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70 साल बाद खुलीं बंद शाही तिजोरियां
आशीष दीक्षित
Updated Tue, 27 Dec 2016 11:33 PM IST
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70 साल बाद खुलीं बंद शाही तिजोरियां
- फोटो : अमर उजाला
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70 साल पुराने मैनपुरी के महाराजा तेज सिंह किले में रखी तीन शाही तिजोरियों का राज अब खुल रहा है। अभी तक दो तिजोरियों से ऐतिहासिक दस्तावेज और कुछ बर्तन मिले हैं। एक तिजोरी अभी भी बंद है जिसे उत्तराधिकारी जल्द ही खुलवाएंगे।
फिरंगियों से जंग के दौरान जान गंवाने वाले मैनपुरी रियासत के राजा तेज सिंह जूदेव का ऐतिहासिक किला आज भी लोगों को आकर्षित करता है। कुछ समय पूर्व किला की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे शाही खानदान के बेहद नजदीकी अवनींद्र सिंह तोमर की मौत के बाद अब महाराजा की पुत्री के धेवते अरविंद कुमार ने जिम्मेदारी खुद ही संभाल ली है। उन्होंने मंगलवार को ताला खुलवाया। किले में मरम्मत और साज सज्जा का काम खुद वो अपनी देखरेख में करा रहे हैं। इसके साथ ही महल में रखी तीन बंद तिजोरियों की चाबी न मिलने के बाद दो तिजोरियों को अब तक खुलवाया जा चुका है। मंगलवार को खोली गई दो तिजोरियों में कई ऐतिहासिक दस्तावेज और कुछ बर्तन आदि सामान मिला है। एक तिजोरी जो कि सबसे अहम मानी जा रही है वह इस समय एक कमरे में बंद है। उसे भी खुलवाने की तैयारी चल रही है। इस तिजोरी के खुलने के बाद ही महल की तीन सबसे पुरानी तिजोरियों में क्या रहस्य छिपा था इसकी जानकारी मिलेगी। धेवते अरविंद कुमार का कहना है कि महारानी के लिखे कुछ पत्र और जमीनोें के पट्टों के दस्तावेज मिले हैं।
अभी भी बेशकीमती है शाही संपत्ति
नगर स्थित पुरानी तहसील, पुरानी कोतवाली, पुरानी सब्जी मंडी, माता शीतला देवी मंदिर परिसर समेत जिले भर में शाही संपत्ति बेहद बेशकीमती है। अब खुद ही किला की बागडोर संभालने के साथ ही सभी खर्च, हिसाब किताब का जिम्मा खुद राजा और उनके खासमखास ने संभाल लिया है।
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ऐतिहासिक दस्तावेजों में लग गई दीमक
तिजोरियों से जो ऐतिहासिक दस्तावेज मिले हैं। उनमें अधिकांश बेकार हो चुके हैं। कई दस्तावेज को दीपक चट कर गई है। बेकार हो चुके इन दस्तावेजों का किसी भी तरह से दुरुपयोग न हो सके इसलिए उन्हें जलाकर नष्ट किया जा रहा है।
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फिरंगियों से जंग के दौरान जान गंवाने वाले मैनपुरी रियासत के राजा तेज सिंह जूदेव का ऐतिहासिक किला आज भी लोगों को आकर्षित करता है। कुछ समय पूर्व किला की देखरेख का जिम्मा संभाल रहे शाही खानदान के बेहद नजदीकी अवनींद्र सिंह तोमर की मौत के बाद अब महाराजा की पुत्री के धेवते अरविंद कुमार ने जिम्मेदारी खुद ही संभाल ली है। उन्होंने मंगलवार को ताला खुलवाया। किले में मरम्मत और साज सज्जा का काम खुद वो अपनी देखरेख में करा रहे हैं। इसके साथ ही महल में रखी तीन बंद तिजोरियों की चाबी न मिलने के बाद दो तिजोरियों को अब तक खुलवाया जा चुका है। मंगलवार को खोली गई दो तिजोरियों में कई ऐतिहासिक दस्तावेज और कुछ बर्तन आदि सामान मिला है। एक तिजोरी जो कि सबसे अहम मानी जा रही है वह इस समय एक कमरे में बंद है। उसे भी खुलवाने की तैयारी चल रही है। इस तिजोरी के खुलने के बाद ही महल की तीन सबसे पुरानी तिजोरियों में क्या रहस्य छिपा था इसकी जानकारी मिलेगी। धेवते अरविंद कुमार का कहना है कि महारानी के लिखे कुछ पत्र और जमीनोें के पट्टों के दस्तावेज मिले हैं।
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अभी भी बेशकीमती है शाही संपत्ति
नगर स्थित पुरानी तहसील, पुरानी कोतवाली, पुरानी सब्जी मंडी, माता शीतला देवी मंदिर परिसर समेत जिले भर में शाही संपत्ति बेहद बेशकीमती है। अब खुद ही किला की बागडोर संभालने के साथ ही सभी खर्च, हिसाब किताब का जिम्मा खुद राजा और उनके खासमखास ने संभाल लिया है।
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ऐतिहासिक दस्तावेजों में लग गई दीमक
तिजोरियों से जो ऐतिहासिक दस्तावेज मिले हैं। उनमें अधिकांश बेकार हो चुके हैं। कई दस्तावेज को दीपक चट कर गई है। बेकार हो चुके इन दस्तावेजों का किसी भी तरह से दुरुपयोग न हो सके इसलिए उन्हें जलाकर नष्ट किया जा रहा है।