य जीवन के प्रथम कदम, सगाई या अन्य शुभ कार्यों के अवसर पर लोग मां का आशीर्वाद लेना नहीं भूलते।
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2004 में आई बाढ़ का पानी भी नहीं पहुंचा विग्रह तक
वर्ष 2004 में कस्बे में नहर कटने और अधिक बारिश होने की वजह से बाढ़ का कहर आया। मंदिर के चारों ओर बाढ़ का पानी था, उसके बाद भी मां का विग्रह पानी में नहीं डूबा। आसपास के घरों में पानी भर गया था। परिसर में पानी था लेकिन मां के विग्रह के चरणों के ऊपर जल न आने से श्रद्धालु इसे मां का चमत्कार मानते हैं। लोगों का कहना है कि नवरात्र के नौ दिनों तक यहां प्रतिदिन पूजा अर्चन करने से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है।
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