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विवेकानंद ने विश्व में दिलाई भारत को पहचान
अमर उजाला ब्यूरो महोबा।
Updated Mon, 12 Jan 2015 11:20 PM IST
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राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बोल रहे थे। सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में परिसर में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता अपना आचरण ऐसा बनाए जो लाखों की भीड़ में अलग हो । उन्हाेंने कहा कि आधुनिक युग में युवाओं का जीवन संघर्ष से भरा है इसलिए एक मिनट भी बर्बाद न करते हुए, अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का प्रयत्न करें। इस मौके पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रदेश संगठन मंत्री विजय प्रताप सिंह ने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता अपने अंदर स्वाभिमान को जगाएं। उन्होंने कहा कि आरएसएस में ही शामिल होकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी बल पर आज यह मुकाम हासिल किया है। कार्यक्रम में इससे पूर्व बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर दर्शकों को दिल जीत लिया।
इस मौके पर पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी, राजकुमार, जेके शिवहरे, देवेंद्र राजपूत, आकाश कुशवाहा, संजय राना, सत्येंद्र गुप्ता सहित तमाम कार्यकर्ता और युवा मौजूद रहे। तहसील परिसर में स्थित अधिवक्ता हॉल में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का डंका बजाया और इसे एक अलग पहचान दिलाई। महामंत्री ललित सक्सेना ने कहा कि हमें स्वामी विवेकानंद के बताए हुए रास्ते पर चलना चाहिए। इस मौके पर विष्णु खरे, दुर्गा प्रसाद खरे, ओमप्रकाश निगम, गिरिजेश खरे, रामशरण सक्सेना, लोकेंद्र खरे, भगवती प्रसाद निगम, अभिषेक सक्सेना, दिनेश खरे, संतोष खरे, संजीव सक्सेना, डॉ. अरविंद खरे सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
चरखारी प्रतिनिधि के अनुसार, स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर एक दिवसीय एनएसएस शिविर का रूपनगर में आयोजन किया गया। इस मौके पर राजकीय महाविद्यालय के डॉ. त्रिसुख सिंह ने कहा कि युवा देश का भविष्य है। हम सभी को विवेकानंद के मार्ग पर चलना चाहिए। एनएसएस शिविर में शामिल छात्र-छात्राआें ने साक्षरता पर बल दिया। वहीं विश्व हिंदू परिषद ने भी विवेकानंद का जन्म दिन उत्साह के साथ मनाया।
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...हम भविष्य को वर्तमान में जीते हैं
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस के अवसर पर सोमवार को काव्य संध्या का आयोजन किया गया। काव्य संध्या में कवियों ने अपनी काव्य रचनाए प्रस्तुत कर श्रोताआें को मंत्रमुग्ध कर दिया। पीयूष नगायच की सुंदर रचना ‘भूतकाल का विष हंस हंसकर पीते हैं, हम भविष्य को वर्तमान में जीते हैं’ सुनाकर सभी का दिल जीत लिया। वहीं नन्हे कवि प्रीत तिवारी आकर्षण का केंद्र रहे।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित काव्य संध्या में रचना सुनाते हुए रामप्रकाश शुक्ल विनम्र ने कहा, ‘अनुभूति शक्ति की उम्र प्रभा कवियों का ह्रदय जगाती है, बनकर स्वरूप ही कविता का छंदों को फेर नचाती है’। डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने ‘बचा लो मनुजता अगर तुम मनुज हो, कहीं क्रूरता और पलने ना पाए’।
विष्णुरात चतुर्वेदी ने ‘धार गंगा की कब तक धरे धैर्य, जब है प्रदूषण धरा से गगन के लिए’। संतोष कुमार पटैरिया ने ‘ये अल्हड़ यौवन मचल रहा, इसे नागर की तलाश है... इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष पुष्पा अनुरागी, निधि त्रिपाठी, अवकाश प्राप्त बीडीओ श्रीपत पाठक, रामअवतार नगायच, पूर्व प्रधान पं. रामसेवक तिवारी, ओमनारायण तिवारी, जमुना प्रसाद तिवारी, कृष्ण चंद्र पाठक सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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इस मौके पर पूर्व प्रधानाचार्य शिवकुमार गोस्वामी, राजकुमार, जेके शिवहरे, देवेंद्र राजपूत, आकाश कुशवाहा, संजय राना, सत्येंद्र गुप्ता सहित तमाम कार्यकर्ता और युवा मौजूद रहे। तहसील परिसर में स्थित अधिवक्ता हॉल में स्वामी विवेकानंद की जयंती पर बोल रही थीं। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने पूरी दुनिया में भारतीय संस्कृति का डंका बजाया और इसे एक अलग पहचान दिलाई। महामंत्री ललित सक्सेना ने कहा कि हमें स्वामी विवेकानंद के बताए हुए रास्ते पर चलना चाहिए। इस मौके पर विष्णु खरे, दुर्गा प्रसाद खरे, ओमप्रकाश निगम, गिरिजेश खरे, रामशरण सक्सेना, लोकेंद्र खरे, भगवती प्रसाद निगम, अभिषेक सक्सेना, दिनेश खरे, संतोष खरे, संजीव सक्सेना, डॉ. अरविंद खरे सहित तमाम लोग मौजूद रहे।
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चरखारी प्रतिनिधि के अनुसार, स्वामी विवेकानंद के जन्मदिन पर एक दिवसीय एनएसएस शिविर का रूपनगर में आयोजन किया गया। इस मौके पर राजकीय महाविद्यालय के डॉ. त्रिसुख सिंह ने कहा कि युवा देश का भविष्य है। हम सभी को विवेकानंद के मार्ग पर चलना चाहिए। एनएसएस शिविर में शामिल छात्र-छात्राआें ने साक्षरता पर बल दिया। वहीं विश्व हिंदू परिषद ने भी विवेकानंद का जन्म दिन उत्साह के साथ मनाया।
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...हम भविष्य को वर्तमान में जीते हैं
अमर उजाला ब्यूरो
महोबा। स्वामी विवेकानंद के जन्मदिवस के अवसर पर सोमवार को काव्य संध्या का आयोजन किया गया। काव्य संध्या में कवियों ने अपनी काव्य रचनाए प्रस्तुत कर श्रोताआें को मंत्रमुग्ध कर दिया। पीयूष नगायच की सुंदर रचना ‘भूतकाल का विष हंस हंसकर पीते हैं, हम भविष्य को वर्तमान में जीते हैं’ सुनाकर सभी का दिल जीत लिया। वहीं नन्हे कवि प्रीत तिवारी आकर्षण का केंद्र रहे।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद के तत्वावधान में आयोजित काव्य संध्या में रचना सुनाते हुए रामप्रकाश शुक्ल विनम्र ने कहा, ‘अनुभूति शक्ति की उम्र प्रभा कवियों का ह्रदय जगाती है, बनकर स्वरूप ही कविता का छंदों को फेर नचाती है’। डॉ. राजाराम त्रिपाठी ने ‘बचा लो मनुजता अगर तुम मनुज हो, कहीं क्रूरता और पलने ना पाए’।
विष्णुरात चतुर्वेदी ने ‘धार गंगा की कब तक धरे धैर्य, जब है प्रदूषण धरा से गगन के लिए’। संतोष कुमार पटैरिया ने ‘ये अल्हड़ यौवन मचल रहा, इसे नागर की तलाश है... इस मौके पर नगर पालिका अध्यक्ष पुष्पा अनुरागी, निधि त्रिपाठी, अवकाश प्राप्त बीडीओ श्रीपत पाठक, रामअवतार नगायच, पूर्व प्रधान पं. रामसेवक तिवारी, ओमनारायण तिवारी, जमुना प्रसाद तिवारी, कृष्ण चंद्र पाठक सहित तमाम लोग मौजूद रहे।