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अभिषेक के बाद हुई संगीतमय पूजा
अमर उजाला ब्यूरो मैनपुरी
Updated Tue, 08 Nov 2016 11:22 PM IST
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अभिषेक के बाद हुई संगीतमय पूजा
- फोटो : अमर उजाला
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श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान एवं विश्वशांति महायज्ञ के दूसरे दिन सुबह श्रद्धालुओं ने अभिषेक, पूजन, वृहद शांतिधारा का आयोजन किया। वहीं शाम को शास्त्र प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। सभी कार्यक्रम करहल रोड स्थित श्रीपार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में हुए। पूजन और अभिषेक पंडित सनत कुमार व विनोद कुमार जैन ने कराए।
कार्यक्रम में सुबह शांतिधारा करने का सौभाग्य आदेश कुमार जैन को मिला। इसके बाद सिद्धयंत्र की शांतिधारा हुई। सिद्धचक्र महामंडल में प्रतिष्ठाचार्य द्वारा बनाए गए सौधर्म इंद्र, कुबरे इंद्र, सनत कुमार इंद्र, माहेंद्र इंद्र, ब्रह्म इंद्रों ने अभिषेक व संगीतमय पूजा की। इस दौरान सभी इंद्र और इंद्राणियों ने नृत्य भी किया। प्रतिष्ठाचार्य ने सिद्धचक्र महामंडल विधान को प्रारंभ कराया। इसमें सभई इंद्र और इंद्राणियों ने महामंडल पर जाकर अर्घ चढ़ाया। मंगलवार को कुल 16 अर्घ चढ़ाए गए। इनका प्रतिष्ठाचार्य ने सभी को अर्थ समझाया। साथ ही संगीतमय पूजन भी कराया। संगीतकार संतोष के भजनों पर लोग झूमने को मजबूर हो गए। इंद्र इंद्राणियों के भोजन की व्यवस्था रमेशचंद्र, सम्यक जैन, संभव जैन ने कराई।
शाम को आरती की गई। आरती करने का सर्वप्रथम सौभाग्य हेमंत जैन को मिला। इसके बाद प्रवचन हुए। अंत में बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में अनंत कुमार, रमेश चंद्र, प्रवीन जैन, ज्ञानेंद्र जैन, सुशील जैन, हिमांशु जैन, संजय लोहिया, संजया जैन आदि मौजूद रहे।
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कार्यक्रम में सुबह शांतिधारा करने का सौभाग्य आदेश कुमार जैन को मिला। इसके बाद सिद्धयंत्र की शांतिधारा हुई। सिद्धचक्र महामंडल में प्रतिष्ठाचार्य द्वारा बनाए गए सौधर्म इंद्र, कुबरे इंद्र, सनत कुमार इंद्र, माहेंद्र इंद्र, ब्रह्म इंद्रों ने अभिषेक व संगीतमय पूजा की। इस दौरान सभी इंद्र और इंद्राणियों ने नृत्य भी किया। प्रतिष्ठाचार्य ने सिद्धचक्र महामंडल विधान को प्रारंभ कराया। इसमें सभई इंद्र और इंद्राणियों ने महामंडल पर जाकर अर्घ चढ़ाया। मंगलवार को कुल 16 अर्घ चढ़ाए गए। इनका प्रतिष्ठाचार्य ने सभी को अर्थ समझाया। साथ ही संगीतमय पूजन भी कराया। संगीतकार संतोष के भजनों पर लोग झूमने को मजबूर हो गए। इंद्र इंद्राणियों के भोजन की व्यवस्था रमेशचंद्र, सम्यक जैन, संभव जैन ने कराई।
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शाम को आरती की गई। आरती करने का सर्वप्रथम सौभाग्य हेमंत जैन को मिला। इसके बाद प्रवचन हुए। अंत में बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में अनंत कुमार, रमेश चंद्र, प्रवीन जैन, ज्ञानेंद्र जैन, सुशील जैन, हिमांशु जैन, संजय लोहिया, संजया जैन आदि मौजूद रहे।
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