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पत्थर कारोबार बंद होने से बीस हजार श्रमिक बेकार
अमर उजाला ब्यूरो महोबा
Updated Tue, 14 Jul 2015 11:42 PM IST
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यमुना पुल के टूटने और उसके विकल्प न मिलने से पत्थर कारोबार में लगे 20 हजार श्रमिकों के सामने रोजी रोटी के लाले पड़ गए हैं। एनएचएआई द्वारा दूसरे पुल की स्वीकृति न दिए जाने से पत्थर मंडी कबरई में ट्रकों की धमाचौकड़ी बंद हो गई है, तो वहीं माल की लोडिंग न होने से पहाड़ों पर काम बंद हो गया है। जिससे क्रेशर प्लांट में लगे 20 हजार से ज्यादा श्रमिक बेकार हो गए हैं। बीस दिन के लंबे इंतजार के बाद उन्हें मंडी में काम न मिलने से एक वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है।
कबरई पत्थर मंडी में पहाड़ाें पर 10 हजार से अधिक श्रमिक दैनिक मजदूरी पर काम करते हैं। वहीं माल की लोडिंग पर भी पांच हजार , क्रेशरों पर माल के उत्पादन पर पांच हजार एवं अन्य कामों पर तीन हजार से अधिक श्रमिक काम करते हैं। जिन्हें केवल पत्थर उद्योग के काम का ही दशकों पुराना अनुभव है। ऐसी स्थिति में वे अन्य काम नहीं कर पाते। अब बीस दिन से अधिक गुजर गए हैं लेकिन यमुना पुल की मरम्मत का काम पूरा नहीं हो पाया जिससे श्रमिकों को बिक्री के अभाव में क्रेशर मालिकों और पहाड़ मालिकों ने काम देना बंद कर दिया है। दिन रात पहाड़ तोड़कर पेट पालने वाले मजदूरों के सामने एक वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। बघवा पहाड़ में काम करने पाले श्रमिक रामकिशोर अहिरवार, दिनेश प्रजापति, राजू अनुरागी, उमेश, शिव प्रसाद कुशवाहा आदि ने बताया कि रोज-रोज काम की उम्मीद में वेे पहाड़ाें और क्रेशर प्लांटों पर जाते हैं लेकिन उनके कार्य स्थल पर काम न होने की बात कहकर भगा दिया जाता है। बिना काम के मालिक एडवांस भी नहीं दे रहे हैं। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है। मकरबई पहाड़ पर काम करने वाले सियाराम रैकवार, कुल्लू, राजकिशोर आदि ने बताया कि कि जुलाई माह में स्कूल खुल गए हैं, बच्चों के एडमीशन कराना है किताबों कापी के लिए भी पैसे नहीं हैं कैसे उनक ी पढ़ाई हो इस को लेकर वे परेशान हैं। जल्द से जल्द यमुना पुल चालू हो जाए तो वे काम पर फिर से लौटकर अपनी जीविका चला सकें।
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कबरई पत्थर मंडी में पहाड़ाें पर 10 हजार से अधिक श्रमिक दैनिक मजदूरी पर काम करते हैं। वहीं माल की लोडिंग पर भी पांच हजार , क्रेशरों पर माल के उत्पादन पर पांच हजार एवं अन्य कामों पर तीन हजार से अधिक श्रमिक काम करते हैं। जिन्हें केवल पत्थर उद्योग के काम का ही दशकों पुराना अनुभव है। ऐसी स्थिति में वे अन्य काम नहीं कर पाते। अब बीस दिन से अधिक गुजर गए हैं लेकिन यमुना पुल की मरम्मत का काम पूरा नहीं हो पाया जिससे श्रमिकों को बिक्री के अभाव में क्रेशर मालिकों और पहाड़ मालिकों ने काम देना बंद कर दिया है। दिन रात पहाड़ तोड़कर पेट पालने वाले मजदूरों के सामने एक वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया है। बघवा पहाड़ में काम करने पाले श्रमिक रामकिशोर अहिरवार, दिनेश प्रजापति, राजू अनुरागी, उमेश, शिव प्रसाद कुशवाहा आदि ने बताया कि रोज-रोज काम की उम्मीद में वेे पहाड़ाें और क्रेशर प्लांटों पर जाते हैं लेकिन उनके कार्य स्थल पर काम न होने की बात कहकर भगा दिया जाता है। बिना काम के मालिक एडवांस भी नहीं दे रहे हैं। जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बदतर होती जा रही है। मकरबई पहाड़ पर काम करने वाले सियाराम रैकवार, कुल्लू, राजकिशोर आदि ने बताया कि कि जुलाई माह में स्कूल खुल गए हैं, बच्चों के एडमीशन कराना है किताबों कापी के लिए भी पैसे नहीं हैं कैसे उनक ी पढ़ाई हो इस को लेकर वे परेशान हैं। जल्द से जल्द यमुना पुल चालू हो जाए तो वे काम पर फिर से लौटकर अपनी जीविका चला सकें।
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