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तीन विभागाें के मकड़जाल में फंसी पेयजल योजना
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
Updated Wed, 06 May 2015 11:27 PM IST
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करोड़ाें रुपये की लागत से बनाई गई महत्वाकांक्षी महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना पर संकट मंडराने लगा है। पांच साल पहले शुरु हुई इस योजना के बाद आज तक इस महत्वाकांक्षी परियोजना के हैंडओवर न होने से पेयजल योजना को तीन-तीन विभाग संचालित कर रहे हैं।
मालूम हो कि जल निगम सिविल शाखा ने 35 करोड़ की लागत से बनाई गई महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना का कार्य 2010 में पूरा होने के बाद वर्ष 2011 में पेयजल आपूर्ति शुरू करा दी गई थी। चार साल बीत जाने के बाद भी जल संस्थान बिल तो वसूल रहा है लेकिन पाइप लाइन टूटने पर मरम्मत का कार्य जल निगम और उर्मिल बांध में रखे मोटर पंप खराब होने पर ठीक कराने का कार्य जल निगम यांत्रिक शाखा को करना पड़ता है। इतना ही नहीं बिजली बिल की अदायगी भी जल निगम यांत्रिक शाखा द्वारा की जा रही है। चार साल से करोड़ाें रुपये बिल की वसूली करने वाले जल संस्थान द्वारा उर्मिल बांध में रखे जनरेटराें के लिए न तो डीजल दिया जा रहा है और न ही जनरेटर, पंप, मोटर की मरम्मत कराई जाती है। इतना ही नहीं उर्मिल बांध से महोबा तक करीब 32 किलोमीटर बिछाई गईं पाइप लाइनाें के टूटने पर मरम्मत का कार्य भी जल निगम को कराना पड़ रहा है। जबकि आमदनी जल संस्थान को हो रही है। ऐसी स्थिति में जल निगम कभी भी हाथ खड़े कर सकता है।
सिंचाई विभाग ने 66 लाख का भेजा बिल
जल निगम और जल संस्थान के झमेले में सिंचाई विभाग के पानी के बिल का भुगतान नहीं हो पा रहा है। जल निगम द्वारा शहर में उर्मिल बांध से पानी की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन परियोजना अभी तक जल संस्थान को हैंडओवर नहीं की गई है। सिंचाई विभाग ने पिछले चार सालाें का उर्मिल बांध से लिए गए पानी का बिल जल संस्थान को भेज दिया है। जल संस्थान ने उर्मिल बांध से पानी न लेने की बात कहकर बिल वापस सिंचाई विभाग को भेज दिया। जिससे सिंचाई विभाग का 66 लाख रुपये पानी का बिल फंस गया है।
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उर्मिल बांध में रखे जनरेटर बने शोपीस
भीषण गर्मी में पानी की जरूरत बढ़ गई है। जबकि बिजली कटौती भी बढ़ गई है। इससे उर्मिल बांध में जल निगम यांत्रिक शाखा द्वारा लगाए गए मोटर कम चल रहे हैं। जिससे टैंकाें में पानी कम पहुंच पा रहा है। इधर जल संस्थान द्वारा अभी तक जनरेटर चलाने के लिए डीजल न दिए जाने से उर्मिल बांध में रखे जनरेटर शोपीस बनकर रह गए हैं।
जल निगम द्वारा बिछाई गई पाइप लाइन आए दिन टूटने से जल संस्थान ने अभी तक महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना को नहीं लिया है। जल संस्थान लाइन चेक कराने के लिए जल निगम को कई बार पत्र लिख चुका है। लाइन चेक कराने के बाद ही लेने की बात कही है।
- एसके वर्मा, अवर अभियंता, जल संस्थान।
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मालूम हो कि जल निगम सिविल शाखा ने 35 करोड़ की लागत से बनाई गई महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना का कार्य 2010 में पूरा होने के बाद वर्ष 2011 में पेयजल आपूर्ति शुरू करा दी गई थी। चार साल बीत जाने के बाद भी जल संस्थान बिल तो वसूल रहा है लेकिन पाइप लाइन टूटने पर मरम्मत का कार्य जल निगम और उर्मिल बांध में रखे मोटर पंप खराब होने पर ठीक कराने का कार्य जल निगम यांत्रिक शाखा को करना पड़ता है। इतना ही नहीं बिजली बिल की अदायगी भी जल निगम यांत्रिक शाखा द्वारा की जा रही है। चार साल से करोड़ाें रुपये बिल की वसूली करने वाले जल संस्थान द्वारा उर्मिल बांध में रखे जनरेटराें के लिए न तो डीजल दिया जा रहा है और न ही जनरेटर, पंप, मोटर की मरम्मत कराई जाती है। इतना ही नहीं उर्मिल बांध से महोबा तक करीब 32 किलोमीटर बिछाई गईं पाइप लाइनाें के टूटने पर मरम्मत का कार्य भी जल निगम को कराना पड़ रहा है। जबकि आमदनी जल संस्थान को हो रही है। ऐसी स्थिति में जल निगम कभी भी हाथ खड़े कर सकता है।
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सिंचाई विभाग ने 66 लाख का भेजा बिल
जल निगम और जल संस्थान के झमेले में सिंचाई विभाग के पानी के बिल का भुगतान नहीं हो पा रहा है। जल निगम द्वारा शहर में उर्मिल बांध से पानी की आपूर्ति की जा रही है। लेकिन परियोजना अभी तक जल संस्थान को हैंडओवर नहीं की गई है। सिंचाई विभाग ने पिछले चार सालाें का उर्मिल बांध से लिए गए पानी का बिल जल संस्थान को भेज दिया है। जल संस्थान ने उर्मिल बांध से पानी न लेने की बात कहकर बिल वापस सिंचाई विभाग को भेज दिया। जिससे सिंचाई विभाग का 66 लाख रुपये पानी का बिल फंस गया है।
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उर्मिल बांध में रखे जनरेटर बने शोपीस
भीषण गर्मी में पानी की जरूरत बढ़ गई है। जबकि बिजली कटौती भी बढ़ गई है। इससे उर्मिल बांध में जल निगम यांत्रिक शाखा द्वारा लगाए गए मोटर कम चल रहे हैं। जिससे टैंकाें में पानी कम पहुंच पा रहा है। इधर जल संस्थान द्वारा अभी तक जनरेटर चलाने के लिए डीजल न दिए जाने से उर्मिल बांध में रखे जनरेटर शोपीस बनकर रह गए हैं।
जल निगम द्वारा बिछाई गई पाइप लाइन आए दिन टूटने से जल संस्थान ने अभी तक महोबा पुनर्गठन पेयजल योजना को नहीं लिया है। जल संस्थान लाइन चेक कराने के लिए जल निगम को कई बार पत्र लिख चुका है। लाइन चेक कराने के बाद ही लेने की बात कही है।
- एसके वर्मा, अवर अभियंता, जल संस्थान।