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कैग भी उठा चुका है भुगतान पर सवाल
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Sat, 22 Apr 2017 11:45 PM IST
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ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे पर हाोता काम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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आगरा से लेकर लखनऊ तक बने ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण में सब कुछ सही नहीं है। जिले से होकर गुजर रहे एक्सप्रेसवे के लिए अधिगृहीत की गई भूमि के भुगतान में यहां भी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। इस पर कैग ने भी आपत्ति जताई थी। तब यूपीडा के तत्कालीन चेयरमैन ने डीएम को जांच के लिए लिखा था। हालांकि स्थानीय अधिकारियों ने सब कुछ ओके की रिपोर्ट दे दी। अब सरकार की ओर से जांच के आदेश होते ही स्थानीय अधिकारियों और कर्मचारियों की सांसें अटक गई हैं।
ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए जिले में किए गए भूमि अधिग्रहण पर भी पूर्व में भ्रष्टाचार के बादल मंडराते रहे हैं। पिछले साल सितंबर में कैग के आपत्ति जताने पर यूपीडा के तत्कालीन चेयरमैन नवनीत सहगल ने डीएम को मामले की जांच के आदेश दिए थे। तब कैग ने जांच के दौरान करहल में इंटरचेंज के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी पकड़ी थी। सूत्रों के अनुसार तब आवश्यकता से अधिक भूमि स्थानीय प्रशासन ने अधिगृहीत कर ली थी। यही नहीं किसानों को उसका मुआवजा भी नियमों को ताक पर रखकर दिया गया था। इस पर यूपीडा के तत्कालीन चेयरमैन नवनीत सहगल ने डीएम को जांच करने के लिए कहा। हालांकि तब अधिकारियों ने शासन को सब कुछ ओके की रिपोर्ट भेज कर मामले की इतिश्री कर ली थी।
इस संबंध में डीएम सीपी सिंह का कहना है कि यदि शासन से मामले की जांच के आदेश आते हैं तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
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अभी तक नहीं दिया जा सका पूरा मुआवजा
मैनपुरी। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का 28 किलोमीटर हिस्सा जिले की करहल तहसील से होकर गुजर रहा है। यह फिरोजाबाद के गोटपुर से शुरू होकर करहल के मोहब्बतपुर तक जाता है। इसके लिए जिले में कुल 22 गांवों की लगभग 304 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की गई थी। इसके लिए कुल 3500 बैनामे सरकार के पक्ष में कराए गए। इनमें से 2810 किसानों को मुआवजा दिया जाना था। इनमें से 2808 किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं दो किसानों ने अभी तक मुआवजा नहीं लिया है। जबकि 35 हेक्टेयर भूमि का तब 527 किसानों ने बैनामा नहीं किया था। इसमें मुआवजा राशि को लेकर विवाद की स्थिति थी। बाद में समझाने पर 398 किसानों ने बैनामा कर दिया और मुआवजा भी ले लिया। जबकि वर्तमान में 152 किसानों ने अभी तक अपनी जमीन का बैनामा सरकार के पक्ष में नहीं किया है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार भूमि अधिग्रहण के लिए जिले में कुल 376 करोड़ रुपये आए थे। इनमें से 317 करोड़ रुपये का मुआवजा दे दिया गया है। लगभग 30 करोड़ रुपये अभी भी जिला प्रशासन के पास पड़े हुए हैं।
कई मामले हैं कोर्ट में विचाराधीन
मैनपुरी। एक्सप्रेसवे के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण के कई मामले अभी तक कोर्ट में विचाराधीन हैं। इनमें से अधिकांश मामले सर्किल रेट और भूमि का मुआवजा निर्धारित करने को लेकर हैं। किसानों का आरोप है कि आसपास के दो खाता धारकों को अलग-अलग दर से मुआवजा दिया गया है। जबकि दोनों की भूमि की मौजूदगी और प्रकार एक समान हैं।
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ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए जिले में किए गए भूमि अधिग्रहण पर भी पूर्व में भ्रष्टाचार के बादल मंडराते रहे हैं। पिछले साल सितंबर में कैग के आपत्ति जताने पर यूपीडा के तत्कालीन चेयरमैन नवनीत सहगल ने डीएम को मामले की जांच के आदेश दिए थे। तब कैग ने जांच के दौरान करहल में इंटरचेंज के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण में गड़बड़ी पकड़ी थी। सूत्रों के अनुसार तब आवश्यकता से अधिक भूमि स्थानीय प्रशासन ने अधिगृहीत कर ली थी। यही नहीं किसानों को उसका मुआवजा भी नियमों को ताक पर रखकर दिया गया था। इस पर यूपीडा के तत्कालीन चेयरमैन नवनीत सहगल ने डीएम को जांच करने के लिए कहा। हालांकि तब अधिकारियों ने शासन को सब कुछ ओके की रिपोर्ट भेज कर मामले की इतिश्री कर ली थी।
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इस संबंध में डीएम सीपी सिंह का कहना है कि यदि शासन से मामले की जांच के आदेश आते हैं तो उसके अनुसार कार्रवाई की जाएगी। जो भी दोषी मिलेगा उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।
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अभी तक नहीं दिया जा सका पूरा मुआवजा
मैनपुरी। ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे का 28 किलोमीटर हिस्सा जिले की करहल तहसील से होकर गुजर रहा है। यह फिरोजाबाद के गोटपुर से शुरू होकर करहल के मोहब्बतपुर तक जाता है। इसके लिए जिले में कुल 22 गांवों की लगभग 304 हेक्टेयर जमीन अधिगृहीत की गई थी। इसके लिए कुल 3500 बैनामे सरकार के पक्ष में कराए गए। इनमें से 2810 किसानों को मुआवजा दिया जाना था। इनमें से 2808 किसानों को मुआवजा दिया जा चुका है। वहीं दो किसानों ने अभी तक मुआवजा नहीं लिया है। जबकि 35 हेक्टेयर भूमि का तब 527 किसानों ने बैनामा नहीं किया था। इसमें मुआवजा राशि को लेकर विवाद की स्थिति थी। बाद में समझाने पर 398 किसानों ने बैनामा कर दिया और मुआवजा भी ले लिया। जबकि वर्तमान में 152 किसानों ने अभी तक अपनी जमीन का बैनामा सरकार के पक्ष में नहीं किया है। सरकारी अभिलेखों के अनुसार भूमि अधिग्रहण के लिए जिले में कुल 376 करोड़ रुपये आए थे। इनमें से 317 करोड़ रुपये का मुआवजा दे दिया गया है। लगभग 30 करोड़ रुपये अभी भी जिला प्रशासन के पास पड़े हुए हैं।
कई मामले हैं कोर्ट में विचाराधीन
मैनपुरी। एक्सप्रेसवे के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण के कई मामले अभी तक कोर्ट में विचाराधीन हैं। इनमें से अधिकांश मामले सर्किल रेट और भूमि का मुआवजा निर्धारित करने को लेकर हैं। किसानों का आरोप है कि आसपास के दो खाता धारकों को अलग-अलग दर से मुआवजा दिया गया है। जबकि दोनों की भूमि की मौजूदगी और प्रकार एक समान हैं।