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Mainpuri News: 17 साल पुराने लूटकांड में चार आरोपी बरी
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मैनपुरी। लूट और रंगदारी के 17 साल पुराने बहुचर्चित मामले में न्याय का तराजू आखिरकार सच की ओर झुका। विशेष सत्र परीक्षण (दस्यु प्रभावित क्षेत्र अधिनियम) न्यायालय के विशेष न्यायाधीश राकेश पटेल ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए आरोपी रामवीर, महीपाल, बच्चू और विजय को बरी करने का आदेश दिया।
मामला बरनाहल थाना क्षेत्र के गांव तिकौना का है। जगदीश ने आरोप लगाया था कि 27 अक्तूबर 2009 की शाम करीब 6 बजे जब घिरोर मंडी से लहसुन बेचकर पैदल गांव लौट रहा था। उसी दौरान काली देवी मंदिर के पास गांव के ही रामवीर, विद्याराम, महीपाल, बच्चू और विजय ने घेर लिया। महीपाल ने 7500 रुपये, विजय ने सोने की अंगूठी और बच्चू ने सीने पर तमंचा तानकर धमकी दी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।
सुनवाई के दौरान आरोपी विद्याराम की मृत्यु हो जाने पर उसके विरुद्ध कार्रवाई उपशमित कर दी गई थी। जिन दो मुख्य गवाह कुंवरपाल व मान सिंह को पेश किया था, वे अदालत में पूरी तरह मुकर गए। जिरह में पीड़ित ने खुद स्वीकार किया कि घटना के समय घना अंधेरा था और चिल्लाने के 4 से 6 मिनट बाद गवाह पहुंचे थे। जब तक आरोपी निकल चुके थे। अदालत ने पाया कि दोनों पक्ष के बीच वर्षों से दीवानी व आपराधिक मुकदमेबाजी चल रही थी। पुलिस को देरी से सूचना देने का कोई स्पष्टीकरण नहीं था और न ही कोई सामान बरामद हुआ था। अदालत ने कहा कि पुरानी रंजिश के माहौल में केवल एक पक्षपातपूर्ण और विरोधाभासी गवाही के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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मामला बरनाहल थाना क्षेत्र के गांव तिकौना का है। जगदीश ने आरोप लगाया था कि 27 अक्तूबर 2009 की शाम करीब 6 बजे जब घिरोर मंडी से लहसुन बेचकर पैदल गांव लौट रहा था। उसी दौरान काली देवी मंदिर के पास गांव के ही रामवीर, विद्याराम, महीपाल, बच्चू और विजय ने घेर लिया। महीपाल ने 7500 रुपये, विजय ने सोने की अंगूठी और बच्चू ने सीने पर तमंचा तानकर धमकी दी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया था।
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सुनवाई के दौरान आरोपी विद्याराम की मृत्यु हो जाने पर उसके विरुद्ध कार्रवाई उपशमित कर दी गई थी। जिन दो मुख्य गवाह कुंवरपाल व मान सिंह को पेश किया था, वे अदालत में पूरी तरह मुकर गए। जिरह में पीड़ित ने खुद स्वीकार किया कि घटना के समय घना अंधेरा था और चिल्लाने के 4 से 6 मिनट बाद गवाह पहुंचे थे। जब तक आरोपी निकल चुके थे। अदालत ने पाया कि दोनों पक्ष के बीच वर्षों से दीवानी व आपराधिक मुकदमेबाजी चल रही थी। पुलिस को देरी से सूचना देने का कोई स्पष्टीकरण नहीं था और न ही कोई सामान बरामद हुआ था। अदालत ने कहा कि पुरानी रंजिश के माहौल में केवल एक पक्षपातपूर्ण और विरोधाभासी गवाही के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
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