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क्षमावाणी पर्व पर गले मिल मांगी क्षमा
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी।
Updated Sat, 17 Sep 2016 11:31 PM IST
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क्षमावाणी पर्व पर गले मिल मांगी क्षमा
- फोटो : अमर उजाला
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जैन समाज के पर्यूषण पर्व के समापन अवसर पर आयोजित क्षमावाणी पर्व पर एक-दूसरे से गले मिलकर और उत्तम क्षमा भाव बोलकर वर्ष भर हुए अपराधों की क्षमा मांगी।
करहल रोड स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में क्षमावाणी कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दिन लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर क्षमा मांगी। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि जैन धर्म विश्व को मैत्री, एकता और अहिंसा का संदेश देता है। क्षमा वीरस्य भूषणम् अर्थात क्षमा ही वीरों का आभूषण है। इस सिद्धांत के आधार पर ही पयूर्षण पर्व के अंतिम दिन क्षमावाणी पर्व मनाया जाता है। धर्म ही जीवन में एक मात्र सहायक है अत: सदैव धर्म का साथ बनाए रखना चाहिए। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
भोगांव के ऊपर टीला स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन में आयोजित समारोह में जैन समाज के सैकड़ों लोगों ने आपस में गले मिलकर एवं चरण स्पर्श कर क्षमा मांगी। आपसी विरोध एवं कटुता को भूलकर क्षमा मांगकर समाज को एकजुटता का संदेश दिया।
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इससे पूर्व श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में जिनेंद्र अभिषेक, सामूहिक पूजन के पश्चात विधि-विधान के साथ श्री रत्नत्रय मंडल विधान का आयोजन किया गया। पर्यूषण महापर्व के समापन पर बधाई गीत गाए गए। इस मौके पर नलिन कुमार जैन, डाक्टर कमलेश जैन, डाक्टर सुधीर जैन, जयगुप्त जैन, डाक्टर दिनेश जैन, आशू जैन, राकेश जैन, नीलेश जैन आदि मौजूद रहे।
बच्चों ने दिया वैर-विरोध मिटाने का संदेश
जैन समाज के बच्चों ने भी क्षमावाणी पर्व पर भेदभाव, जातिपात और वैर-विरोध मिटाने का संकल्प लिया। बच्चों ने एक-दूसरे के गले मिलकर माफी मांगी और आपस में क्षमाभाव धारण करने संदेश दिया। बच्चों ने कहा कि हम सब स्कूल और घर में चाहे कितनी बार लड़ते हों लेकिन फिर क्षमा धारण करके एक हो जाते हैं। ऐसा ही संदेश हम बड़े लोगों को देना चाहते हैं कि आपसी मतभेद भुलाकर हम सब एक हैं का नारा बुलंद करना चाहिए।
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करहल रोड स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में क्षमावाणी कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दिन लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर क्षमा मांगी। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि जैन धर्म विश्व को मैत्री, एकता और अहिंसा का संदेश देता है। क्षमा वीरस्य भूषणम् अर्थात क्षमा ही वीरों का आभूषण है। इस सिद्धांत के आधार पर ही पयूर्षण पर्व के अंतिम दिन क्षमावाणी पर्व मनाया जाता है। धर्म ही जीवन में एक मात्र सहायक है अत: सदैव धर्म का साथ बनाए रखना चाहिए। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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भोगांव के ऊपर टीला स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन में आयोजित समारोह में जैन समाज के सैकड़ों लोगों ने आपस में गले मिलकर एवं चरण स्पर्श कर क्षमा मांगी। आपसी विरोध एवं कटुता को भूलकर क्षमा मांगकर समाज को एकजुटता का संदेश दिया।
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इससे पूर्व श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं श्री चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में जिनेंद्र अभिषेक, सामूहिक पूजन के पश्चात विधि-विधान के साथ श्री रत्नत्रय मंडल विधान का आयोजन किया गया। पर्यूषण महापर्व के समापन पर बधाई गीत गाए गए। इस मौके पर नलिन कुमार जैन, डाक्टर कमलेश जैन, डाक्टर सुधीर जैन, जयगुप्त जैन, डाक्टर दिनेश जैन, आशू जैन, राकेश जैन, नीलेश जैन आदि मौजूद रहे।
बच्चों ने दिया वैर-विरोध मिटाने का संदेश
जैन समाज के बच्चों ने भी क्षमावाणी पर्व पर भेदभाव, जातिपात और वैर-विरोध मिटाने का संकल्प लिया। बच्चों ने एक-दूसरे के गले मिलकर माफी मांगी और आपस में क्षमाभाव धारण करने संदेश दिया। बच्चों ने कहा कि हम सब स्कूल और घर में चाहे कितनी बार लड़ते हों लेकिन फिर क्षमा धारण करके एक हो जाते हैं। ऐसा ही संदेश हम बड़े लोगों को देना चाहते हैं कि आपसी मतभेद भुलाकर हम सब एक हैं का नारा बुलंद करना चाहिए।