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छेड़खानी से क्षुब्ध किशोरी ने लगाई फांसी
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
Updated Thu, 12 Mar 2015 11:35 PM IST
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थाना बेवर क्षेत्र के एक गांव में गुरुवार सायं छेड़खानी से क्षुब्ध एक
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किशोरी ने (17) ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। छात्रा के साथ दो दिन पहले
गांव के ही दो युवकों ने छेड़खानी थी और वह तभी से परेशान थी। पुलिस ने शव
को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। पोस्टमार्टम में किशोरी की मौत
फांसी पर लटकने के कारण होने की बात सामने आई है।
मरने
वाली किशोरी कक्षा 12 की छात्रा थी। गुरुवार की शाम घर के लोग खेतों पर गए
तो उसने एक कमरे में दुपट्टे से फांसी लगा ली। शाम को उसकी मां घर पहुंची
तो घटना का पता चला। बताया जा रहा है कि यह किशोरी दस मार्च की सायं शौच के
लिए खेतों में गई थी, तभी अविनेंद्र बाथम और सुमित बाथम ने उसके साथ
छेड़खानी की। किशोरी ने शोर मचाया तो उसके चाचा मौके पर पहुंच गए। उस समय
दोनों लड़कों ने भविष्य में इस तरह की हरकत नहीं करने और माफी मांगकर मामले
को निपटाया। इसके बाद भी किशोरी घटना को भूल नहीं पाई थी। परिवारीजनों का
कहना हैं कि घटना के बाद से वह घर में किसी से बात भी नहीं कर रही थी।
किशोरी के चाचा की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी युवकों के खिलाफ छेड़छाड़ और
पोस्को एक्ट में मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी युवक फरार है।
एेऐसे मामलों में अभिभावक समाज के अनुसार सोचने लग जाते हैं जबकि उन्हें अपनी बेटी के बारे में सोचना चाहिए। लड़की को इस मानसिक अवस्था से बाहर निकालने के लिए उसका माहौल बदलना चाहिए। उसमें आत्मविश्वास भरना चाहिए। लड़की को भी यह सोचना चाहिए कि उसके साथ घटे किसी अपराध के लिए वह दोषी नहीं है और जीवन को समाप्त करना किसी बात का समाधान नहीं है। जहां तक इस तरह के अपराध की बात है तो क्रिमिनल पर्सनेल्टी के लोग न तो खुद के लिए कुछ कर पाते हैं और न ही समाज के लिए। इससे परेशान होकर वह अपराध करने लगते हैं। लचर कानून व्यवस्था और सुस्त प्रशासनिक व्यवस्था से इन्हें बढ़ावा मिलता है, जो पीड़िता के दिल-दिमाग पर गहरा असर डालता है।
आगरा कालेज के मनोविज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर, डा. अंशू चौहान
मरने
वाली किशोरी कक्षा 12 की छात्रा थी। गुरुवार की शाम घर के लोग खेतों पर गए
तो उसने एक कमरे में दुपट्टे से फांसी लगा ली। शाम को उसकी मां घर पहुंची
तो घटना का पता चला। बताया जा रहा है कि यह किशोरी दस मार्च की सायं शौच के
लिए खेतों में गई थी, तभी अविनेंद्र बाथम और सुमित बाथम ने उसके साथ
छेड़खानी की। किशोरी ने शोर मचाया तो उसके चाचा मौके पर पहुंच गए। उस समय
दोनों लड़कों ने भविष्य में इस तरह की हरकत नहीं करने और माफी मांगकर मामले
को निपटाया। इसके बाद भी किशोरी घटना को भूल नहीं पाई थी। परिवारीजनों का
कहना हैं कि घटना के बाद से वह घर में किसी से बात भी नहीं कर रही थी।
किशोरी के चाचा की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी युवकों के खिलाफ छेड़छाड़ और
पोस्को एक्ट में मामला दर्ज कर लिया है। आरोपी युवक फरार है।
एेऐसे मामलों में अभिभावक समाज के अनुसार सोचने लग जाते हैं जबकि उन्हें अपनी बेटी के बारे में सोचना चाहिए। लड़की को इस मानसिक अवस्था से बाहर निकालने के लिए उसका माहौल बदलना चाहिए। उसमें आत्मविश्वास भरना चाहिए। लड़की को भी यह सोचना चाहिए कि उसके साथ घटे किसी अपराध के लिए वह दोषी नहीं है और जीवन को समाप्त करना किसी बात का समाधान नहीं है। जहां तक इस तरह के अपराध की बात है तो क्रिमिनल पर्सनेल्टी के लोग न तो खुद के लिए कुछ कर पाते हैं और न ही समाज के लिए। इससे परेशान होकर वह अपराध करने लगते हैं। लचर कानून व्यवस्था और सुस्त प्रशासनिक व्यवस्था से इन्हें बढ़ावा मिलता है, जो पीड़िता के दिल-दिमाग पर गहरा असर डालता है।
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आगरा कालेज के मनोविज्ञान विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर, डा. अंशू चौहान