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मजदूर काम की तलाश में शहर आने को मजबूर
अमर उजाला ब्यूरो, मैनपुरी
Updated Thu, 15 Sep 2016 11:36 PM IST
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मनरेगा
- फोटो : यमुनानगर
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गांव के बेरोजगार को गांव में ही काम देने के लिए मनरेगा योजना संचालित है। मनरेगा के तहत जॉब कार्ड धारक भी हैं। बावजूद इसके गांव में लोगों को काम नहीं मिल रहा है। मजबूरी लोगों को शहर में मजदूरी करने के लिए आना पड़ रहा है।
मनरेगा के तहत बनाए गए जॉब कार्ड धारक मजदूरों को गांव में काम नहीं मिल रहा। यही कारण है कि लोगों को मजदूरी करने के लिए गांव से शहरों की ओर रुख करने पड़ रहा है। प्रधान और रोजगार सेवक अपने चहेते ग्रामीणों का जॉबकार्ड बनवाते हैं, इस कारण पात्रों का हक मारा जा रहा है। परिवार का पालन करने की खातिर गांव के लोग रोजीरोटी की तलाश में शहर की ओर भाग रहे हैं। मनरेगा के तहत एक जॉबकार्ड धारक को साल में 100 दिन काम देने का प्रावधान है। जिसके लिए प्रतिदिन 174 रुपये मजदूरी दी जाती है जबकि शहर में एक दिन की मजदूरी के लिए 350 रुपये, राजगीरी के लिए 550 रुपये से लेकर 800 रुपये तक मजदूरी मिल रही है।
फोटो-
चहेतों को ही मिलता है लाभ
मैेनपुरी। नगर में संता बसंता चौराहा, राधा रमण रोड पर आवास विकास कालोनी के सामने रोजाना सैकड़ों ग्रामीण मजदूरी के लिए आते हैं। उनके पास गांव में जॉबकार्ड नहीं हैं। उनको शहर में मजदूरी के अच्छे पैसे मिलते हैं। गांव से रोजाना आने वाले राकेश, सुनील वर्मा, नरेंद्र शाक्य, सूरज कठेरिया, रामनरेश दिवाकर का कहना है मनरेगा का लाभ केवल प्रधान और रोजगार सेवक के चहेतों को ही मिलता है। जबकि कई पात्र वंचित हैं।
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जॉबकार्ड धारकों पर एक नजर--
विकास खंड जॉबकार्ड धारक
जागीर 10491
बरनाहल 12446
बेवर 19408
घिरोर 11209
करहल 17862
किशनी 17442
कुरावली 12904
मैनपुरी 12423
सुल्तानगंज 13438
गांव में ही काम देनेे के लिए संचालित मनरेगा का लाभ पात्रों को दिया जाता है। मजदूरी का भुगतान भी समय से किया जाता है। शिकायत पर अपात्रों की जांच कराकर उनके कार्ड निरस्त भी किए जाते हैं।
विजय कुमार गुप्ता
मुख्य विकास अधिकारी
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मनरेगा के तहत बनाए गए जॉब कार्ड धारक मजदूरों को गांव में काम नहीं मिल रहा। यही कारण है कि लोगों को मजदूरी करने के लिए गांव से शहरों की ओर रुख करने पड़ रहा है। प्रधान और रोजगार सेवक अपने चहेते ग्रामीणों का जॉबकार्ड बनवाते हैं, इस कारण पात्रों का हक मारा जा रहा है। परिवार का पालन करने की खातिर गांव के लोग रोजीरोटी की तलाश में शहर की ओर भाग रहे हैं। मनरेगा के तहत एक जॉबकार्ड धारक को साल में 100 दिन काम देने का प्रावधान है। जिसके लिए प्रतिदिन 174 रुपये मजदूरी दी जाती है जबकि शहर में एक दिन की मजदूरी के लिए 350 रुपये, राजगीरी के लिए 550 रुपये से लेकर 800 रुपये तक मजदूरी मिल रही है।
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चहेतों को ही मिलता है लाभ
मैेनपुरी। नगर में संता बसंता चौराहा, राधा रमण रोड पर आवास विकास कालोनी के सामने रोजाना सैकड़ों ग्रामीण मजदूरी के लिए आते हैं। उनके पास गांव में जॉबकार्ड नहीं हैं। उनको शहर में मजदूरी के अच्छे पैसे मिलते हैं। गांव से रोजाना आने वाले राकेश, सुनील वर्मा, नरेंद्र शाक्य, सूरज कठेरिया, रामनरेश दिवाकर का कहना है मनरेगा का लाभ केवल प्रधान और रोजगार सेवक के चहेतों को ही मिलता है। जबकि कई पात्र वंचित हैं।
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जॉबकार्ड धारकों पर एक नजर--
विकास खंड जॉबकार्ड धारक
जागीर 10491
बरनाहल 12446
बेवर 19408
घिरोर 11209
करहल 17862
किशनी 17442
कुरावली 12904
मैनपुरी 12423
सुल्तानगंज 13438
गांव में ही काम देनेे के लिए संचालित मनरेगा का लाभ पात्रों को दिया जाता है। मजदूरी का भुगतान भी समय से किया जाता है। शिकायत पर अपात्रों की जांच कराकर उनके कार्ड निरस्त भी किए जाते हैं।
विजय कुमार गुप्ता
मुख्य विकास अधिकारी