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यहां सिर्फ रेफर तक सीमित हैं स्वास्थ्य सेवाएं
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sat, 25 Feb 2017 11:22 PM IST
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यहां सिर्फ रेफर तक सीमित हैं स्वास्थ्य सेवाएं
- फोटो : अमर उजाला
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जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ रेफर करने तक ही सीमित हैं। किसी भी बीमारी से पीड़ित मरीज हो या फिर हादसे में घायल व्यक्ति, यहां आने पर उसे उपचार नहीं सिर्फ रेफर स्लिप मिलती है। यही कारण है कि हादसा होने पर सक्षम परिवारीजन पीड़ित तो अपने मरीज को सीधे सैफई अस्पताल या फिर आगरा के लिए ले जाते हैं लेकिन गरीबों के लिए प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना बहुत मुश्किल।
जिला अस्पताल में हृदय रोग विभाग, बर्न वार्ड, सर्जिकल वार्ड, चाइल्ड वार्ड, महिला अस्पताल समेत कई वार्ड हैं। इनमें से अधिकांश विभागों में चिकित्सक और अन्य ट्रेंड स्टाफ ही नहीं। यही कारण है कि जब आप जिला अस्पताल में जाएं तो अधिकांश वार्डों में सन्नाटा ही पसरा मिलता है। जो दो एक स्टाफ है वह भी मनमानी करता है। परिणामस्वरूप यहां पर मजबूरी में ही मरीज आना पसंद करते हैं। यहां आलम यह है कि किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति आए या फिर हादसे में घायल। सभी को यहां से सिर्फ रैफर किया जाता है। उपचार के नाम पर सिर्फ प्राथमिक चिकित्सा दी जाती है। इसके चलते हादसा होने पर सरकारी कर्मचारी भले ही घायल को जिला अस्पताल लाए। लेकिन परिवारीजन घायल को सीधे सैफई अस्पताल या फिर आगरा के किसी भी अस्पताल में ले जाना पसंद करते हैं।
इस संबंध में सीएमएस डाक्टर एके उपाध्याय का कहना है कि जिला अस्पताल में स्वीकृत पदों में से चिकित्सकों के 22 से अधिक पद खाली हैं। यही कारण है कि अधिकांश मरीजों को रैफर कर दिया जाता है। हालांकि उनके जिला अस्पताल आने पर उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अधिकतम उपचार दिया जाता है।
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जिला अस्पताल में हृदय रोग विभाग, बर्न वार्ड, सर्जिकल वार्ड, चाइल्ड वार्ड, महिला अस्पताल समेत कई वार्ड हैं। इनमें से अधिकांश विभागों में चिकित्सक और अन्य ट्रेंड स्टाफ ही नहीं। यही कारण है कि जब आप जिला अस्पताल में जाएं तो अधिकांश वार्डों में सन्नाटा ही पसरा मिलता है। जो दो एक स्टाफ है वह भी मनमानी करता है। परिणामस्वरूप यहां पर मजबूरी में ही मरीज आना पसंद करते हैं। यहां आलम यह है कि किसी भी गंभीर बीमारी से पीड़ित व्यक्ति आए या फिर हादसे में घायल। सभी को यहां से सिर्फ रैफर किया जाता है। उपचार के नाम पर सिर्फ प्राथमिक चिकित्सा दी जाती है। इसके चलते हादसा होने पर सरकारी कर्मचारी भले ही घायल को जिला अस्पताल लाए। लेकिन परिवारीजन घायल को सीधे सैफई अस्पताल या फिर आगरा के किसी भी अस्पताल में ले जाना पसंद करते हैं।
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इस संबंध में सीएमएस डाक्टर एके उपाध्याय का कहना है कि जिला अस्पताल में स्वीकृत पदों में से चिकित्सकों के 22 से अधिक पद खाली हैं। यही कारण है कि अधिकांश मरीजों को रैफर कर दिया जाता है। हालांकि उनके जिला अस्पताल आने पर उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अधिकतम उपचार दिया जाता है।
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