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बीमारी से परेशान किसान ने फांसी लगाकर दी जान
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कबरई (महोबा)। थाना कबरई के खजुरिया पहरा गांव में कर्ज और बीमारी से परेशान किसान ने फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस ने शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। पुलिस आत्महत्या के कारणों की जांच कर रही है।
खजुरिया पहरा गांव निवासी मुलुवा (45) छह बीघा जमीन में खेती-किसानी करके परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। बीते दो साल से मुलुवा क्षयरोग से पीड़ित था। वह इलाज भी करा रहा था। जिससे परेशान होकर मुलुवा ने गुरुवार की रात मकान के कमरे में लट्ठे से रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। जिससे उसकी मौत हो गई। सुबह परिजनों को जानकारी हुई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच की।
मृतक के पुत्र देवीदीन ने बताया कि पिता का दो साल से इलाज चल रहा था। जिसमें काफी पैसा खर्च हो गया। तीन माह पहले उन्होंने बेटी की शादी की थी। उनके ऊपर बैंक का 50 हजार व साहूकारों का 30 हजार रुपये कर्ज था। बीमारी में आराम न मिलने व कर्ज अदायगी की चिंता को लेकर वह परेशान रहते थे। घटना से मृतक के पुत्र देवीदीन, सोनू, मोहित व पुत्रियां फूला, रागिनी का रो-रोकर बुरा हाल रहा। मृतक की पत्नी आलोक कुमारी ने बताया कि बड़ी बेटी फूला की शादी जालौन जिले के रमपुरा में हुई थी। छोटी बेटी रागिनी दिव्यांग हैं। परिवार के मुखिया की मौत से उसके ऊपर बच्चों के भरण-पोषण का पहाड़ टूट पड़ा है।
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खजुरिया पहरा गांव निवासी मुलुवा (45) छह बीघा जमीन में खेती-किसानी करके परिवार का भरण-पोषण कर रहा था। बीते दो साल से मुलुवा क्षयरोग से पीड़ित था। वह इलाज भी करा रहा था। जिससे परेशान होकर मुलुवा ने गुरुवार की रात मकान के कमरे में लट्ठे से रस्सी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली। जिससे उसकी मौत हो गई। सुबह परिजनों को जानकारी हुई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर जांच की।
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मृतक के पुत्र देवीदीन ने बताया कि पिता का दो साल से इलाज चल रहा था। जिसमें काफी पैसा खर्च हो गया। तीन माह पहले उन्होंने बेटी की शादी की थी। उनके ऊपर बैंक का 50 हजार व साहूकारों का 30 हजार रुपये कर्ज था। बीमारी में आराम न मिलने व कर्ज अदायगी की चिंता को लेकर वह परेशान रहते थे। घटना से मृतक के पुत्र देवीदीन, सोनू, मोहित व पुत्रियां फूला, रागिनी का रो-रोकर बुरा हाल रहा। मृतक की पत्नी आलोक कुमारी ने बताया कि बड़ी बेटी फूला की शादी जालौन जिले के रमपुरा में हुई थी। छोटी बेटी रागिनी दिव्यांग हैं। परिवार के मुखिया की मौत से उसके ऊपर बच्चों के भरण-पोषण का पहाड़ टूट पड़ा है।
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