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सूखे के बीच सावन की दस्तक
Mainpuri
Updated Sat, 12 Jul 2014 05:30 AM IST
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मैनपुरी। आषाढ़ माह सूखा गुजर जाने के बाद अब भीषण गर्मी के बीच सावन की दस्तक होती दिख रही है। इन दिनों जहां रिमझिम फुहार पड़नी चाहिए वहीं दोपहर मेें गरम हवाओं का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में लगता नहीं कि सावन में भी इंद्रदेव मेहरबान होंगे। किसान परेशान हैं कि यही हाल रहा तो धान की फसल कैसे होगी। बारिश के अभाव में करीब पांच हजार हेक्टेयर धान की नर्सरी सूखकर नष्ट हो रही है।
तमाम टोने-टोटकों के बाद भी इंद्रदेव मेहरबान नहीं हो रहे हैं। दो दिन बाद सावन शुरू हो रहा है और मौसम का रुख देखकर नहीं लगता कि अभी हाल फिलहाल बारिश होगी। बुजुर्ग जोगराज सिंह कहते हैं कि बारिश न होने के संकेत मिलते देख किसान खरीफ की फसल को लेकर चिंतित हो उठे हैं। शुक्रवार को निकली चटख धूप और उमस भरी गर्मी ने बेहाल कर दिया।
जिले में करीब पांच हजार हेक्टेयर में तैयार की गई धान की नर्सरी सूखने के कगार पर है। बारिश का अभाव और भीषण गर्मी में धान के पौधे सूखकर नष्ट हो रहे हैं। किसानों को अब नहीं लगता कि धान की रोपाई हो भी सकेगी। किसान रामेश्वर दयाल के मुताबिक एक बीघा धान की नर्सरी तैयार करने में करीब पांच हजार रुपये की लागत आती है। मौसम के मिजाज को देखते हुए यह लागत भी डूबती नजर आ रही है। मक्का की फसल भी अब चौपट हो चली है।
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2009 के सावन में भी नही बरसे थे मेघ
पिछले सालों के आंकड़ों पर निगाह डालें तो वर्ष 2012 में सावन के दूसरे सप्ताह में बारिश शुरू हुई थी। इससे पूर्व वर्ष 2009 में तो पूरे सावन सूखे ही गुजर गए थे। तह जिले को सूखाग्रस्त घोषित तो किया गया था लेकिन किसानों को मुआवजे के रूप में मिली धनराशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान साबित हुई थी। 2002 में भी सावन भर बारिश नहीं होने से फसलों को भारी नुकसान हुआ था।
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बारिश न होने से धान की फसल का नुकसान प्रतिशत बढ़ता ही जा रहा है। एक सप्ताह और बारिश नहीं हुई तो बैरायटी मक्का और धान की फसल को बड़ा नुकसान होगा। बारिश की संभावना क्षीण देख किसानों को अब कम पानी वाली तिल, मूंग, अरहर जैसी फसलों की तैयारी करनी चाहिए।
- गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी
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तमाम टोने-टोटकों के बाद भी इंद्रदेव मेहरबान नहीं हो रहे हैं। दो दिन बाद सावन शुरू हो रहा है और मौसम का रुख देखकर नहीं लगता कि अभी हाल फिलहाल बारिश होगी। बुजुर्ग जोगराज सिंह कहते हैं कि बारिश न होने के संकेत मिलते देख किसान खरीफ की फसल को लेकर चिंतित हो उठे हैं। शुक्रवार को निकली चटख धूप और उमस भरी गर्मी ने बेहाल कर दिया।
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जिले में करीब पांच हजार हेक्टेयर में तैयार की गई धान की नर्सरी सूखने के कगार पर है। बारिश का अभाव और भीषण गर्मी में धान के पौधे सूखकर नष्ट हो रहे हैं। किसानों को अब नहीं लगता कि धान की रोपाई हो भी सकेगी। किसान रामेश्वर दयाल के मुताबिक एक बीघा धान की नर्सरी तैयार करने में करीब पांच हजार रुपये की लागत आती है। मौसम के मिजाज को देखते हुए यह लागत भी डूबती नजर आ रही है। मक्का की फसल भी अब चौपट हो चली है।
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2009 के सावन में भी नही बरसे थे मेघ
पिछले सालों के आंकड़ों पर निगाह डालें तो वर्ष 2012 में सावन के दूसरे सप्ताह में बारिश शुरू हुई थी। इससे पूर्व वर्ष 2009 में तो पूरे सावन सूखे ही गुजर गए थे। तह जिले को सूखाग्रस्त घोषित तो किया गया था लेकिन किसानों को मुआवजे के रूप में मिली धनराशि ऊंट के मुंह में जीरा के समान साबित हुई थी। 2002 में भी सावन भर बारिश नहीं होने से फसलों को भारी नुकसान हुआ था।
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बारिश न होने से धान की फसल का नुकसान प्रतिशत बढ़ता ही जा रहा है। एक सप्ताह और बारिश नहीं हुई तो बैरायटी मक्का और धान की फसल को बड़ा नुकसान होगा। बारिश की संभावना क्षीण देख किसानों को अब कम पानी वाली तिल, मूंग, अरहर जैसी फसलों की तैयारी करनी चाहिए।
- गौरव यादव, जिला कृषि अधिकारी