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खदानों में भरा पानी, खनन कार्य ठप
अमर उजाला ब्यूरो, महोबा
Updated Sun, 28 Aug 2016 10:47 PM IST
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पत्थर खदानों में पानी भर जाने से काम हुआ ठप।
- फोटो : अमर उजाला
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लगातार हो रही बारिश के चलते पत्थर मंडी की खदानों में लबालब पानी भर गया है। इससे यहां खनन कार्य पूरी तरह ठप हो गया है। काम न मिलने से दिहाड़ी श्रमिकाें को भी रोजी रोटी के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वहीं, काम न मिलने से श्रमिकों के कई परिवार भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। कबरई पत्थर मंडी में 200 से अधिक खनन पट्टे हैं, साथ ही 300
से अधिक स्टोन क्रेशर संचालित हैं। यहां से खनिज विभाग को 200 करोड़ रुपये का राजस्व, वाणिज्य कर विभाग को 30 करोड़ और आयकर को करीब पांच करोड़ सहित बिजली विभाग को 40 करोड़ से अधिक राजस्व मिलता है। कबरई मंडी में 20 हजार से अधिक श्रमिक काम करते हैं। बीते एक माह से निरंतर हो रही बारिश से मंडी के सभी खनन क्षेत्रों में पानी भर गया है
जिससे खनन कार्य ठप होकर रह गया है। ग्रेनाइट उद्योग कल्याण समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह,रामकिशोर सिंह आदि ने बताया कि कबरई गौहारी, बघवा, मक रबई, पहरा डहर्रा सहित सभी खनन क्षेत्र पानी से लबालब हैं। जिससे बरसात के मौसम में वहां पानी खाली कराना भी संभव नहीं हैं। मशीनें लगाकर जितना पानी खदानों सें खाली होता है बरसात होते ही फिर
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उतना ही भर जाता है। इससे क्रेशर प्लांटों को कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हा पा रही है। उत्पादन न होने से क्रेशर प्लांटों के खर्चे निकालना मुश्किल हो रहा है। श्रमिकों को काम देने के बारे में पत्थर व्यापारी विनोद सोनी ने बताया कि श्रमिकों को घर परिवार चलाने के लिए मंडी द्वारा काम के अभाव में आर्थिक मदद दी जा रही है ताकि बरसात में श्रमिक काम के अभाव में महानगरों की ओर पलायन न कर सकें।
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से अधिक स्टोन क्रेशर संचालित हैं। यहां से खनिज विभाग को 200 करोड़ रुपये का राजस्व, वाणिज्य कर विभाग को 30 करोड़ और आयकर को करीब पांच करोड़ सहित बिजली विभाग को 40 करोड़ से अधिक राजस्व मिलता है। कबरई मंडी में 20 हजार से अधिक श्रमिक काम करते हैं। बीते एक माह से निरंतर हो रही बारिश से मंडी के सभी खनन क्षेत्रों में पानी भर गया है
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जिससे खनन कार्य ठप होकर रह गया है। ग्रेनाइट उद्योग कल्याण समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह,रामकिशोर सिंह आदि ने बताया कि कबरई गौहारी, बघवा, मक रबई, पहरा डहर्रा सहित सभी खनन क्षेत्र पानी से लबालब हैं। जिससे बरसात के मौसम में वहां पानी खाली कराना भी संभव नहीं हैं। मशीनें लगाकर जितना पानी खदानों सें खाली होता है बरसात होते ही फिर
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उतना ही भर जाता है। इससे क्रेशर प्लांटों को कच्चे माल की आपूर्ति नहीं हा पा रही है। उत्पादन न होने से क्रेशर प्लांटों के खर्चे निकालना मुश्किल हो रहा है। श्रमिकों को काम देने के बारे में पत्थर व्यापारी विनोद सोनी ने बताया कि श्रमिकों को घर परिवार चलाने के लिए मंडी द्वारा काम के अभाव में आर्थिक मदद दी जा रही है ताकि बरसात में श्रमिक काम के अभाव में महानगरों की ओर पलायन न कर सकें।