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कोख में ही बच्ची की मौत, अस्पताल में हंगामा

अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी Updated Sun, 14 May 2017 11:01 PM IST
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परिवारीजनों से बात करती पुलिस
परिवारीजनों से बात करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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कचहरी रोड स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान बच्ची की मौत हो गई। वहीं महिला की भी हालत बिगड़ गई। परिवारीजनों ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। आरोप लगाया कि 15 हजार रुपये ले लिए और बिना महिला चिकित्सक के ही प्रसव करा दिया। लापरवाही के चलते बच्ची की मौत हुई है। पुलिस के पहुंचने से पहले ही अस्पताल संचालक वहां से भाग गया। अभी तक पीड़ित ने पुलिस को कोई तहरीर नहीं दी है। समझौते के प्रयास चल रहे हैं।  
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थाना कोतवाली के पावर हाउस निवासी शिवपाल सिंह पाल की पुत्री शिखा की शादी एक साल पहले विनोद पाल निवासी गांव नगला गुमानी थाना कासगंज के साथ हुई थी। विनोद दिल्ली में एक निजी कंपनी में नौकरी करता है। गर्भवती होने पर शिखा चार महीने पहले मायके आ गई। शिखा की मां सुनीता ने उसका करहल चौराहा निवासी रिटायर्ड नर्स सरोज यादव से उपचार कराना शुरू कर दिया। सुनीता का आरोप है 13 मई की दोपहर शिखा को प्रसव पीड़ा होने पर उन्होंने सरोज को दिखाया। सरोज ने एक हजार रुपये फीस लेनेे के बाद दवा देकर प्रसव कराने के लिए कचहरी रोड स्थित एक प्राइवेट क्लीनिक पर ले जाने की सलाह दी। शिखा को लेकर सुनीता तथा सरोज भी अस्पताल पहुंच गई। शिखा के भाई कुलदीप का आरोप है प्रसव कराने के नाम पर उससे अस्पताल संचालक ने 15 हजार रुपये जमा करा लिए। रात 10 बजे डाक्टर ने महिला डाक्टर की बिना मौजूदगी के ही शिखा का प्रसव कराया। लापरवाही के चलते प्रसव के दौरान गर्भ में बच्ची की मौत हो गई। शिखा की हालत बिगड़ने पर परिवारीजनों को सूचना दी गई। बच्ची की मौत होने के बाद संचालक ने परिवारीजनों पर प्रसूता को अस्पताल से ले जाने का दबाव बनाया तो परिवारीजनों ने हंगामा काटना शुरू कर दिया। इसी बीच सूचना मिलने पर विनोद भी दिल्ली से आ गया। जब तक पुलिस पहुंची तब तक संचालक मौके से भाग गया। कोतवाली प्रभारी लक्ष्मण सिंह का कहना है उनकी जानकारी में मामला नहीं है। अगर शिकायत मिलती है तो रिपोर्ट दर्ज कर जांच की जाएगी।


अस्पताल में नहीं मिला रिकार्ड
मैनपुरी। पुलिस ने जब अस्पताल में मौजूद स्टाफ से शिखा का प्रसव कराने के संबंध में जानकारी ली तो वहां कोई रिकार्ड नहीं मिला। शिखा को कब भर्ती किया गया, क्या उपचार दिया गया, अस्पताल में स्टाफ कौन-कौन है इसकी जानकारी स्टाफ नहीं दे सका।

सीएमओ को देर शाम तक नहीं जानकारी
जिला अस्पताल से 500 मीटर दूर एक अस्पताल में प्रसव के दौरान बच्ची की मौत की सूचना देर शाम तक सीएमओ को नहीं मिली। प्रभारी सीएमओ डा. रामकिशन ने बताया उनको अभी तक सूचना नहीं मिली है। वह जांच कराएंगे। जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

पहले भी हो चुका कई बार हंगामा
 प्रसव के दौरान शिशुओं की मौत होने पर पहले भी कई बार हंगामा हो चुका है। दो साल पहले कचहरी रोड पर बच्ची की मौत, प्रसूता को ब्लड चढ़ाने के मामले में हंगामा हुआ था। आगरा रोड तथा राधारमण रोड पर भी प्रसव के दौरान मौत होने पर परिवारीजन हंगामा कर चुके हैं।

एक दर्जन निजी अस्पताल हैं संचालित
 शहर के बीच एक दर्जन से अधिक निजी अस्पताल संचालित हैं, जिनमें प्रसव कराने की व्यवस्था है। इन अस्पतालों में ब्लड तक चढ़ाया जाता है। अधिकांश अस्पतालों में प्रशिक्षित स्टाफ तक नहीं है। मौत होने अथवा हालत बिगड़ने पर परिवारीजन हंगामा करते हैं। स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता से निजी अस्पतालों में मरीजों का आर्थिक शोषण हो रहा है।

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