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Mahoba News: व्यापार संभालने के लिए भट्ठियों का प्रयोग, बढ़े काेयले के दाम
Thu, 02 Apr 2026 12:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Thu, 02 Apr 2026 12:13 AM IST
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फोटो 01 एमएएचपी 03 परिचय-झलकारीबाई तिराहे पास स्थित कोल डिपो में बोरी में कोयला भरता कर्मचारी।
महोबा। शहर के अंदर व बाहर संचालित होने वाले ढाबों पर अब अधिकांश तौर पर कोयला भट्टी का प्रयोग शुरू हो गया है। संचालकों ने गैस को फिलहाल दूसरे विकल्प के रूप में रखा हुआ है और कोयले से ही खाना बनाने का सफल प्रयास शुरू हो चुका है। कोयले की खपत बढ़ने से इसके दाम में भी वृद्धि हो गई है। ढाबा संचालक सीधे छतरपुर से कोयला खरीदकर अपना व्यापार संभालने की जद्दोजहद में लगे हुए हैं।
कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की आपूर्ति न होने के चलते ढाबों व होटलों में कारोबार प्रभावित हो रहा था। ऐसे में संचालकों ने कारोबार बचाने के लिए सबसे पहले भट्टियों की खरीदारी की और इसे अपने प्रतिष्ठान पर रखा। साथ ही विशेष जरूरत पड़ने पर इनका प्रयोग करने की योजना बनाई थी। संचालकों ने इधर-उधर से जुगाड़ करके गैस सिलिंडरों का भी इंतजाम किया और उनका प्रयोग भी किया। गैस आपूर्ति में हो रही दिक्कत व अनुमान के तहत लंबे समय तक बनी रहने वाली इस समस्या से निजात पाने के लिए संचालकों ने अपनी कोयला भट्टियों को गरमाना शुरू कर दिया। संचालक इस समय सीधे छतरपुर से 10-20 क्विंटल कोयला खरीदकर ला रहे हैं और इसका प्रयोग तेजी से शुरू कर दिया है। ऐसा नहीं है कि संचालकों ने गैस सिलिंडरों से अपना ध्यान हटा दिया है। वह गैस सिलिंडरों का प्रयोग करने के लिए भी तैयार हैं। सिलिंडर मिलते ही उसका भी प्रयोग वह जरूर करेंगे लेकिन लंबे समय तक व्यवस्था बाधित न हो इसके लिए कोयला खरीदा जा रहा है। कोयले की खपत बढ़ने पर इसके दाम में भी वृद्धि दर्ज की गई है। अब तक थोक में मिलने वाला पत्थर कोयला 1,700 रुपये प्रति क्विंटल था। जो वर्तमान में 2,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। स्थानीय स्तर पर फुटकर में यह कोयला 25 रुपये प्रति किलोग्राम यानी 2,500 रुपये क्विंटल की दर से बिक रहा है। कोयला कारोबारी मुन्ना सिंह ने बताया कि गैस आपूर्ति में हो रही दिक्कतों के चलते कोयले के दाम बढ़े हैं। महोबा में अधिकांश लोग सीधे छतरपुर से कोयला खरीदते हैं। स्थानीय में छोटे-छोटे दुकानदार, किलो में खरीदारी करके अपना कारोबार करते हैं।
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कॉमर्शियल गैस सिलिंडरों की आपूर्ति न होने के चलते ढाबों व होटलों में कारोबार प्रभावित हो रहा था। ऐसे में संचालकों ने कारोबार बचाने के लिए सबसे पहले भट्टियों की खरीदारी की और इसे अपने प्रतिष्ठान पर रखा। साथ ही विशेष जरूरत पड़ने पर इनका प्रयोग करने की योजना बनाई थी। संचालकों ने इधर-उधर से जुगाड़ करके गैस सिलिंडरों का भी इंतजाम किया और उनका प्रयोग भी किया। गैस आपूर्ति में हो रही दिक्कत व अनुमान के तहत लंबे समय तक बनी रहने वाली इस समस्या से निजात पाने के लिए संचालकों ने अपनी कोयला भट्टियों को गरमाना शुरू कर दिया। संचालक इस समय सीधे छतरपुर से 10-20 क्विंटल कोयला खरीदकर ला रहे हैं और इसका प्रयोग तेजी से शुरू कर दिया है। ऐसा नहीं है कि संचालकों ने गैस सिलिंडरों से अपना ध्यान हटा दिया है। वह गैस सिलिंडरों का प्रयोग करने के लिए भी तैयार हैं। सिलिंडर मिलते ही उसका भी प्रयोग वह जरूर करेंगे लेकिन लंबे समय तक व्यवस्था बाधित न हो इसके लिए कोयला खरीदा जा रहा है। कोयले की खपत बढ़ने पर इसके दाम में भी वृद्धि दर्ज की गई है। अब तक थोक में मिलने वाला पत्थर कोयला 1,700 रुपये प्रति क्विंटल था। जो वर्तमान में 2,000 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा है। स्थानीय स्तर पर फुटकर में यह कोयला 25 रुपये प्रति किलोग्राम यानी 2,500 रुपये क्विंटल की दर से बिक रहा है। कोयला कारोबारी मुन्ना सिंह ने बताया कि गैस आपूर्ति में हो रही दिक्कतों के चलते कोयले के दाम बढ़े हैं। महोबा में अधिकांश लोग सीधे छतरपुर से कोयला खरीदते हैं। स्थानीय में छोटे-छोटे दुकानदार, किलो में खरीदारी करके अपना कारोबार करते हैं।

फोटो 01 एमएएचपी 03 परिचय-झलकारीबाई तिराहे पास स्थित कोल डिपो में बोरी में कोयला भरता कर्मचारी।
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