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अभी न जागे तो परिणाम होंगे भयावह

Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
Anonymous User ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी
ब्यूरो, अमर उजाला मैनपुरी Published by: Anonymous User Updated Thu, 09 Nov 2023 07:05 PM IST
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मैनपुरी। जल ही जीवन है। लेकिन इसके बाद भी जागरूकता नहीं होने पर आने वाला कल काफी भयावह होगा। पानी के अंधाधुंध दोहन और बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण ने इसे खतरनाक स्थिति में पहुंचा दिया है। पानी की बर्बादी से लोग बाज नहीं आ रहे हैं। वहीं जल संरक्षण के लिए सरकारी पहल भी मूर्तरूप नहीं ले पा रही है। बरनाहल ब्लाक पहले ही डार्क एरिया घोषित हो चुका है। जबकि करहल और सुल्तानगंज में जलस्तर में निरंतर गिरावट दर्ज की जा रही है।
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विश्व जल संरक्षण दिवस पर शहर के कई हिस्सों में लोग पानी की बर्बादी करते नजर आए। सबमर्सिबल पंपों से कहीं सड़क पर पानी की बौछार तो कहीं नगर पालिका की टोंटियों से नालियों में पानी बहता दिखा। जल संरक्षण को लेकर लोग गंभीर नजर नहीं आते। बरनाहल ब्लाक पहले ही डार्क एरिया घोषित किया जा चुका है। अन्य क्षेत्रों में भी जल स्तर की गिरावट भविष्य में बड़ी मुश्किलें पैदा कर सकती है। लघु सिंचाई कार्यालय के आंकड़ों पर निगाह डालें तो बरनाहल, करहल और सुल्तानगंज के कई इलाकों के भूगर्भ जल स्तर में पांच साल में एक से चार मीटर की गिरावट आई है। लोगों का कहना है कि पांच वर्ष पूर्व तक 50-60 फीट पर पीने का पानी मिल जाता था जो अब 110 से 150 फीट पर मिल रहा है। नलकूप भी अब 140 से 180 फीट पर लग रहे हैं।
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बरनाहल और करहल क्षेत्र में जल स्तर पांच मीटर नीचे चले जाने से नलकूप तो दूर हैंडपंप लगवाना भी मुश्किल हो चला है। ब्लाक सुल्तानगंज क्षेत्र की स्थिति भी कुछ यही है। क्षेत्र के ग्राम सिमरई, दलीपपुर कैलई, इन्नी खेड़ा, जसवंतपुर, भूटा, जिरोली, सुन्नामई, जरामई, नगला कवीश्वर, गौशलपुर जैसे दर्जनों ग्राम हैं जहां मई-जून के महीने में पेयजल का संकट गहरा जाता है। इंडिया मार्का-2 हैंडपंप तो पानी देते हैं, लेकिन घर में लगे हैंडपंप या तो पानी देना बंद कर देते हैं, या पानी के साथ कीचड़, बालू आती है।
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नजर नहीं आते रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
भूगर्भ जलस्तर में बढ़ोत्तरी करने के लिए रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम पर जोर तो दिया गया। लेकिन इस स्कीम को मुकाम नहीं मिल सका। धरातल पर इसका उपयोग कहीं होता नजर नहीं आता। जिले भर में केवल नवोदय विद्यालय भोगांव में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगा है। इसके अलावा जिले के किसी सरकारी या गैरसरकारी भवन में रैन हार्वेसिटंग सिस्टम लगा नजर नहीं आता।

कुओं का अस्तित्व नहीं रहा और तालाबों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर है। जलस्तर रुके तो कैसे। पानी के अंधाधुंध दोहन के चलते जल स्तर में निरंतर गिरावट आ रही है। रैन वाटर हार्वेस्टिंग के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर गंभीर प्रयास करने होंगे। हर घर में वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था अनिवार्य की जानी चाहिए। तभी भविष्य के लिए हम पर्याप्त पानी की उम्मीद कर सकते हैं।
                                    - डाक्टर शेरपाल सिंह, विभागाध्यक्ष भूगोल, श्री चित्रगुप्त महाविद्यालय

रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए कहा गया है। दो हजार वर्ग फीट या इससे अधिक क्षेत्रफल के सरकारी भवनों में रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के निर्देश दिए गए हैं। निजी भवनों और स्कूल-कालेजों में भी सिस्टम लगाने को कहा गया है। विकास भवन में जल्द रैन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगवाया जाएगा।

                                                 - डाक्टर चंद्रभूषण, एडीएम
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