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महोबाः इस बार नहीं लगेगा उत्तर भारत का मशहूर कजली मेला
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वीर आल्हा की प्रतिमा
- फोटो : MAHOBA
महोबा। आल्हा-ऊदल की याद में लगने वाला उत्तर भारत का मशहूर कजली मेला इस बार कोरोना संक्रमण के चलते नहीं आयोजित किया जाएगा। महोबा संरक्षण एवं विकास समिति ने मेले के आयोजन से हाथ खड़े कर लिए है। जिसकी वजह से 837 साल पुराना ऐतिहासिक मेला रद्द कर दिया गया है।
जिला प्रशासन की ओर से मेले के आयोजन को लेकर स्थिति स्पष्ट न किए जाने से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि, बोर्ड की बैठक में मेले का बजट स्वीकृत न किए जाने से आयोजन खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। एक सप्ताह तक चलने वाले कजली मेले के लिए कीरत सागर मैदान को नहीं खाली कराया गया है न ही मेला परिसर में सफाई कराई गई है।
साथ ही महोबा संरक्षण एवं विकास समिति के पदाधिकारियों के नाम भी नहीं घोषित हुए हैं। इससे यह स्पष्ट है कि 837 सालों से लगातार लगने वाले ऐतिहासिक कजली मेले का आयोजन इस बार नहीं किया जाएगा। पहले तीन अगस्त को मेले का आयोजन संभावित था।
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टूटेगी 837 वर्ष पुरानी परंपरा
837 साल पुराने कजली मेले का आयोजन न होने से मेला लगने की पंरपरा टूट जाएगी। राजा-महाराजाओं का शासनकाल रहा हो, या फिर ब्रिटिश हुकूमत हमेशा कजली मेले का आयोजन होता रहा है। यह पहला ऐसा अवसर है जब कोरोना महामारी के चलते कजली मेले के आयोजन की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा टूटेगी।
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जिला प्रशासन की ओर से मेले के आयोजन को लेकर स्थिति स्पष्ट न किए जाने से असमंजस की स्थिति बनी हुई थी। हालांकि, बोर्ड की बैठक में मेले का बजट स्वीकृत न किए जाने से आयोजन खटाई में पड़ता नजर आ रहा है। एक सप्ताह तक चलने वाले कजली मेले के लिए कीरत सागर मैदान को नहीं खाली कराया गया है न ही मेला परिसर में सफाई कराई गई है।
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साथ ही महोबा संरक्षण एवं विकास समिति के पदाधिकारियों के नाम भी नहीं घोषित हुए हैं। इससे यह स्पष्ट है कि 837 सालों से लगातार लगने वाले ऐतिहासिक कजली मेले का आयोजन इस बार नहीं किया जाएगा। पहले तीन अगस्त को मेले का आयोजन संभावित था।
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टूटेगी 837 वर्ष पुरानी परंपरा
837 साल पुराने कजली मेले का आयोजन न होने से मेला लगने की पंरपरा टूट जाएगी। राजा-महाराजाओं का शासनकाल रहा हो, या फिर ब्रिटिश हुकूमत हमेशा कजली मेले का आयोजन होता रहा है। यह पहला ऐसा अवसर है जब कोरोना महामारी के चलते कजली मेले के आयोजन की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा टूटेगी।