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यूपी बोर्ड: जनवरी से शुरू होंगी उपचारात्मक कक्षाएं
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संवाद न्यूज एजेंसी
महोबा। बोर्ड परीक्षा की तैयारियों के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। वर्ष 2023-24 में होने वाली परीक्षाओं के लिए बोर्ड की ओर से उपचारात्मक कक्षाएं लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए कक्षावार विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के सचिव नीरज कुमार पांडेय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि परीक्षा में विद्यार्थी बेहतर अंक ला सकें, इसके लिए स्कूलों में उपचारात्मक कक्षाएं लगाई जाएंगी। कक्षावार विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। शिक्षक विद्यार्थियों की कमजोरी का पता लगाकर परीक्षा से पहले उसे दूर करने का प्रयास करेंगे। गणित, विज्ञान, वाणिज्य समेत अन्य विषयों में भी विद्यार्थियों की कमी का पता लगाया जाएगा।
पहले शिक्षक कक्षा में ही विद्यार्थियों की कमी को दूर करने का प्रयास करेंगे। इसी के साथ समस्या आने पर अलग से समय देकर भी विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम समझाया जाएगा ताकि, छात्रों को किसी भी टॉपिक में समस्या होने पर वह शिक्षक के माध्यम से उसे बेहतर तरीके से समझ सकें। उपचारात्मक कक्षाओं के संचालन को लेकर स्थानीय स्तर पर विभागीय अधिकारियों ने रणनीति बनाना शुरू कर दी है ताकि बच्चों को इसका उचित लाभ मिल सके।
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महोबा। बोर्ड परीक्षा की तैयारियों के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है। वर्ष 2023-24 में होने वाली परीक्षाओं के लिए बोर्ड की ओर से उपचारात्मक कक्षाएं लगाने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए कक्षावार विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग के सचिव नीरज कुमार पांडेय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि परीक्षा में विद्यार्थी बेहतर अंक ला सकें, इसके लिए स्कूलों में उपचारात्मक कक्षाएं लगाई जाएंगी। कक्षावार विद्यार्थियों का चयन किया जाएगा। शिक्षक विद्यार्थियों की कमजोरी का पता लगाकर परीक्षा से पहले उसे दूर करने का प्रयास करेंगे। गणित, विज्ञान, वाणिज्य समेत अन्य विषयों में भी विद्यार्थियों की कमी का पता लगाया जाएगा।
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पहले शिक्षक कक्षा में ही विद्यार्थियों की कमी को दूर करने का प्रयास करेंगे। इसी के साथ समस्या आने पर अलग से समय देकर भी विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम समझाया जाएगा ताकि, छात्रों को किसी भी टॉपिक में समस्या होने पर वह शिक्षक के माध्यम से उसे बेहतर तरीके से समझ सकें। उपचारात्मक कक्षाओं के संचालन को लेकर स्थानीय स्तर पर विभागीय अधिकारियों ने रणनीति बनाना शुरू कर दी है ताकि बच्चों को इसका उचित लाभ मिल सके।
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