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हर मनोकामना पूरी करते हैं मोटामल महाराज

Sun, 27 Mar 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी Updated Sun, 27 Mar 2016 11:30 PM IST
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har manokaamana pooree karate hain motaamaal mahaaraaj
मोटामल महाराजमंदिर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
नगर के मोहल्ला तपा की नगरिया स्थित ऐतिहासिक मोटामल महाराज हनुमान मंदिर पर हर साल होलिका पर्व की पंचमी से लगने वाला दो दिवसीय पारंपरिक मेला सोमवार से प्रारंभ होगा। रंगोत्सव के तुरंत बाद लगने वाले दो दिनी मेले में लोग हनुमान जी के दर्शन कर मनौती मानने दूर-दूर से आते हैं। मंदिर कमेटी ने मेला की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
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बताया जाता है कि दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान ने इस मंदिर का निर्माण वीर सेनापति मोटामल महाराज की याद में कराया था। कन्नौज के राजा जयचंद की पुत्री संयोगिता दिल्ली के राजा पृथ्वीराज चौहान से प्रेम करती थीं। यह बात जयचंद्र को पसंद नहीं थी। उसने संयोगिता के विवाह के लिए स्वयंवर का आयोजन कराया और राजा पृथ्वीराज को निमंत्रण नहीं दिया। पृथ्वीराज ने संयोगिता का हरण कर लिया। वह दिल्ली लौट रहे थे तो मैनपुरी के रास्ते से करहल पहुंचने पर सेना ने पड़ाव डाला। पृथ्वीराज और संयोगिता सेना सहित करहल के वनखंडेश्वर मंदिर देवी रोड क्षेत्र में रुके। संयोगिता की इच्छा पर राजा पृथ्वीराज चौहान ने वहीं भगवान शिव की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा कराई। उसकी संयोगिता ने विधिवत पूजा की। भगवान शिव की यह प्राचीन मूर्ति आज भी मंदिर में स्थापित है।
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राजा पृथ्वीराज की सेना करहल में डेरा डाले हुई थी कि तभी कन्नौज के राजा जयचंद्र सेना लेकर वहां आ गए। तब सेनापति मोटामल महाराज ने मोर्चा संभाला। पृथ्वीराज और जयचंद्र में युद्ध हुआ। इसमें सेनापति मोटामल महाराज वीरगति को प्राप्त हुए। नींद में राजा पृथ्वीराज के स्वप्न में आकर मोटामल महाराज ने कहा कि मुझे यहीं दफन कर दो और वहीं हनुमान जी का मंदिर बनवा दो। राजा पृथ्वीराज ने इस पर वीर सेनापति की पार्थिव देह को कुएं में डालकर वहां हनुमान जी का मंदिर बनवा दिया और उसका नामकरण मोटामल महाराज करा दिया।
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 इस प्राचीन मंदिर में आकर लोग न केवल हनुमान जी की पूजा करते हैं, बल्कि मोटामल महाराज के अवशेष के दर्शन भी करते हैं। मंदिर पर बरसों से होली के बाद दो दिवसीय मेला लगता है।
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