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बेवर शहीदों की याद में आज से लगेगा मेला
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Sun, 22 Jan 2017 10:58 PM IST
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शहीदों के घर मातम
- फोटो : self
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देश की आजादी के आंदोलन में बेवर के क्रांतिकारियों को लोग आज भी नहीं भूले हैं। अंग्रेजी हुकूमत को 1942 में हिलाने वाले अमर शहीद क्रांति वीरों की याद में 23 जनवरी से 45वां ऐतिहासिक शहीद मेले का आयोजन किया जाएगा। मेले के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।
देश की आजादी की लड़ाई में 14 अगस्त 1942 को अगस्त क्रांति के दौरान नगर में अल्पवय क्रांतिकारी छात्रों की जुनूनी टोली की अगुवाई में आंदोलनकारी जनता ने बेवर के पुलिस थाने पर तिरंगा फहराया था। थानेदार क ी रिवाल्वर और पहरे पर तैनात सिपाही की बंदूक छीन ली थी। कुछ घंटो के लिए नगर को ब्रिटिश राज से स्वाधीन कराया था। दूसरे दिन 15 अगस्त को पुलिस ने थाने पर पहुंची आंदोलनकारी भीड़ पर गोलियां चलाई थीं। तीन युवकों को वीरगति प्राप्त हुई जबकि कई लोग घायल हुए। देश को आजाद कराने का सपना संजोए छात्र कृष्णकुमार, जमुना प्रसाद त्रिपाठी और सीताराम गुप्त स्वाधीनता वेदी पर शहीद हो गए थे। 16 अगस्त को मैनपुरी में पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शहीदों के क्षत-विक्षत शव पुलिस वैन में डालकर मैनपुरी से सात किलोमीटर दूर सिंहपुर पुल के पास जंगल में उन पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था।
मेला के मुख्य संयोजक रामबाबू चतुर्वेदी ने बताया वर्ष 1997 में तत्कालीन डीएम विजय प्रकाश ने सिंहपुरा पुल के निकट सड़क किनारे एक स्थान चुनकर प्रतीक श्रद्धांजलि समारोह शहीद स्मारक समिति मैनपुरी में आयोजित कराया था। अगस्त क्रांति में बलिदान हुए अमर शहीदों की याद में 15 अगस्त 1972 को तीन दिवसीय मेले का आयोजन शहीद स्मारक भवन के निकट स्वतंत्रता सेनानी जगदीश नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में कराया गया।
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वर्ष 1992 में मेला संस्थापक जगदीश नारायण त्रिपाठी और उनके साथियों के प्रयास से शहीद मेला 23 जनवरी से छह फरवरी तक लगाया जाता है। मेला प्रबंधक इंजीनियर राज त्रिपाठी ने बताया मेला आयोजन की अवधि इस बार बढ़ाकर 10 फरवरी तक कर दी गई है। 10 फरवरी को ही मेले का समापन होगा।
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देश की आजादी की लड़ाई में 14 अगस्त 1942 को अगस्त क्रांति के दौरान नगर में अल्पवय क्रांतिकारी छात्रों की जुनूनी टोली की अगुवाई में आंदोलनकारी जनता ने बेवर के पुलिस थाने पर तिरंगा फहराया था। थानेदार क ी रिवाल्वर और पहरे पर तैनात सिपाही की बंदूक छीन ली थी। कुछ घंटो के लिए नगर को ब्रिटिश राज से स्वाधीन कराया था। दूसरे दिन 15 अगस्त को पुलिस ने थाने पर पहुंची आंदोलनकारी भीड़ पर गोलियां चलाई थीं। तीन युवकों को वीरगति प्राप्त हुई जबकि कई लोग घायल हुए। देश को आजाद कराने का सपना संजोए छात्र कृष्णकुमार, जमुना प्रसाद त्रिपाठी और सीताराम गुप्त स्वाधीनता वेदी पर शहीद हो गए थे। 16 अगस्त को मैनपुरी में पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शहीदों के क्षत-विक्षत शव पुलिस वैन में डालकर मैनपुरी से सात किलोमीटर दूर सिंहपुर पुल के पास जंगल में उन पर मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था।
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मेला के मुख्य संयोजक रामबाबू चतुर्वेदी ने बताया वर्ष 1997 में तत्कालीन डीएम विजय प्रकाश ने सिंहपुरा पुल के निकट सड़क किनारे एक स्थान चुनकर प्रतीक श्रद्धांजलि समारोह शहीद स्मारक समिति मैनपुरी में आयोजित कराया था। अगस्त क्रांति में बलिदान हुए अमर शहीदों की याद में 15 अगस्त 1972 को तीन दिवसीय मेले का आयोजन शहीद स्मारक भवन के निकट स्वतंत्रता सेनानी जगदीश नारायण त्रिपाठी के नेतृत्व में कराया गया।
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वर्ष 1992 में मेला संस्थापक जगदीश नारायण त्रिपाठी और उनके साथियों के प्रयास से शहीद मेला 23 जनवरी से छह फरवरी तक लगाया जाता है। मेला प्रबंधक इंजीनियर राज त्रिपाठी ने बताया मेला आयोजन की अवधि इस बार बढ़ाकर 10 फरवरी तक कर दी गई है। 10 फरवरी को ही मेले का समापन होगा।