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Mahoba News: उर्मिल, मझगवां बांध व बेलासागर तालाब का होगा सर्वे
Tue, 05 Aug 2025 12:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
संवाद न्यूज एजेंसी, महोबा
Updated Tue, 05 Aug 2025 12:40 AM IST
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महोबा। केन-बेतवा लिंक नहर निर्माण खंड-दो इकाई की ओर से जनपद के उर्मिल व मझगवां बांध और बेलासागर तालाब का हाईड्रोग्राफिक व बाथिमेट्रिक सर्वे कराया जाएगा। यह सर्वे करीब 17 लाख की लागत से होगा। एक माह के अंदर यह सर्वे पूरा होगा।
केन-बेतवा लिंक नहर के निर्माण को लेकर काम शुरू कराया जा रहा है। इसके लिए जिले में केन-बेतवा लिंक नहर निर्माण खंड की ओर से काम कराया जाएगा। प्रथम चरण में यहां के उर्मिल बांध, मझगवां बांध और बेलासागर तालाब में हाईड्रोग्राफिक व बाथिमेट्रिक सर्वे के माध्यम से इन जलाशयों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
ताकि, यहां पर आगामी समय में बेहतर तरीके से काम कराया जा सके। उधर, केन-बेतवा लिंक नहर निर्माण खंड-दो के अधिशासी अभियंता नरेंद्र कुमार जड़िया का कहना है कि सर्वे कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया 18 अगस्त तक पूरी होगी। इसके बाद सर्वे होगा।
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हाइड्रोग्राफिक और बाथिमेट्रिक प्रौद्योगिकी का होगा प्रयोग
हाइड्रोग्राफिक और बाथिमेट्रिक प्रौद्योगिकी का उपयोग जलाशयों में पानी के नीचे के क्षेत्रों का सर्वेक्षण और मानचित्रण में किया जाता है। हाइड्रोग्राफी के माध्यम से जल निकायों व आसपास की भूमि की भौतिक विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। साथ ही जीपीएस और अन्य उपकरणों का उपयोग करके पानी के नीचे की स्थलाकृति को मापा जाता है। इसमें जल निकायों की गहराई, धाराएं व तरंगों का भी अध्ययन शामिल होता है। वहीं, बाथिमेट्रिक सर्वेक्षण के माध्यम से पर्यावरण अध्ययन, भूवैज्ञानिक अनुसंधान, संसाधन अन्वेषण, स्थलाकृति आदि को समझने के लिए किया जाता है। यह पानी के नीचे की संरचनाओं जैसे कि केबल और पाइपलाइन की योजना बनाने और उन्हें स्थापित करने में भी उपयोगी है।
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केन-बेतवा लिंक नहर के निर्माण को लेकर काम शुरू कराया जा रहा है। इसके लिए जिले में केन-बेतवा लिंक नहर निर्माण खंड की ओर से काम कराया जाएगा। प्रथम चरण में यहां के उर्मिल बांध, मझगवां बांध और बेलासागर तालाब में हाईड्रोग्राफिक व बाथिमेट्रिक सर्वे के माध्यम से इन जलाशयों का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
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ताकि, यहां पर आगामी समय में बेहतर तरीके से काम कराया जा सके। उधर, केन-बेतवा लिंक नहर निर्माण खंड-दो के अधिशासी अभियंता नरेंद्र कुमार जड़िया का कहना है कि सर्वे कार्य के लिए टेंडर प्रक्रिया 18 अगस्त तक पूरी होगी। इसके बाद सर्वे होगा।
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हाइड्रोग्राफिक और बाथिमेट्रिक प्रौद्योगिकी का होगा प्रयोग
हाइड्रोग्राफिक और बाथिमेट्रिक प्रौद्योगिकी का उपयोग जलाशयों में पानी के नीचे के क्षेत्रों का सर्वेक्षण और मानचित्रण में किया जाता है। हाइड्रोग्राफी के माध्यम से जल निकायों व आसपास की भूमि की भौतिक विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है। साथ ही जीपीएस और अन्य उपकरणों का उपयोग करके पानी के नीचे की स्थलाकृति को मापा जाता है। इसमें जल निकायों की गहराई, धाराएं व तरंगों का भी अध्ययन शामिल होता है। वहीं, बाथिमेट्रिक सर्वेक्षण के माध्यम से पर्यावरण अध्ययन, भूवैज्ञानिक अनुसंधान, संसाधन अन्वेषण, स्थलाकृति आदि को समझने के लिए किया जाता है। यह पानी के नीचे की संरचनाओं जैसे कि केबल और पाइपलाइन की योजना बनाने और उन्हें स्थापित करने में भी उपयोगी है।