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Mahoba News: बुंदेली धरा को हरा-भरा करने के लिए महोबा में चल रहा अनूठा अभियान
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महोबा। वीर आल्हा-ऊदल की नगरी महोबा में पर्यावरण प्रेमियों का अनूठा अभियान चल रहा है। यह अभियान है धरती को हरा-भरा करने का। पौधरोपण से लेकर उसे सींचने तक की जिम्मेदारी उठाई जा रही है। ताकि आज का पौधा कल का विशाल पेड़ होगा। फूल-फल लगेंगे, लोगों को छाया मिलेगी और शुद्घ हवा भी। वातावरण बेहतर होगा तो इससे पर्यावरण संतुलन बना रहेगा। इस काम में किसी भी प्रकार की सरकारी मदद नहीं ली जाती।
राजकीय हाईस्कूल दुलारा के प्रधानाचार्य प्रेमचंद्र अनुरागी पिछले करीब 11 साल से पौधे लगाने का काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि धरती हमारी मां है और जिस तरह से मां हमारा पालन पोषण करती है, ठीक वैसे ही धरती भी हमें पालती है। ऐसे में अगर हम अपनी मां के प्रति कुछ कर्तव्य निर्धारित करते हैं, तो धरती मां के प्रति क्यों नहीं। यही सवाल था, जिसके कारण उन्होंने वर्ष 2012 में पौधरोपण की शुरुआत की। अब तक विभिन्न कॉलेजों व अन्य जगहों में सैकड़ों पौधे लगा चुके हैं। सिफ पौधे लगाते बल्कि यह भी ध्यान रखते हैं कि पौधों को बराबर पानी मिलता रहे। इसके लिए स्वयं, कर्मचारियों और छात्रों की मदद से पानी पाइपलाइन की व्यवस्था की जाती है। पौधरोपण को लेकर प्रेमचंद्र का जज्बा देख कर उन्हें कई बार अधिकारियों और विभिन्न संगठनों की ओर से सम्मानित भी किया गया। उनका कहना है कि आज भी वह जब अपने लगाए पेड़ों की छांव में खड़े होते हैं तो या किसी और को खड़ा देखते हैं तो तो लगता है यही है उनका असली अवॉर्ड, जो कुदरत का दिया हुआ अवॉर्ड।
वैदिक कृषि संस्थान पर्यावरण के क्षेत्र में जिले में पिछले तीन वर्ष से सक्रिय है। संस्था की ओर से अब तक चार लाख पौधों का रोपण कराया जा चुका हैं। किसानों को निशुल्क पौधे वितरित किए जा रहे हैं। इस वर्ष पांच लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य है। संस्था की ओर से पर्यावरण के सुधार के साथ ही लघु सीमांत किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रयास किया जा रहा है। वैदिक कृषि केंद्र मिर्जापुर की है। संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर महेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि फलदार पौधे तीन से पांच वर्ष में और लकड़ी वाले पौधे जैसे सागौन, महोगनी 10 से 15 साल बाद किसानों को आय देने लगते हैं। किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए सब्जियों के बीज और पपीते का पौधरोपण कराया जाता है। जिससे लोगों में पौधे लगाने में रुचि बनी रहती है। संस्था जिले के कबरई, पनवाड़ी और जैतपुर ब्लॉक, झांसी के रानीपुर ब्लाक और मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव ब्लॉक में बड़े स्तर पौधारोपण पर काम कर रही है।
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छैमाई माता मंदिर समिति वर्ष 2000 से धरती को हरा भरा करने का कार्य कर रही है। इस कार्य में समिति के करीब 15 लोग सहयोग करते हैं। तालाब किनारे, पहाड़, सड़क किनारे, सार्वजनिक स्थानों में पौधे लगा कर उस स्थान को हर-भरा किया जा रहा है। हालांकि, समिति की ओर से लगाए पौधों से से अभी तक 20 फीसदी ही पौधे जीवित रह सके और बड़े होकर पेड़ में तब्दील हो गए हैं। समिति के डॉ. सतीश का कहना है आर्थिक समस्या, पानी का अभाव और शासन से कोई मदद न मिलने से पौधों का रख-रखाव नहीं हो पाता। फिर भी पौधों के रखरखाव को लेकर पूरा ख्याल रखा जाता है। डॉ. सतीश का कहना है धरती को हरा भरा करना उनका सपना है। ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे।
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राजकीय हाईस्कूल दुलारा के प्रधानाचार्य प्रेमचंद्र अनुरागी पिछले करीब 11 साल से पौधे लगाने का काम कर रहे हैं। उनका मानना है कि धरती हमारी मां है और जिस तरह से मां हमारा पालन पोषण करती है, ठीक वैसे ही धरती भी हमें पालती है। ऐसे में अगर हम अपनी मां के प्रति कुछ कर्तव्य निर्धारित करते हैं, तो धरती मां के प्रति क्यों नहीं। यही सवाल था, जिसके कारण उन्होंने वर्ष 2012 में पौधरोपण की शुरुआत की। अब तक विभिन्न कॉलेजों व अन्य जगहों में सैकड़ों पौधे लगा चुके हैं। सिफ पौधे लगाते बल्कि यह भी ध्यान रखते हैं कि पौधों को बराबर पानी मिलता रहे। इसके लिए स्वयं, कर्मचारियों और छात्रों की मदद से पानी पाइपलाइन की व्यवस्था की जाती है। पौधरोपण को लेकर प्रेमचंद्र का जज्बा देख कर उन्हें कई बार अधिकारियों और विभिन्न संगठनों की ओर से सम्मानित भी किया गया। उनका कहना है कि आज भी वह जब अपने लगाए पेड़ों की छांव में खड़े होते हैं तो या किसी और को खड़ा देखते हैं तो तो लगता है यही है उनका असली अवॉर्ड, जो कुदरत का दिया हुआ अवॉर्ड।
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वैदिक कृषि संस्थान पर्यावरण के क्षेत्र में जिले में पिछले तीन वर्ष से सक्रिय है। संस्था की ओर से अब तक चार लाख पौधों का रोपण कराया जा चुका हैं। किसानों को निशुल्क पौधे वितरित किए जा रहे हैं। इस वर्ष पांच लाख पौधे रोपित करने का लक्ष्य है। संस्था की ओर से पर्यावरण के सुधार के साथ ही लघु सीमांत किसानों की आय बढ़ाने का भी प्रयास किया जा रहा है। वैदिक कृषि केंद्र मिर्जापुर की है। संस्था के प्रोजेक्ट मैनेजर महेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि फलदार पौधे तीन से पांच वर्ष में और लकड़ी वाले पौधे जैसे सागौन, महोगनी 10 से 15 साल बाद किसानों को आय देने लगते हैं। किसानों की आय सुनिश्चित करने के लिए सब्जियों के बीज और पपीते का पौधरोपण कराया जाता है। जिससे लोगों में पौधे लगाने में रुचि बनी रहती है। संस्था जिले के कबरई, पनवाड़ी और जैतपुर ब्लॉक, झांसी के रानीपुर ब्लाक और मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के नौगांव ब्लॉक में बड़े स्तर पौधारोपण पर काम कर रही है।
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छैमाई माता मंदिर समिति वर्ष 2000 से धरती को हरा भरा करने का कार्य कर रही है। इस कार्य में समिति के करीब 15 लोग सहयोग करते हैं। तालाब किनारे, पहाड़, सड़क किनारे, सार्वजनिक स्थानों में पौधे लगा कर उस स्थान को हर-भरा किया जा रहा है। हालांकि, समिति की ओर से लगाए पौधों से से अभी तक 20 फीसदी ही पौधे जीवित रह सके और बड़े होकर पेड़ में तब्दील हो गए हैं। समिति के डॉ. सतीश का कहना है आर्थिक समस्या, पानी का अभाव और शासन से कोई मदद न मिलने से पौधों का रख-रखाव नहीं हो पाता। फिर भी पौधों के रखरखाव को लेकर पूरा ख्याल रखा जाता है। डॉ. सतीश का कहना है धरती को हरा भरा करना उनका सपना है। ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे।