लाखों खर्च होने के बावजूद हाईटेक नहीं हुए थाने
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जिले में थानों को हाईटेक करने के लिए मंशा से शासन द्वारा भेजे गए लाखों रुपये के कंप्यूटर धूल फांक रहे हैं। किसी थाने में कंप्यूटर कक्ष में ताला लटका हैं तो कहीं पर कपड़े से ढके हुए कक्ष की शोभा बढ़ा रहे हैं। पुलिस कर्मचारियाें को कंप्यूटर की ट्रेनिंग न दिए जाने से अभी तक ऑनलाइन एफआईआर दर्ज नहीं हो पा रही हैं।
क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रेकिंग नेटवर्क सिस्टम (सीसीटीएनएस) के तहत जिले की सभी कोतवाली और थानों में तीन दर्जन से ज्यादा कंप्यूटर भेजे गए थे, जिनकी कीमत लाखाें रुपये है।
स्कीम के तहत पुलिस कर्मचारियाें को कंप्यूटर की ट्रेनिंग दी जानी थी, लेकिन एकाध थाने को छोड़कर किसी भी थाने में पुलिस कर्मचारियाें को कंप्यूटर की ट्रेनिंग नहीं दी गई, जिससे कंप्यूटर तो आ गए, लेकिन पुलिसकर्मियाें को कंप्यूटर की जानकारी न होने के कारण आज तक ऑनलाइन रिपोर्टिंग नहीं हो रही है।
जिले में थानों के लिए डेढ़ साल पहले कंप्यूटर भेजे गए थे। कई थानाें में कंप्यूटर कक्ष तो बना दिए गए, लेकिन इन कक्षों में ताला लटका रहताहै। पूर्व से ही कंप्यूटर का ज्ञान रखने वाले कुछ सिपाही एकाध थाने में कंप्यूटर चला रहे हैं, लेकिन एफआईआर कंप्यूटर में दर्ज नहीं दर्ज हो रही है। इन कंप्यूटरों से पुलिसकर्मी निजी काम कर रहे हैं।
कई थानाें में कंप्यूटर खराब होने के बाद उन्हें आज तक सही नहीं कराया गया। कारण, कंप्यूटर चलाने में पुलिस कर्मचारी कम रुचि नहीं ले रहे हैं। इसलिए जो ठीक कंप्यूटर हैं, उन्हीं को चलाया जा रहा है। खराब कंप्यूटर ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई जा रही है।
सभी थानों में कंप्यूटर से एफआईआर दर्ज हो रही है, लेकिन कई थानाें में बीएसएनएल कनेक्शन गड़बड़ है। इसे ठीक कराया जा रहा है। बीएसएनएल कनेक्शन ठीक होने के बाद एफआईआर ऑनलाइन दर्ज कराई जाएगी। पुलिसकर्मियाें को कंप्यूटर की जानकारी है, जो कंप्यूटर में एफआईआर दर्ज करने का कार्य कर रहे हैं। - रामकिशोर, पुलिस अधीक्षक।