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श्रद्धा और विश्वास के जुड़ने से होता कल्याण
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Wed, 14 Dec 2016 11:45 PM IST
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श्रद्धा और विश्वास के जुड़ने से होता कल्याण
- फोटो : अमर उजाला
विश्वास का रूप शिव है, जबकि श्रद्धा का रूप मां पार्वती है। इन दोनों के मिलन से ही परिवार, समाज और राष्ट्र उन्नति के रास्ते पर अग्रसर हो सकता है। समाज का कुतर्क ही तारकासुर है। जिसके नाश के लिए श्रद्धा और विश्वास की उपज कार्तिकेय का सामने आना आवश्यक है। यह प्रवचन बुधवार को आचार्य कौशिक महाराज ने दिए।
श्री एकरसानंद इंटर कालेज परिसर के कथा पंडाल में चल रही शिव महापुराण कथा के चौथे दिन आचार्य कौशिक ने कहा हम अपनी पहचान किसी प्रदेशवासी की बजाए भारतीय की बनाएं। शिव आराधना में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। अहंकार के वशीभूत होकर किसी प्रभावशाली व्यक्ति के अपमान करने की बात तो दूर सोचना भी नहीं चाहिए। जिसके मन में दूसरे के कल्याण का भाव है वह शिवत्व है। मन में विश्वास तथा श्रद्धा के बिना हम न तो किसी के हो पाएंगे और न कोई हमारा हो पाएगा।
यजमान डॉ. बीके सिंह और डॉ. कौशलेंद्र दीक्षित ने आचार्य पूजन किया। डॉ. ग्याप्रसाद दुबे, वैद्य संजीव मिश्रा, राधारानी दुबे, वीना श्रीवास्तव, अरविंद पांडेय, नकुल सक्सेना, शिवकांत यादव, अतुल शुक्ला, प्रदीपदत्त दुबे, विनय चौहान, प्रशांत मिश्रा, संजय गुप्ता, राजीव मिश्रा पप्पे, राजू भदौरिया, किशन दुबे, अमिताभ श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।
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भूत प्रेतों ने हंसाकर नचाया
मैनपुरी। कथा के दौरान शिव विवाह की झांकी में भूत प्रेत के प्रतीकों की उपस्थिति दर्शनीय रही। भूत प्रेतों के प्रतीकों की मौजूदगी के बीच श्रद्धालु हंसते हुए विवाह गीतों के कर्णप्रिय संगीत पर पंडाल में नाचने लगे। तालियों के बीच देवाधिदेव महादेव ने मां पार्वती के गले में जयमाला डाली।
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श्री एकरसानंद इंटर कालेज परिसर के कथा पंडाल में चल रही शिव महापुराण कथा के चौथे दिन आचार्य कौशिक ने कहा हम अपनी पहचान किसी प्रदेशवासी की बजाए भारतीय की बनाएं। शिव आराधना में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। अहंकार के वशीभूत होकर किसी प्रभावशाली व्यक्ति के अपमान करने की बात तो दूर सोचना भी नहीं चाहिए। जिसके मन में दूसरे के कल्याण का भाव है वह शिवत्व है। मन में विश्वास तथा श्रद्धा के बिना हम न तो किसी के हो पाएंगे और न कोई हमारा हो पाएगा।
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यजमान डॉ. बीके सिंह और डॉ. कौशलेंद्र दीक्षित ने आचार्य पूजन किया। डॉ. ग्याप्रसाद दुबे, वैद्य संजीव मिश्रा, राधारानी दुबे, वीना श्रीवास्तव, अरविंद पांडेय, नकुल सक्सेना, शिवकांत यादव, अतुल शुक्ला, प्रदीपदत्त दुबे, विनय चौहान, प्रशांत मिश्रा, संजय गुप्ता, राजीव मिश्रा पप्पे, राजू भदौरिया, किशन दुबे, अमिताभ श्रीवास्तव आदि मौजूद थे।
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भूत प्रेतों ने हंसाकर नचाया
मैनपुरी। कथा के दौरान शिव विवाह की झांकी में भूत प्रेत के प्रतीकों की उपस्थिति दर्शनीय रही। भूत प्रेतों के प्रतीकों की मौजूदगी के बीच श्रद्धालु हंसते हुए विवाह गीतों के कर्णप्रिय संगीत पर पंडाल में नाचने लगे। तालियों के बीच देवाधिदेव महादेव ने मां पार्वती के गले में जयमाला डाली।