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जिला जेल की सुरक्षा में छेद ही छेद
भास्कर युगल
Updated Tue, 14 Mar 2017 11:30 PM IST
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जिला जेल की सुरक्षा में छेद ही छेद
- फोटो : अमर उजाला
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जिला जेल की सुरक्षा व्यवस्था में पहले से ही छेद ही छेद हैं। यह स्थिति तब है जबकि जेल में क्षमता से तीन गुना बंदी हैं। इनमें से कई तो खूंखार अपराधियों की श्रेणी में आते हैं। इसकी जानकारी शासन को भेज दी गई थी। इसके बाद भी जेल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम तक नहीं किए गए। इसका फायदा उठाकर जेल से सोमवार को चार बंदी भाग गए। अब जेल प्रशासन से लेकर स्थानीय अधिकारी तक पूरे मामले से पल्ला झाड़ते दिख रहे हैं।
जिला जेल की वर्तमान क्षमता लगभग 450 बंदियों की है। इसकी तुलना में वर्तमान में 11 सौ से अधिक बंदी जिला जेल में मौजूद हैं। जेल सूत्रों की मानें तो जेल में स्टाफ से लेकर हथियार और सुरक्षा उपकरणों तक की कमी है। क्षमता से तीन गुना अधिक बंदी। उनमें से कई पश्चिमी यूपी के शातिर अपराधी भी हैं। इसके बाद भी जिला जेल में सुरक्षा के पर्याप्त उपाय तक नहीं किए गए। स्टाफ तो दूर पर्याप्त संख्या में हथियार तक नहीं मौजूद है। यही नहीं जेल की जो दीवार है वह नदी की ओर भी सुरक्षित नहीं है। इसकी ऊंचाई मानक से कम है। यही नहीं सीसी टीवी कैमरे तक पर्याप्त संख्या में नहीं है। जिला जेल में मौजूद इन गंभीर कमियों की ओर काफी पहले पत्र भेजकर शासन को अवगत करा दिया गया था। उसके बाद भी न तो शासन स्तर से और न ही स्थानीय स्तर से जेल की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए। इसका परिणाम यह रहा कि बंदी पूरी व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए भरी दोपहरी में बिना किसी की नजर में आए आराम से जेल से भाग गए। अब जिला प्रशासन से लेकर जेल प्रशासन तक के अधिकारी कुछ भी जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। एसपी सुनील कुमार सक्सेना ने बताया कि जेल की व्यवस्थाओं का पुलिस विभाग से कोई लेनादेना नहीं होता है। यह सीधे लखनऊ से नियंत्रित होती है। इसलिए वहां की व्यवस्थाओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
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जिला जेल की वर्तमान क्षमता लगभग 450 बंदियों की है। इसकी तुलना में वर्तमान में 11 सौ से अधिक बंदी जिला जेल में मौजूद हैं। जेल सूत्रों की मानें तो जेल में स्टाफ से लेकर हथियार और सुरक्षा उपकरणों तक की कमी है। क्षमता से तीन गुना अधिक बंदी। उनमें से कई पश्चिमी यूपी के शातिर अपराधी भी हैं। इसके बाद भी जिला जेल में सुरक्षा के पर्याप्त उपाय तक नहीं किए गए। स्टाफ तो दूर पर्याप्त संख्या में हथियार तक नहीं मौजूद है। यही नहीं जेल की जो दीवार है वह नदी की ओर भी सुरक्षित नहीं है। इसकी ऊंचाई मानक से कम है। यही नहीं सीसी टीवी कैमरे तक पर्याप्त संख्या में नहीं है। जिला जेल में मौजूद इन गंभीर कमियों की ओर काफी पहले पत्र भेजकर शासन को अवगत करा दिया गया था। उसके बाद भी न तो शासन स्तर से और न ही स्थानीय स्तर से जेल की सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए कोई उपाय नहीं किए गए। इसका परिणाम यह रहा कि बंदी पूरी व्यवस्था को ठेंगा दिखाते हुए भरी दोपहरी में बिना किसी की नजर में आए आराम से जेल से भाग गए। अब जिला प्रशासन से लेकर जेल प्रशासन तक के अधिकारी कुछ भी जवाब देने की स्थिति में नहीं हैं। एसपी सुनील कुमार सक्सेना ने बताया कि जेल की व्यवस्थाओं का पुलिस विभाग से कोई लेनादेना नहीं होता है। यह सीधे लखनऊ से नियंत्रित होती है। इसलिए वहां की व्यवस्थाओं के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
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