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सरकारी अस्पताल में बच्चे की मौत: परिजन बोले- मोबाइल में बात करने पर मस्त था स्टाफ, मशीन में तापमान हो गया अधिक

Sun, 13 Oct 2024 08:00 PM IST
भूपेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी
संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sun, 13 Oct 2024 08:00 PM IST
सार

सरकारी अस्पताल में बच्चे की मौत के मामले की जांच शुरू हो गई है। परिजन बोले स्टाफ मोबाइल में बात करने पर मस्त था। मशीन में तापमान अधिक होने से बच्चे की मौत हो गई। 

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Investigation begun into death of two children on night of October 11 at 100-bed hospital in Mainpuri
नवजात - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में सौ शैय्या अस्पताल में 11 अक्तूबर की रात दो बच्चों की मौत के मामले की जांच शुरू हो गई है। जांच के बीच परिजन का आरोप है कि एसएनसीयू वार्ड में अत्याधिक तापमान में बच्चे को रखे जाने के कारण बच्चे की मौत हुई। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है। तीन दिन के अंदर रिपोर्ट अधिकारियों को भेजी जाएगी। पूरे मामले की जिलाधिकारी ने भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है।

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सौ शैया अस्पताल में दन्नाहार थाना क्षेत्र के गांव रठेरा निवासी अरुण कुमार के एक दिन के मासूम पुत्र और बेवर थाना क्षेत्र के गांव जोगा निवासी अजीत कुमार की तीन दिवसीय पुत्री की उपचार के दौरान 11 अक्तूबर की देर शाम मौत हो गई थी।
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नों ही मामलों की पुलिस और अधिकारियों से शिकायत की गई थी। मामले में स्वास्थ्य विभाग की ओर से सीएमएस डॉ. शशांक ने जांच टीम का गठन किया है। टीम ने रविवार को सौ शैया अस्पताल में तैनात डॉक्टर और स्टाफ से पूरे मामले की जानकारी ली।

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मामले में रठेरा निवासी अरुण कुमार के भाई रिंकू सिंह की तरफ से दी गई तहरीर पर पुलिस ने भी जांच शुरू कर दी है। चौकी प्रभारी भांवत चौराहा आदित्य खोकर पुलिस की तरफ से जांच कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को वे अस्पताल पहुंचकर पीड़ित और डॉक्टर व स्टाफ से जानकारी लेंगे।

वहीं मामले में रिंकू सिंह का कहना है कि उनके भतीजे की मौत के लिए एसएनसीयू का स्टाफ और डॉक्टर जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि उनके परिजन बार-बार बच्चे को मांगते रहे। बच्चे के स्वास्थ्य के बारे में पूछते रहे लेकिन हर बार यही जवाब दिया गया कि बच्चा स्वस्थ है। 

उनका कहना है कि बच्चे की अत्यधिक तापमान में रखने के कारण मौत हुई है। उनका कहना है कि तैनात स्टाफ मोबाइल पर बात में जुटा रहा और बच्चे की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। बच्चे की मौत के समय एसएनसीयू में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। तैनात डॉक्टर ड्यूटी से गायब थे।
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