{"_id":"58b1c0f24f1c1b0953b27b90","slug":"gotskron-conflict-between-villagers-and-firing","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्रामीणों और गोतस्करों के बीच संघर्ष, फायरिंग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्रामीणों और गोतस्करों के बीच संघर्ष, फायरिंग
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sat, 25 Feb 2017 11:22 PM IST
विज्ञापन
ग्रामीणों और गोतस्करों के बीच संघर्ष, फायरिंग
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ग्रामीणों और गोतस्करों के बीच शुक्रवार रात मुठभेड़ हो गई। दोनों ओर से फायरिंग भी हुई। आखिरकार ग्रामीणों ने कंटेनर में लादकर ले जाने की कोशिश कर रहे गोतस्करों से 400 गोवंशीय पशुओं को बचा लिया। वहीं कंटेनर में तोड़फोड़ कर दी। सूचना के बाद भी पुलिस के न पहुंचने पर ग्रामीणों में रोष है।
शुक्रवार रात को गांव अलूपुरा बलीपुर निवासी ग्रामीणों को टीला के समीप गोतस्करों की मौजूदगी की जानकारी हुई तो रात करीब 11 बजे सभी वहां पहुंच गए। टीले के समीप रुके दो कंटेनरों में से उतरे लोग वहां मौजूद गोवंशीय पशुओं को कंटेनर में ठूंसने लगे। ग्रामीणों के घेरने पर गोतस्करों ने फायरिंग शुरू कर दी। ग्रामीणों की ओर से भी फायरिंग की गई। करीब आधा घंटा तक दोनों ओर से फायरिंग होती रही। इस बीच गोतस्कर झाड़ियों में छिपकर मौके से भाग गए। ग्रामीणों ने मौके पर देखा तो एक कंटेनर में पशुओं को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची जिससे उनमें आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना था कि फायरिंग के बाद 100 नंबर पर सूचना दी गई मगर किसी ने फोन नहीं उठाया। जब उन्होंने एसपी सुनील कुमार सक्सेना को फोन किया तब वहां फोर्स पहुंची।
ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस ने अपना काम ठीक से नहीं किया। मुक्त कराए गए गोवंशीय पशुओं को ग्रामीणों ने गौशाला भिजवाने के लिए कहा लेकिन पुलिस ने न तो उन्हें गौशाला भिजवाया और न ही उनकी सुपुदर्गी में दिया। इससे मुक्त कराए गए गोवंशीय पशु शनिवार को जंगल में घूमते दिखाई दिए। पुलिस ने वहां से बरामद दो कंटेनरों (एचआर 38एच 3802 और यूपी 78बीटी 9200) को थाने में लाकर खड़ा कर लिया है। वहीं कार्रवाई के दौरान तस्कर तीन ट्रक और एक स्विफ्ट डिजायर गाड़ी को लेकर भाग गए।
विज्ञापन
कई गोवंशीय पशु बेहोश थे
ग्रामीणों ने बताया कि गोतस्करों के भागने के बाद जब उन्होंने कंटेनर में लदे पशुओं को देखा तो उनमें ज्यादातर बेहोश थे। कंटेनर में सिरिंज और नशीले इंजेक्शन पडे़ हुए थे। टीले के समीप खाली बियर की बोतलें और कैन भी बरामद हुए है।
राजस्थानी वेशभूषा में पशु चराते हैं गोतस्कर
गोतस्कर क्षेत्र में पशुओं को चराने के समय राजस्थानी वेशभूषा में घूमते हैं। तस्कर आसपास के जिलों से गोवंशीय पशुओं को लाकर जंगल की तरफ छोड़ देते हैं। इनकी संख्या बढ़ने के बाद इन्हें वाहनों में लादकर ले जाते हैं।
इससे पहले भी कर चुके हैं फायरिंग
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
क्षेत्र में गोवंशीय पशुओं की तस्करी को लेकर ग्रामीणों ने थाना पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना वहां से गोतस्करों के वाहन गुजरते हैं मगर अभी तक पुलिस की नजर उन पर नहीं पड़ती है। वहीं घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने उल्टा ग्रामीणों को धमकाना शुरू कर दिया। पूर्व में भी कोई कार्रवाई न करना पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है।
विज्ञापन
शुक्रवार रात को गांव अलूपुरा बलीपुर निवासी ग्रामीणों को टीला के समीप गोतस्करों की मौजूदगी की जानकारी हुई तो रात करीब 11 बजे सभी वहां पहुंच गए। टीले के समीप रुके दो कंटेनरों में से उतरे लोग वहां मौजूद गोवंशीय पशुओं को कंटेनर में ठूंसने लगे। ग्रामीणों के घेरने पर गोतस्करों ने फायरिंग शुरू कर दी। ग्रामीणों की ओर से भी फायरिंग की गई। करीब आधा घंटा तक दोनों ओर से फायरिंग होती रही। इस बीच गोतस्कर झाड़ियों में छिपकर मौके से भाग गए। ग्रामीणों ने मौके पर देखा तो एक कंटेनर में पशुओं को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था। ग्रामीणों की सूचना के बाद भी पुलिस मौके पर नहीं पहुंची जिससे उनमें आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना था कि फायरिंग के बाद 100 नंबर पर सूचना दी गई मगर किसी ने फोन नहीं उठाया। जब उन्होंने एसपी सुनील कुमार सक्सेना को फोन किया तब वहां फोर्स पहुंची।
विज्ञापन
ग्रामीणों का आरोप था कि पुलिस ने अपना काम ठीक से नहीं किया। मुक्त कराए गए गोवंशीय पशुओं को ग्रामीणों ने गौशाला भिजवाने के लिए कहा लेकिन पुलिस ने न तो उन्हें गौशाला भिजवाया और न ही उनकी सुपुदर्गी में दिया। इससे मुक्त कराए गए गोवंशीय पशु शनिवार को जंगल में घूमते दिखाई दिए। पुलिस ने वहां से बरामद दो कंटेनरों (एचआर 38एच 3802 और यूपी 78बीटी 9200) को थाने में लाकर खड़ा कर लिया है। वहीं कार्रवाई के दौरान तस्कर तीन ट्रक और एक स्विफ्ट डिजायर गाड़ी को लेकर भाग गए।
विज्ञापन
कई गोवंशीय पशु बेहोश थे
ग्रामीणों ने बताया कि गोतस्करों के भागने के बाद जब उन्होंने कंटेनर में लदे पशुओं को देखा तो उनमें ज्यादातर बेहोश थे। कंटेनर में सिरिंज और नशीले इंजेक्शन पडे़ हुए थे। टीले के समीप खाली बियर की बोतलें और कैन भी बरामद हुए है।
राजस्थानी वेशभूषा में पशु चराते हैं गोतस्कर
गोतस्कर क्षेत्र में पशुओं को चराने के समय राजस्थानी वेशभूषा में घूमते हैं। तस्कर आसपास के जिलों से गोवंशीय पशुओं को लाकर जंगल की तरफ छोड़ देते हैं। इनकी संख्या बढ़ने के बाद इन्हें वाहनों में लादकर ले जाते हैं।
इससे पहले भी कर चुके हैं फायरिंग
पुलिस की भूमिका पर भी सवाल
क्षेत्र में गोवंशीय पशुओं की तस्करी को लेकर ग्रामीणों ने थाना पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रोजाना वहां से गोतस्करों के वाहन गुजरते हैं मगर अभी तक पुलिस की नजर उन पर नहीं पड़ती है। वहीं घटना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने उल्टा ग्रामीणों को धमकाना शुरू कर दिया। पूर्व में भी कोई कार्रवाई न करना पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगाता है।