फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Mahoba News ›   Wheat yields in the absence of locks hanging on purchasing centers

पैदावार न होने से गेहूं क्रय केंद्रों पर लटके ताले

Sat, 21 May 2016 12:37 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा Updated Sat, 21 May 2016 12:37 AM IST
विज्ञापन
Wheat yields in the absence of locks hanging on purchasing centers
बंद पड़ा गेहूं क्रय केंद्र - फोटो : अमर उजाला
जिले में गेहूं खरीद क्रय केंद्रों में 20 फीसदी भी खरीद नहीं हो सकी है। इतना ही नहीं कई क्रय केंद्रों पर डेढ़ माह बाद भी गेहूं का एक दाना नहीं खरीदा गया है। जिससे क्रय केंद्रों पर लगाए गए कर्मचारी सारा दिन हाथ पर हाथ धरे बैठे रहते है। कई केंद्र तो खरीद न होने से बंद पड़े हैं।
विज्ञापन


जिले में गेहूं खरीद के लिए महोबा, चरखारी, खरेला, कुलपहाड़, पनवाड़ी, बेलाताल, अजनर सहित कस्बों में 26 क्रय केंद्र खोले गए थे। जिसमें मंडी समिति महोबा, मंडी समिति बेलाताल, खन्ना, अजनर और ननौरा, श्रीनगर सहित आधा दर्जन से ज्यादा क्रय केंद्रों में एक दाना गेहूं खरीद नहीं हुई है। क्रय केंद्रों के प्रभारी किसानों के आने के इंतजार में तेज धूप और लू के बीच में बैठे रहते है, लेकिन किसानों के दर्शन तक नहीं होते।
विज्ञापन


इस साल 11 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। क्रय केंद्र खोलने के डेढ़ माह से ज्यादा समय बीत जाने के बाद भी अभी तक महज 183 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हुई है। क्रय केंद्रों पर गेहूं लेकर आने वाले किसानों के पशुओं को बांधने के लिए छाया का इंतजाम किया गया। साथ ही ठंडा पानी और साफ सफाई की व्यवस्था की गई। इसके बाद भी किसान क्रय केंद्रों के बजाए खुले बाजार में गेहूं बेच रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन




ग्राम लमौरा निवासी किसान धीरज सिंह यादव का कहना है कि 10 फीसदी से भी कम खेतों में बुवाई होने के कारण थोड़ी बहुत पैदावार होने से किसानों ने अपने खाने के लिए गेहूं रख लिया है। यही वजह है कि क्रय केंद्रों में गेहूं नहीं पहुंच रहा है। स्थिति यह है कि ज्यादातर किसान खुद गेहूं खरीद रहे है। विहार निवासी सीताराम का कहना है कि इस साल गेहूं की फसल बहुत कम होने के बाद भी क्रय केंद्रों में महज 1,525 रुपये क्विंटल की दर से खरीदा जा रहा है। जबकि खुले बाजार में 1650 से लेकर 1700 रुपये क्विंटल बिक रहा है। इसलिए किसान बाजार में नकद कीमत पर गेहूं बेच रहा है।

झमेले से बचने के लिए बाजार का रुख
किसान गेहूं बेचकर अन्य जरूरत की वस्तु खरीदता है। ऐसे में उसे तत्काल पैसे की जरूरत पड़ती है। जबकि क्रय केंद्रों पर बेचे जाने वाले गेहूं की पहले छल्ली लगाते है। इसके बाद किसान बही या खतौनी देखने के बाद खरीद करते है। इतना ही नहीं भुगतान के नाम पर भी नकद पैसा न देकर खातों में भेज दिया जाता है। इन सभी झमेलों से बचने के लिए किसान बाजार में गेहूं बेचना पसंद कर रहा है।


इस साल सूखे के चलते कम पैदावार होने से खरीद का लक्ष्य होना मुश्किल दिखाई दे रहा है। केंद्रों में बारदाना भेजने के साथ छाया पानी के अलावा अन्य सारी व्यवस्थाएं कर ली गई है। किसानों के खातों में सीधा पैसा भेजा जा रहा हैं। बाजार में गेहूं का अधिक मूल्य किसानों को मिलने के कारण क्रय केंद्रों में कम किसान आ रहे है। शिशिर कुमार, जिला विपणन अधिकारी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed